भगवान महाकाल को अर्पित होने वाली भस्म, पानी, भांग के नमूने लिए

जीएसआई की टीम पहुंची महाकाल मंदिर
अक्षरविश्व न्यूज. उज्जैन:भगवान महाकाल के शिवलिंग की स्थिति पर नजर बनाए रखने के लिए सुप्रीम कोर्ट निर्देशानुसार जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (जीएसआई) की टीम महाकाल मंदिर पहुंची। टीम ने भगवान को अर्पित होने वाली भस्म, पानी और भांग के नमूने लिए है।
लगभग 6 वर्ष पूर्व भगवान महाकालेश्वर के शिवलिंग क्षरण और मंदिर की संपदा का नुकसान होने के साथ अन्य अव्यवस्थाओं को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई थी। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने मंदिर की परंपरा और पूजन पद्धति पर हस्तक्षेप से तो इनकार कर दिया था,लेकिन शिवलिंग क्षरण का रोकने और मंदिर की संपदा को सुरक्षित रखने के जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (जीएसआई), आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (एएसआई) को गाईड लाइन बनाकर प्रस्तुत करने के आदेश दिए थे।
कोर्ट ने दोनों संस्थाओं द्वारा प्रस्तुत गाईड लाइन का पालन करने के आदेश मंदिर प्रबंध समिति और जिला प्रशासन को दिए थे। इसके साथ ही कोर्ट ने जीएसआई,एएसआई को प्रति ६ माह में मंदिर के साथ शिवलिंग का निरीक्षण, भगवान को अर्पित होने वाली सामग्री तय मानक के अनुसार होने के संबंध में परीक्षण के निर्देश दिए थे। इसी क्रम में जीएसआई की सात सदस्य टीम सोमवार शाम उज्जैन पहुंची। इसके पहले भी कई बार जीएसआई, एएसआई की टीम यहां आकर जांच कर चुकी है।

सात सदस्यीय दल ने मंदिर पहुंचकर शिवलिंग की स्थिति का आकलन किया। टीम ने शिवलिंग पर चढ़ाई गई सामग्री और जल का सैम्पल लिया। टीम ने मंदिर में चढऩे वाले आरओजल के सैंपल लिए है। लैबोरेटरी में टेस्टिंग के बाद रिपोर्ट जीएसआई के अधिकारियों को सौंपी जाएगी।जीएसआई भोपाल कार्यालय के डायरेक्टर आरएस शर्मा समेत 7 लोगों के दल ने सुबह से मंदिर में अलग-अलग सैंपल लेना शुरू किए। इसमें भस्म, आरओ वॉटर, भांग, श्रृंगार और पूजन के बाद चैंबर में निकलने वाले पानी के नमूने लिए हैं।
महाकालेश्वर मंदिर समिति ने यह उपाय किए
प्रत्येक दर्शनार्थी जलाभिषेक हेतु अधिकतम 500 मि.ली. शुद्ध जल का ही उपयोग करे सकेंगे।
जलाभिषेक हेतु शुद्ध आर.ओ. जल परिसर में तथा गर्भगृह के द्वार पर (7.0 पी.एच. मूल्य) उपलब्ध हैं।
भस्मआरती में भस्म अर्पण के समय शिवलिंग को सूती कपड़े से पूर्णत: ढंका जाता है।
अभिषेक हेतु दूध, पंचामृत आदि की सीमा प्रति व्यक्ति 1.25 लीटर लागू की गई हैं।
संध्या पूजन के बाद जल चढ़ाना बंद कर शिवलिंग स्वच्छ व सूखा रख ही रात्रि तक पूजा की जाती हैं।
वर्तमान में जल निष्कासन हेतु केप्टिव सीवरेज ट्रीटमेंट व्यवस्था होकर स्थाई करने के लिए कार्य प्रारम्भ है।
शिवलिंग संरक्षण हेतु शकर को पूर्णत: प्रतिबंधित कर पूजा हेतु खाण्डसारी का उपयोग किया जा रहा है।
गर्भगृह में तापक्रम नियंत्रण एसी द्वारा किया जा रहा है, जिससे आद्रता न हो।
मंदिर में दर्शनार्थियों की संख्या अनुसार दर्शन व्यवस्था, (गर्भगृह में सीमित संख्या हेतु) जो विशिष्ट तिथियों, पर्वों जैसे महाशिवरात्रि आदि पर रखी जाती हैं, का पालन किया जा रहा है।
गर्भगृह को सूखा स्वच्छ एवं निश्चित तापमान 17ए से 20ए ष्ट रखने हेतु ऑटोमेटिक क्लाइमेट कंट्रोल सिस्टम सेंसर स्थापित किया गया है।
पुरातत्व महत्व की संरचना व ऐतिहासिक सदंर्भ बनाए रखने के लिए मूल संरचना संरक्षित कर निरंतर कार्य किया जा रहा।
ऐतिहासिक एवं प्राचीन संदर्भ के लिए पर्याप्त नाम पट्टिकाएं प्रदर्शित की गई है।
मंदिर में नव अधोसंरचना निर्माण प्रस्तावित नहीं हैं, यद्यपि दर्शनार्थी सुविधा हेतु सक्षम प्राधिकारी की अनुमति पश्चात सुविधा व्यवस्था की जा रही हैं।
मंदिर समिति ने भस्म आरती में भगवान महाकाल को अर्पित की जाने वाली भस्मी को लेकर भी निर्देश जारी किए थे । समिति ने निर्देश दिए कि भस्म आरती में भगवान महाकाल को भस्म अर्पित करने से पहले ज्योतिर्लिंग को शुद्ध सूती वस्त्र से पूरा ढंका जाए, इसके बाद ही भस्म अर्पित करें। बता दें कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित विशेषज्ञों की टीम ने भी यही सुझाव दे रखा है।










