ट्रंप की नई मांग से पाकिस्तान पर बढ़ा दबाव, मान लिया तो पड़ सकते हैं बड़े संकट में

अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump ने पाकिस्तान के सामने ऐसी मांग रख दी है, जिसने इस्लामाबाद की कूटनीतिक मुश्किलें बढ़ा दी हैं। ट्रंप ने कहा है कि ईरान के साथ संभावित समझौते के बाद पाकिस्तान, सऊदी अरब और कतर समेत कई देशों को “अब्राहम अकॉर्ड्स” पर हस्ताक्षर करने चाहिए। इसका मतलब होगा कि पाकिस्तान को इजराइल के साथ रिश्ते सामान्य करने की दिशा में कदम बढ़ाना पड़ सकता है। ट्रंप ने साफ कहा कि जो देश इस समझौते का हिस्सा नहीं बनना चाहते, उनकी मंशा पर सवाल उठेंगे।
पाकिस्तान के लिए क्यों संवेदनशील है मुद्दा?
ट्रंप की इस मांग को पाकिस्तान में बेहद संवेदनशील मुद्दे के तौर पर देखा जा रहा है। पाकिस्तान लंबे समय से इजराइल को मान्यता देने को फिलिस्तीन राज्य की स्थापना से जोड़ता रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा माहौल में कोई भी पाकिस्तानी सरकार अगर अब्राहम अकॉर्ड्स में शामिल होती है, तो उसे देश के भीतर भारी राजनीतिक विरोध का सामना करना पड़ सकता है। अटलांटिक काउंसिल के सीनियर फेलो माइकल कुगलमैन ने कहा कि ट्रंप के साथ करीबी बढ़ाने का यही जोखिम है कि वह ऐसी मांग कर सकते हैं, जिसे मानना आसान नहीं होता।
पाकिस्तान की बढ़ती अहमियत और नई मुश्किल
हाल के महीनों में पाकिस्तान की वैश्विक अहमियत बढ़ी है। भारत के ऑपरेशन सिंदूर के बाद अमेरिका और पाकिस्तान के रिश्ते और मजबूत हुए हैं। वहीं ईरान के साथ तनाव कम कराने में भी पाकिस्तान मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है। ट्रंप कई बार पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर की तारीफ कर चुके हैं, लेकिन अब इजराइल से संबंधों को लेकर डाला गया दबाव इस्लामाबाद को असहज कर रहा है। पाकिस्तान के कई पूर्व राजनयिकों और विश्लेषकों ने साफ कहा है कि फिलहाल देश के लिए इजराइल को मान्यता देना लगभग असंभव फैसला होगा।
पूर्व राजदूत ने खारिज किया ट्रंप का प्रस्ताव
पाकिस्तान की पूर्व राजदूत मलीहा लोधी ने ट्रंप के प्रस्ताव को खारिज करते हुए कहा कि मौजूदा हालात 2020 जैसे नहीं हैं, जब कुछ अरब देशों ने इजराइल से रिश्ते सामान्य किए थे। उन्होंने गाजा और वेस्ट बैंक की स्थिति का जिक्र करते हुए कहा कि ऐसे समय में पाकिस्तान या कोई बड़ा मुस्लिम देश इजराइल को मान्यता नहीं देगा। हालांकि अमेरिकी रिपब्लिकन नेता लिंडसे ग्राहम ने ट्रंप की पहल का समर्थन करते हुए कहा कि अगर पाकिस्तान और सऊदी अरब जैसे देश इजराइल से औपचारिक रिश्ते बनाते हैं, तो मध्य-पूर्व में ऐतिहासिक बदलाव आ सकता है।









