परिवार ने सरकार से मांगा इमरजेंसी वीजा, शव लाने में लगेंगे तीन सप्ताह

मामला उज्जैन के सिख युवक की कनाडा में हत्या का
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पाश्र्वनाथ कॉलोनी गम में डूबी, फ्रोजन फूड कारोबारी के घर संवेदना जताने पहुंच रहे रिश्तेदार
अक्षरविश्व न्यूज उज्जैन। उज्जैन की पाश्र्वनाथ सिटी कॉलोनी में रहने वाले सिख युवक की कनाडा में हुई हत्या से पूरा परिवार स्तब्ध है। मां और पिता चाहते हं कि कैसे भी हो, जल्द से जल्द बेटे की देह उनके पास पहुंच जाए ताकि वह उसे अंतिम बार देख सके। पार्थिव देह को कनाडा से लाने में कानूनी प्रावधान आड़े आ रहे हैं। परिवार ने सांसद अनिल फिरोजिया के जरिए विदेश मंत्रालय के अधिकारियों से संपर्क कर इमरजेंसी वीजा मांगा है। पार्थिव देह को भी भारत लाने में कम से कम तीन सप्ताह का समय लग सकता है।
शहर की पॉश कॉलोनियों में से एक पाश्र्वनाथ सिटी में सोमवार की सुबह गम में डूबी रही। यहां के सी सेक्टर के 86 नंबर मकान के बाहर कुछ लोग हाथ बांधे खड़े थे। भीतर सरदार गुरजीत सिंह मनोचा और अपनी धर्मपत्नी, कुछ रिश्तेदारों के साथ बेटे गुरकीरत सिंह की तस्वीर सामने बैठे थे।

परिचित आते और ढांढस बंधाते। बेटे की तस्वीर देखकर थोडी-थोडी देर में गुरजीत सिंह फफक पड़ते, उनकी आंखों से आंसू बह निकलते। उन्हें देखकर पत्नी की भी सिसकी फूट पड़ती। दोनों खुद को जैसे-तैसे संभालते। बेटे गुरकीरत को बड़ी हसरत के साथ उन्होंने कनाडा पढऩे भेजा था। वहां के फोर्ट सेंट जॉन शहर के नार्दन लाइटस कॉलेज में बिजनेस मैनजमेंट की पढ़ाई कर रहे गुरकीरत की कुछ युवकों ने 14 मार्च को हत्या कर दी थी। मनोचा के घर पर परिचितों और रिश्तेदारों का लगातार आना-जाना लगा है। खुद इस परिवार को भी नहीं पता कि वे कब अपने बेटे की पार्थिव देह को देख पाएंगे। सभी इसके लिए अब सरकार से ही उम्मीद लगाए बैठे है।

कनाडा में शव सौंपने की लंबी प्रक्रिया
कनाडा में हत्या जैसे किसी भी अपराध के बाद पार्थिव देह को सौंपने के कड़े नियम हैं। भारत में पोस्टमार्टम के तत्काल बाद देह परिजनों को सौंप दी जाती है, वहां वैसा नहीं होता। पुलिस की जांच प्रक्रिया जब तक पूरी नहीं हो जाती और आरोपी पकड़ नहीं लिए जाते तब तक शव परिवार को नहीं सौंपा जाता। मनोचा परिवार के कुछ रिश्तेदार भी कनाडा में रहते है। वे कनाडा पुलिस के लगातार संपर्क में है। खुद इस परिवार के मुखिया गुरजीत सिंह मनोचा मानते है कि बेटे की देह को भारत लाकर अंतिम संस्कार करने की प्रक्रिया में दो से तीन सप्ताह का समय लग सकता है।
पिता बोले- मेरा बेटा तो हमेशा शांत रहता था
गु रजीत सिंह मनोचा मक्सीरोड़ उद्योगपुरी में ग्लोबल फूड्स का संचालन करते है। उनकी फर्म फ्रोजन प्रोडक्ट्स का कारोबार करती है। उनके भाई टॉवरचौक पर फ्रोजन बॉस्केट के नाम से फर्म संचालित करते हैं।परिवार में पति-पत्नी और दो बेटे हैं। बड़ा बेटा प्रभकीरत रायपुर में रहता है। छोटे बेटे गुरकीरत ने कार्मल कान्वेंट स्कूल से पढाई की थी।
सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय से बिजनेस मैनेजमेंट में ग्रेजुएशन करने के बाद पोस्टग्रेजुएशन डिग्री के लिए वह सवा साल पहले ही कनाडा गया था। वहां उसे फोर्ड सेंटजॉन शहर के नार्दन लाइटस कॉलेज में एड्मिशन मिला था। पढ़ाई के साथ वह जॉब भी करता था। वॉलमार्ट स्टोर में उसकी सर्विस थी। हायर एजुकेशन के बाद गुरकीरत कनाडा में ही सेटल होना चाहता था। पिता गुरजीत ने बताया कि बेटा बहुत ही शांत स्वभाव का था। वह कम ही बोलता था। ऐसा कैसे हो गया, समझ नहीं आ रहा है।
स्टोर से वापस लौटते समय हुई वारदात
कनाडा के तय नियमों के मुताबिक वहां सप्ताह में तीन दिन पढ़ाई और तीन दिन काम करना जरूरी है। इसी नियम के तहत गुरकीरत वॉलमार्ट स्टोर में मैनेजर थे। 14 मार्च की रात स्टोर से छुट्टी होने के बाद जब वह हॉस्टल लौट रहा था, इसी बीच 10 से 12 युवकों के साथ उसकी कहासुनी हुई। हालांकि विवाद क्या था यह अब तक स्पष्ट नहीं हो सका है। मारपीट के दौरान ही आरोपियों में से कुछ ने फोर व्हीलर से गुरकीरत को बुरी तरह कुचल दिया। उसे अस्पताल ले जाया गया लेकिन बचाया नहीं जा सका।
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