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इंदौर में कल से BRICS देशों का बड़ा सम्मेलन, 20 देशों के प्रतिनिधि होंगे शामिल

भारत इस साल BRICS की अध्यक्षता कर रहा है और इसी कड़ी में मध्य प्रदेश के इंदौर शहर में ब्रिक्स कृषि मंत्रियों की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित होने जा रही है। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए इस बड़े आयोजन की पूरी रूपरेखा सामने रखी। उन्होंने बताया कि ब्रिक्स की शुरुआत 2006 में हुई थी और आज 11 सदस्य देशों और 10 साझेदार देशों के साथ यह दुनिया के सबसे प्रभावशाली समूहों में से एक बन चुका है। वैश्विक नजरिए से यह समूह बेहद अहम है क्योंकि दुनिया की करीब 42 प्रतिशत कृषि भूमि, 68 प्रतिशत कृषि जोतें और लगभग 42 प्रतिशत खाद्य उत्पादन इन्हीं ब्रिक्स देशों के पास है।

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भारत पहले भी तीन सम्मेलनों की अध्यक्षता कर चुका

इस मंच पर होने वाला सहयोग पूरी दुनिया की खाद्य सुरक्षा को सीधे प्रभावित करता है। भारत इससे पहले 2012, 2016 और 2021 में ब्रिक्स की अध्यक्षता कर चुका है। 2016 की अध्यक्षता के दौरान ब्रिक्स कृषि अनुसंधान मंच जैसी बड़ी और महत्वपूर्ण पहल शुरू की गई थी जो आज भी सदस्य देशों के बीच कृषि सहयोग की बुनियाद बनी हुई है।

‘हमारी नीति में छोटे जोत वाले किसान’

शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि अधिकारियों के समूह ने अब तक आठ बैठकें की हैं जिनमें खाद्य सुरक्षा, मत्स्य पालन और पशुपालन जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा हुई है। उन्होंने जोर देकर कहा कि हर नीति और नवाचार के केंद्र में छोटे जोत वाले किसान रहे हैं क्योंकि उनकी अपनी अलग समस्याएं हैं। रिसर्च का लाभ इन किसानों तक पहुंचे, बाजार तक उनकी पहुंच आसान हो और कृषि ऋण का प्रवाह इनकी ओर बढ़े — यही इस बैठक का मूल संदेश है। किसानों की आय, रोजगार, आजीविका और सतत कृषि विकास पर केंद्रित चर्चा इस सम्मेलन का अहम हिस्सा होगी।

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20 देशों के प्रतिनिधि होंगे शामिल

इंदौर में आयोजित हो रहा यह सम्मेलन इसलिए भी खास है क्योंकि पहली बार ब्रिक्स कृषि मंत्रियों की बैठक मंत्री स्तर पर आयोजित की जा रही है। सदस्य और साझेदार देशों सहित करीब 20 देशों के प्रतिनिधि इसमें शामिल होने जा रहे हैं। कृषि मंत्री ने बताया कि भारत की अध्यक्षता में कृषि कार्य समूह के अंतर्गत चार सत्रों में आठ सफल बैठकें संपन्न होंगी।

4 वर्गों पर फोकस

इस वर्ष के आयोजन में छोटे और सीमांत किसान हर नीति और सहयोग के केंद्र में रहेंगे। कृषि विकास का असली अर्थ तभी सिद्ध होगा जब किसानों की आय बढ़ेगी और उनकी आजीविका सुरक्षित होगी। इस बार मुख्य रूप से चार विषयों पर काम किया जाएगा — खाद्य सुरक्षा, पोषण और आजीविका; कृषि व्यापार और सहयोग; जलवायु अनुकूलन और सतत कृषि; तथा कृषि और खाद्य प्रणालियों में नवाचार और साझेदारी को मजबूत बनाना।

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कल यानी 9 जून से होगी शुरुआत

प्रेस कॉन्फ्रेंस में जलवायु परिवर्तन की वैश्विक चुनौती पर बात करते हुए कृषि मंत्री ने पुनर्योजी कृषि, सतत पद्धतियों और डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर जैसी आधुनिक तकनीकों को छोटे किसानों तक पहुंचाने पर जोर दिया। महिलाओं और युवाओं के नेतृत्व को बढ़ावा देना भी इस एजेंडे का हिस्सा है। 12 जून को लघु किसानों, महिलाओं और युवाओं के माध्यम से भविष्य की खाद्य सुरक्षा विषय पर एक विशेष मंत्री स्तरीय संवाद होगा। तय कार्यक्रम के अनुसार 9 से 11 जून तक कृषि कार्य समूह की बैठकें होंगी और 12 से 13 जून को मुख्य कृषि मंत्रियों की बैठक आयोजित की जाएगी।

ब्रिक्स वाटिका भी बनेगी

भारत की प्रकृति से जुड़ी संस्कृति को दर्शाने के लिए इस आयोजन के दौरान सदस्य देशों के मंत्रियों और प्रतिनिधियों की सहभागिता से एक विशेष ब्रिक्स वाटिका का निर्माण किया जाएगा और सामूहिक वृक्षारोपण होगा जो पर्यावरण संरक्षण के प्रति साझी प्रतिबद्धता का प्रतीक बनेगा। इसके अलावा इंदौर आने वाले विदेशी मेहमानों को भारत की समृद्ध सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत से रूबरू कराने के लिए राजवाड़ा, छप्पन दुकान और मांडू जैसे ऐतिहासिक स्थलों का भ्रमण भी कराया जाएगा। कृषि मंत्री ने पूरा भरोसा जताया है कि इंदौर की यह बैठक ब्रिक्स देशों के कृषि सहयोग को नई ऊंचाई पर ले जाएगी और वैश्विक एजेंडे में करोड़ों छोटे किसानों के हितों को मजबूती से स्थापित करेगी।

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