‘स्टार वॉर्स: द मंडलोरियन एंड ग्रोगू’ रिव्यू: शानदार विजुअल्स के बावजूद कहानी में नहीं दिखा नया दम

‘स्टार वॉर्स: द मंडलोरियन एंड ग्रोगू’ एक ऐसी फिल्म है जो शानदार विजुअल्स और दमदार VFX के बावजूद कहानी के मामले में काफी कमजोर नजर आती है। फिल्म का कॉन्सेप्ट वही पुराना है—दुनिया बचाओ, मिशन पूरा करो और बड़े खतरे से लड़ो। शुरुआत में हॉलीवुड फिल्मों के अजीब और नए कैरेक्टर्स रोमांच पैदा करते थे, लेकिन अब लगभग हर दूसरी फिल्म में वही पैटर्न देखने को मिलता है। यही वजह है कि यह फिल्म कई जगहों पर दोहराव और बोरियत का एहसास कराती है।
फिल्म की कहानी मंडलोरियन और ग्रोगू के मिशन के इर्द-गिर्द घूमती है, जहां उन्हें न्यू रिपब्लिक की तरफ से वॉरलॉर्ड कॉइन को ढूंढ़ने का काम मिलता है। इस मिशन में उन्हें हट ट्विन्स की मदद चाहिए होती है, जो अपने भतीजे रोट्टा हट को बचाने की शर्त रखते हैं। मंडलोरियन और ग्रोगू उसे ढूंढ़ भी लेते हैं, लेकिन इसके बाद कहानी में कोई बड़ा या चौंकाने वाला मोड़ देखने को नहीं मिलता। यही वजह है कि फिल्म का प्लॉट काफी सीमित और कमजोर महसूस होता है।
विजुअल्स और एक्शन सीक्वेंस फिल्म की सबसे बड़ी ताकत हैं। अलग-अलग जीव और कैरेक्टर्स को शानदार VFX के जरिए पेश किया गया है, जबकि फाइट सीन्स भी प्रभावशाली लगते हैं। हालांकि इन सबके बावजूद फिल्म कुछ नया देने में नाकाम रहती है। ग्रोगू की क्यूटनेस और सेकेंड हाफ में मंडलोरियन के साथ उसकी इमोशनल बॉन्डिंग जरूर दर्शकों को पसंद आ सकती है, लेकिन पूरी फिल्म में ऐसा कुछ खास नहीं है जो लंबे समय तक याद रह जाए।
एक्टिंग की बात करें तो पेड्रो पास्कल अपने किरदार में ठीक लगते हैं, हालांकि ज्यादातर समय हेलमेट में होने की वजह से उनकी परफॉर्मेंस का प्रभाव सीमित रह जाता है। वहीं ग्रोगू फिल्म का सबसे दिल जीतने वाला किरदार बनकर उभरता है। निर्देशन और लेखन में जॉन फेवर्यू कोई खास कमाल नहीं दिखा पाए हैं। कुल मिलाकर फिल्म एक औसत साइंस-फिक्शन अनुभव देती है, जिसे थिएटर में महंगे टिकट लेकर देखने की बजाय OTT पर देखना ज्यादा बेहतर विकल्प लग सकता है। फिल्म को 2 स्टार की रेटिंग दी जा सकती है।









