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फायर ऑडिट पर गंभीर नहीं निजी हॉस्पिटल संचालक

नगर निगम ने 41 को नोटिस थमाए, जवाब केवल 6 के आए….

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उज्जैन। हॉस्पिटल्स में अग्निकांड को रोकने के लिए शासन के कड़े प्रावधान है। इसके तहत हॉस्पिटल्स फायर ऑडिट कराने के साथ ही नगर निगम/सीएमएचओ से एनओसी लेना अनिवार्य है। इस पर शहर के निजी हॉस्पिटल संचालक गंभीर नहीं है। हाल में नगर निगम द्वारा फायर ऑडिट के लिए शहर के 41 हॉस्पिटल संचालकों को नोटिस थमाए थे। इसमें तीन शासकीय और 38 निजी हॉस्पिटल है। नोटिस जारी होने के बाद केवल 6 ने ही अपने नोटिस के जवाब दिए हैं।

शहर में 50 से ज्यादा निजी हॉस्पिटल संचालित हो रहे हैं, लेकिन इन हॉस्पिटलों में अभी तक फायर ऑडिट को लेकर कोई भी प्रक्रिया पूर्ण नहीं की गई है। हाल ही में नगर निगम ने अस्पताल संचालकों को नोटिस जारी कर 15 दिन में जवाब मांगा था। बुधवार की दोपहर तक 6 हॉस्पिटल संचालकों के ही जवाब आए हंै।

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लिहाजा उनके यहां आग से बचाव के लिए कोई इंतजाम नहीं हैं। बता दें कि हॉस्पिटलों को फायर ऑडिट एनओसी नगर निगम फायर विभाग द्वारा दी जाती है। फायर ऑडिट रिपोर्ट तैयार करने के लिए एक कमेटी बनाई गई है।

इसमें नगर निगम के इंजीनियर, फायर कंसलटेंट और फायर ब्रिगेड के फायर कर्मी तथा स्वास्थ्य विभाग से 2 डॉक्टर नियुक्त किए गए हैं। यह सभी जिले के हर अस्पताल में आग बुझाने संबंधित व्यवस्थाएं ठीक है कि नहीं देखेंगे और रिपोर्ट जिला प्रशासन को सौंपेंगे।

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यह भी खामियां

ज्यादातर अस्पताल संचालकों ने खानापूर्ति के लिए फायर सेफ्टी उपकरण तो लगवा लिए लेकिन कर्मचारियों को पता ही नहीं कि इन्हें चलाना कैसे है। कर्मचारियों को इस बारे में भी प्रशिक्षित नहीं किया जाता कि आग लगने पर वे क्या करें और क्या न करें। फायर ब्रिगेड समय-समय पर आग से बचाव के संबंध में प्रशिक्षण देता है लेकिन इनमें अस्पतालों की तरफ से कोई शामिल नहीं होता।

जब आवासीय निर्माण किया जाता है तो भवन में विद्युत लोड व अन्य इंतजाम आवास के हिसाब से होते हैं। केबल, फायर सुरक्षा के इंतजाम भी परिवार के हिसाब से रहते हैं। इसी भवन में जब अस्पताल खुल जाता है तो उपकरणों का इस्तेमाल बढऩे से विद्युत लोड बढ़ जाता है। यही वजह है कि भवन का विद्युत सिस्टम बिगड़ जाता है।

तीन शासकीय और 38 निजी हॉस्पिटलों

एक जानकारी के मुताबिक नगर निगम कार्यालय से अगस्त माह में 50अस्पतालों को नोटिस जारी किए गए थे। जिसमें भार्गव हैल्थ केयर, जी.डी बिडला, भटनागर एडवांस, शिंदे आर्थोपेडिक क्षपणक मार्ग, पेडनेकर हॉस्पिटल, संजीवनी क्लिीनिक, पाटीदार हॉस्पिटल, चेरिटेबल हॉस्पिटल, आदिनाथ हेल्थ केयर, बालाजी हॉस्पिटल, निर्मला हॉस्पिटल, जेके नर्सिंग होम, तेजनकर, सिटी लाईफ, अवन्ति हॉस्पिटल, कानवाल हॉस्पिटल वररूचि मार्ग, सौरभ आई हॉस्पिटल, तिवारी नर्सिंग होम, रावत नर्सिंग होम, सिविल अस्पताल माधव नगर, चरक हॉस्पिटल उज्जैन, जिला चिकित्सायल, ए.डी.आंजना हॉस्पिटल, ऐरन आई हॉस्पिटल, अर्चना जी.एम.एस, ए.एस.जी हॉस्पिटल, बागडी फैक्चर ट्रामा सेंटर, चौधरी ईएनसी हॉस्पिटल, देशमुख, ग्लोबल हॉस्पिटल, कानवाल हॉस्पिटल बाफना टावर,मेवाडा हॉस्पिटल, पुष्पा मिशन हॉस्पिटल, रेडिएंट आई हॉस्पिटल, उज्जैन आर्थों, उज्जैन हार्ट हॉस्पिटल एंड इन्सेन्टिव केयर, तेजवानी आई केयर स्किन एंड लेजर सेंटर, शिंदे नर्सिंग एंड मेटरनिटि हाकम, सलूजा नर्सिंग होम, सहर्ष हॉस्पिटल और एस.एस हॉस्पिटल शामिल है।

विभाग कर रहे खानापूर्ति

पूरे मामले में नगर निगम और स्वास्थ्य विभाग दोनों ही महज औपचारिकता निभा रहा है। हाल ही में नगर निगम की टीम ने जांच के नाम पर खानापूर्ति जरूर की, लेकिन अभी तक कोई भी ठोस कार्रवाई नहीं की गई, सालभर पहले भी इस प्रकार की जांच की गई थी।

नोटिस देकर औपचारिकता पूरी कर ली जाती है, जिसके कारण अस्पताल संचालकों की मनमानी बेलगाम हो रही है। वहीं अब तक बगैर एनओसी के चल रहे अस्पतालों के खिलाफ स्वास्थ्य विभाग ने भी कोई उचित कार्रवाई नहीं की है।

इनका कहना… शहर के कई निजी हॉस्पिटलों में फायर ऑडिट को लेकर लापरवाही मिली है। हमने नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। अभी तक 6 के जवाब आए हैं। जल्द ही इसकी रिपोर्ट निगम आयुक्त को पेश की जाएगी। उनके निर्देश पर आगे की कार्रवाई होगी। कई लाइसेंस भी निरस्त हो सकते हैं।
विजय गोयल फायर विभाग प्रभारी, नगर निगम उज्जैन।

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