मंदिर में भूलकर भी न रखें एक भगवान की दो मूर्तियां, बढ़ता है दोष

सनातन परंपरा में घर के मंदिर को सुख, शांति और आस्था का केंद्र माना गया है। जब घर में रोज विधिवत पूजा होती है तो मन को एक अलग ही सुकून मिलता है और जीवन में खुशियां आती हैं।
अपने घर को समृद्ध और खुशहाल बनाने की चाह में लोग भगवान की सुंदर प्रतिमाएं और चित्र लाकर मंदिर में स्थापित करते हैं। भक्ति के जोश में कई बार एक ही देवता की दो या दो से अधिक मूर्तियां मंदिर में रख दी जाती हैं। लेकिन धर्म और वास्तु के जानकार बताते हैं कि ऐसा करने से पूजा का पूरा फल नहीं मिलता और जीवन में मुश्किलें आ सकती हैं। आइए जानते हैं इसके पीछे की वजह।
घर की शांति पर पड़ता है असर — वास्तु शास्त्र के अनुसार जब किसी मूर्ति की पूजा की जाती है तो उसके इर्द-गिर्द सकारात्मक ऊर्जा का घेरा बनता है। एक ही देवता की दो मूर्तियां होने पर दोनों की ऊर्जाएं आपस में टकराने लगती हैं जिसका सीधा असर घर के माहौल पर पड़ता है और सुख-चैन बाधित होता है।
मन भटकता है पूजा में — पूजा का असली मकसद ईश्वर के एक रूप पर पूरा ध्यान लगाना होता है। जब मंदिर में एक ही देवता की दो प्रतिमाएं हों तो पूजा करते वक्त मन एकाग्र नहीं रह पाता और इस वजह से न तो पूजा का संपूर्ण फल मिलता है और न ही मन को वह शांति मिलती है जो पूजा का उद्देश्य है।
वास्तु दोष का खतरा — शिवलिंग या भगवान गणेश की एक से ज्यादा मूर्तियां मंदिर में रखने को वास्तु की दृष्टि से सही नहीं माना जाता। ऐसा करने से वास्तु दोष लग सकता है जिसके चलते घर में पैसों की तंगी और आपसी कलह जैसी परेशानियां दस्तक दे सकती हैं।
बरकत रुक जाती है — दो मूर्तियों को एक-दूसरे के आमने-सामने रखना भी वास्तु के लिहाज से ठीक नहीं है। दोनों से निकलने वाली ऊर्जाएं जब एक-दूसरे को काटती हैं तो घर की बरकत धीरे-धीरे कम होने लगती है और परिवार के लोगों को आर्थिक नुकसान झेलना पड़ सकता है।





