बच्चों को बाहर खेलने भेजने से पहले सिखाएं ये 5 बातें

आधुनिक समय में माता-पिता के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपने बच्चों को बाहरी दुनिया के लिए तैयार करने और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने की है। विशेषकर जब बच्चे 9 से 12 वर्ष की आयु में प्रवेश करते हैं, तो उनमें आत्मनिर्भरता की भावना बढ़ने लगती है। इस उम्र में दोस्तों के घर जाकर खेलना, सामूहिक अध्ययन करना या रात बिताना (स्लीपओवर) बेहद आम बात है। ऐसे में बच्चों को दूसरों के घर भेजने से पहले माता-पिता के मन में सुरक्षा को लेकर कई तरह की चिंताएं और सवाल उठते हैं। इन शंकाओं का समाधान करते हुए पेरेंटिंग कोच पुष्पा शर्मा ने 5 ऐसी महत्वपूर्ण बातें बताई हैं, जिन्हें बच्चों को सिखाना बेहद आवश्यक है ताकि वे हर परिस्थिति में सुरक्षित रह सकें।

बच्चों की सुरक्षा को लेकर जागरूक होना और उन्हें सही-गलत का अंतर समझाना आज के समय की सबसे बड़ी मांग है। पेरेंटिंग कोच पुष्पा शर्मा के अनुसार, बच्चों को दूसरों के घर भेजने से पहले निम्नलिखित 5 बातों की जानकारी अवश्य देनी चाहिए:
1. असहज महसूस होने पर तुरंत सूचित करना
बच्चों को सबसे पहली और महत्वपूर्ण बात यह सिखानी चाहिए कि यदि कोई व्यक्ति उनसे कोई ऐसी बात कहता है, उन्हें छूता है, कुछ दिखाता है या ऐसा कुछ करने को कहता है जिससे वे असहज (अनकंफर्टेबल) महसूस करें, तो उन्हें बिना डरे तुरंत अपने माता-पिता को इसकी जानकारी देनी चाहिए।
2. ‘मम्मी-पापा को मत बताना’ जैसी बातों से सतर्क रहना
यदि कोई व्यक्ति बच्चे से यह कहता है कि ‘यह बात अपने मम्मी-पापा को मत बताना’ या इसे गुप्त रखने को कहता है, तो बच्चों को ऐसी हर बात तुरंत अपने माता-पिता के साथ साझा करनी चाहिए। बच्चों को यह समझना होगा कि ऐसी बातें किसी बड़े खतरे का संकेत हो सकती हैं।
3. शरीर पर स्वयं का अधिकार और स्पर्श की समझ (गुड टच-बैड टच)
बच्चों को यह स्पष्ट रूप से समझाया जाना चाहिए कि उनके शरीर पर केवल उनका ही अधिकार है। उन्हें सुरक्षित और असुरक्षित स्पर्श (गुड टच और बैड टच) का अंतर पता होना चाहिए। यदि कोई उन्हें गलत तरीके से छूने का प्रयास करे, तो उन्हें तुरंत पूरी दृढ़ता से ‘ना’ कहना चाहिए और उस स्थान से दूर हट जाना चाहिए।
4. बातचीत या व्यवहार गलत लगने पर खुलकर बोलना
माता-पिता को अपने बच्चों को यह विश्वास दिलाना होगा कि उनकी सुरक्षा और भावनाएं किसी भी अन्य चीज से बढ़कर हैं। बच्चों से कहें कि यदि उन्हें किसी का व्यवहार, मजाक, वीडियो या बातचीत गलत या अजीब लगे, तो वे बिना किसी डर या संकोच के अपने माता-पिता को बताएं।
5. बिना बताए किसी अन्य स्थान पर न जाना
बच्चों को यह नियम कड़ाई से सिखाना चाहिए कि वे जिस मित्र या व्यक्ति के घर जा रहे हैं, यदि वहां के लोग उन्हें किसी अन्य स्थान जैसे पार्क, बाजार या किसी अन्य घर ले जाने की बात करते हैं, तो वे बिना अपने माता-पिता की अनुमति के वहां न जाएं। कहीं भी जाने से पहले माता-पिता को सूचित करना अनिवार्य है।
मुख्य बिंदु
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9 से 12 वर्ष की आयु के बच्चों को दूसरों के घर भेजने से पहले सुरक्षा के नियम सिखाना जरूरी है।
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पेरेंटिंग कोच पुष्पा शर्मा ने बच्चों की सुरक्षा के लिए 5 व्यावहारिक उपाय साझा किए हैं।
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बच्चों को सुरक्षित और असुरक्षित स्पर्श (गुड टच-बैड टच) के प्रति जागरूक करना आवश्यक है।
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‘माता-पिता से बात छुपाने’ की शर्त रखने वाले लोगों से बच्चों को तुरंत सतर्क हो जाना चाहिए।
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किसी भी स्थान पर असहजता महसूस होने पर बच्चों को बिना डरे माता-पिता से बात करनी चाहिए।









