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भगवान श्री महाकालेश्वर की सवारी में इस बार नहीं होगी श्यामू हथिनी

गंभीर बीमार होने से चलने-फिरने पर डीएफओ ने लगाई रोक

 

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अक्षरविश्व न्यूज उज्जैन। इस बार भगवान महाकाल की सवारी में श्यामू हथिनी नहीं दिखाई देगी। पैर के ज्वाइंट की गंभीर बीमारी से जूझ रही श्यामू हथिनी को चलने में दिक्कत है और पन्ना टाइगर रिजर्व के चिकित्सकों ने उसे आराम ही करने की सलाह दी है।

अलखधाम नगर के सरमन गिरी ने श्यामू हथिनी को पाल रखा है। 15 साल से वह उनके साथ है। करीब दस साल से श्री महाकालेश्वर की द्वितीय सवारी से श्यामू को शामिल किया जाता रहा है। उससे पहले रामू हाथी सवारी में शामिल होता था। रामू के नहीं रहने पर श्यामू को शामिल किया जाने लगा। उस पर मनमहेश मुघौटा रहता है। सवारी में दूसरे क्रम पर श्यामू चलती है और लोग मनमहेश के दर्शन करते हैं लेकिन इस बार श्यामू नहीं होगी।

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दरअसल, श्यामू पैरों के ज्वाइंट की गंभीर समस्या से जूझ रही है। चलना-फिरना उसके लिए मुश्किल हो गया है। उसके गुप्तांग से पैर टकरा रहे हैं और यह उसके पैर कोल्पस कर सकते हैं। चूंकि, सवारी में भारी भीड़ रहती है, ऐसे में हादसे की आशंका हो सकती है। इसे देखते हुए उसके चलने-फिरने पर रोक लगा दी गई है।

पन्ना टाइगर रिजर्व के डॉक्टर ने दी सलाह

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श्यामू के पैर में दिक्कत तो पिछले साल से ही है लेकिन उसे चलाया जाता रहा। हाल ही में पन्ना टाइगर रिजर्व के डॉक्टरों ने उसका परीक्षण किया। चूंकि, पन्ना में एलिफेंट विंग है। यहां उनकी देखरेख के लिए डॉक्टरों की टीम रहती है। इस टीम ने मुआयने के बाद श्यामू को गंभीर बीमार पाया है।

डीएफओ अनुराग तिवारी ने बताया कि हाथी वाइल्ड एनिमल है। उसे पाला तो जा सकता है लेकिन उसे पालने के नियम कड़े हैं। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर गठित हाईपॉवर कमेटी इस पर निगरानी रखती है। श्यामू का मसला कमेटी के सामने गया था। कमेटी के आदेश पर श्यामू के स्वास्थ्य की जांच करवाई गई है। इसमें काफी गड़बड़ी मिली है। पन्ना टाइगर रिजर्व के डॉक्टरों की रिपोर्ट के बाद श्यामू के चलने-फिरने और अन्य गतिविधि पर रोक लगा दी है। जरूरत पड़ी तो उसका रेस्क्यू भी किया जाएगा। उसे नौलखी बीड़ में रखा जा सकता है। फिलहाल कस्टोडियन को समझाइश दी है।

श्यामू को मिलता है मेहनताना

श्री महाकालेश्वर की सवारी में शामिल होने पर श्यामू को मेहनताना दिया जाता है। यह प्रति सवारी 7 हजार रुपए होता है। इस राशि से श्यामू के खान-पान की व्यवस्था की जाती है। सवारी में शामिल होने के लिए श्यामू को दोपहर 12 बजे नागहथिनी गणेश मंदिर के पास लाया जाता है। यहां उसके ऊपर सिंहासन बांधा जाता है। मनमहेश को इस पर विराजित किया जाता है। शाम 4 बजे सवारी के साथ श्यामू की यात्रा शुरू होती और दूसरी से अंतिम सवारी के पहले वाली सवारी तक 8 बजे तक रहती है। राजसी सवारी वाले दिन श्यामू की सेवा रात 10.30 बजे तक रहती है। इस दौरान महावत सहित डॉक्टरों की पूरी टीम श्यामू के साथ चलती है।

श्री महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति के पीआरओ आशीष फलवाडिय़ा ने बताया कि मनमहेश की सवारी के लिए हाथी के संबंध में अभी कोई निर्देश नहीं मिले हैं। अगर श्यामू की सेवा नहीं लेने के निर्देश मिलेंगे तो उस मुताबिक व्यवस्था की जाएगी।

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