मंत्री और विधायकों को सोशल मीडिया पर निर्वाचन क्षेत्र के फॉलोअर्स साधने का लक्ष्य

विधानसभा चुनाव के लिए सक्रियता, सत्ता-संगठन करेंगे मॉनिटरिंग

मंत्री और विधायकों को सोशल मीडिया पर निर्वाचन क्षेत्र के फॉलोअर्स साधने का लक्ष्य
उज्जैन।विधानसभा चुनाव 2023 में फिर से टिकट के लिए आशांवित और उम्मीद लगाए बैठे मंत्री और विधायकों को मैदान में उतरने से पहले सोशल मीडिया पर फॉलोअर्स को साधने का लक्ष्य दिया गया है। मंत्री और विधायकों को अपने क्षेत्र के 5 प्रतिशत वोटर्स को सोशल मीडिया पर अपना फॉलोअर्स बनाना होगा। इसकी मॉनिटरिंग प्रदेश सरकार के साथ ही भाजपा प्रदेश संगठन द्वारा की जाएगी।
उम्मीदवारों को आमतौर पर चुनाव के दौरान मतदाताओं को साधने के लिए मेहनत करना पड़ती है। इसके लिए जोर-शोर से जनसम्पर्क-प्रचार करना पड़ता है,लेकिन भाजपा ने चुनाव से पहले ही पुन: मैदान में उतरने के लिए आशांवित नेताओं के सामने अभी से समर्थक जुटाने की चुनौती रख दी है।
वर्ष के अंत में संभावित चुनाव के मद्देनजर संगठन और सरकार मतदाताओं से जीवंत संपर्क चाहती है। स्थानीय नेताओं के बाद मंत्रियों और विधायकों को भी सोशल मीडिया पर सक्रियता बढ़ाने और अपने-अपने विधानसभा क्षेत्रों में कम से कम पांच प्रतिशत मतदाताओं को फॉलोअर्स बनाने का कहा हैं।
इंटरनेट मीडिया एनालिस्ट नियुक्त
मंत्री, विधायकों ने इंटरनेट मीडिया पर कितने फॉलोअर्स बनाए, इसकी मानीटरिंग की जा रही है। फॉलोअर्स बढ़ाने के लिए 25 हजार कार्यकर्ताओं को इंटरनेट मीडिया ओरिएंटेशन दिया गया है। इंटरनेट मीडिया एनालिस्ट नियुक्त किए गए हैं। मंत्री-विधायकों द्वारा इंटरनेट मीडिया के उपयोग का निगरानी तंत्र तैयार कर प्रशिक्षण शुरू कराया गया है।
जनता से सीधे जुड़ाव से जुड़ा मामला
सत्ता और संगठन का मानना है कि मंत्री और विधायक इंटरनेट मीडिया के माध्यम से आमजन से जुड़ेंगे तो केंद्र और राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं का लाभ जनता तक पहुंचाना आसान हो जाएगा। नेताओं, मंत्रियों-विधायकों को बार-बार इंटरनेट मीडिया पर सक्रियता बढ़ाने को कहा जा रहा है।
अब चुनाव सामने हैं, ऐसे में सरकार ने भी मंत्रियों को फॉलोअर्स बढ़ाने को कह दिया है ताकि इंटरनेट मीडिया पर ही सही, क्षेत्र में मंत्री सक्रिय दिखाई दें।
उन्हें पार्टी से सीधे जुड़े या संपर्क में रहने वाले मतदाताओं द्वारा विभिन्न माध्यमों में की गई पोस्ट को लाइक, शेयर करने को भी कहा गया है। वहीं जानकारों की नजर में यह विधानसभा चुनाव के मद्देनजर जनता से सीधे जुड़ाव से जुड़ा मामला है। मोबाइल के जरिए प्रत्येक मतदाता तक पहुंचा जा सकता है।









