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मकर संक्रांति के पूर्व शिप्रा को नर्मदा के जल से भरने का टारगेट

कान्ह का दूषित पानी रोकना होगा, स्टापडेम खोलकर गंदा पानी बहाना जारी

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अक्षरविश्व न्यूज. उज्जैन त्रिवेणी पर जल संसाधन विभाग द्वारा कान्ह नदी का दूषित पानी रोकने के लिये बनाया गया मिट्टी का स्टापडेम महीनों पहले टूट चुका है। वर्तमान में कान्ह का दूषित पानी शिप्रा नदी में लगातार मिल रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा इस समस्या के स्थायी निराकरण के निर्देश अफसरों को दिये हैं वहीं दूसरी ओर महापौर भी इसको लेकर चिंतित हैं यही कारण है कि आने वाले मकर संक्रांति पर्व के पूर्व शिप्रा नदी से कान्ह का दूषित पानी आगे बहाकर नर्मदा का पानी स्टोर करने के निर्देश विभागीय अफसरों को दिये गये हैं।

सिंहस्थ महापर्व के पूर्व 99 करोड़ रुपये से अधिक खर्च कर जल संसाधन विभाग द्वारा राघोपिपल्या से पाइप लाइन डालकर कान्ह डायवर्शन योजना पूर्ण की गई थी। इसका उद्देश्य था कान्ह का दूषित पानी कालियादेह से आगे पाइप लाइन के द्वारा बहाया जायेगा, लेकिन करोड़ों रुपये लागत की उक्त योजना पूरी होने के बाद ही धराशायी हो गई। वर्तमान में कान्ह डायवर्शन से नाममात्र का पानी पाइप लाइन के माध्यम से छोड़ा जा रहा है, जबकि इंदौर से आने वाला दूषित पानी त्रिवेणी से सीधे शिप्रा नदी में मिल रहा है।

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यही कारण है कि बारिश के बाद शिप्रा नदी के स्टापडेम बंद करने की स्थिति में कान्ह का दूषित पानी लगातार शिप्रा नदी में मिलता रहा और वर्तमान में नदी में जो पानी स्टोर है वह स्नान, पूजन, आचमन के लायक भी नहीं है। आगामी मकर संक्रांति पर्व पर देशभर के श्रद्धालु यहां पर्व स्नान के लिए पहुंचेगे। जिसके मद्देनजर पीएचई द्वारा छोटे पुल के पास स्थित स्टॉप डेम के गेट खोल कर दूषित पानी को बहाया जा रहा है। फिलहाल रामघाट पर करीब 3 फीट पानी कम हो चुका है।

मिट्टी का स्टापडेम समाधान नहीं

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जल संसाधन विभाग द्वारा खान नदी का पानी शिप्रा नदी में मिलने से रोकने के लिये कई बार त्रिवेणी के पास मिट्टी का स्टापडेम बनाया लेकिन पानी का दबाव बढ़ते ही कुछ महीनों के अंतर में यह स्टापडेम टूट जाता है और खान का दूषित पानी सीधे शिप्रा नदी में जाकर मिलता है। मिट्टी का स्टापडेम समस्या का स्थायी समाधान नहीं है।

कान्ह डायवर्शन योजना में बदलाव के संकेत

कान्ह डायवर्शन योजना से जुड़े जल संसाधन विभाग के सेवानिवृत्त ईई मुकुल जैन बताते हैं कि वर्ष 2016 सिंहस्थ महापर्व से पूर्व पाइप लाइन के माध्यम से खान नदी का दूषित पानी पाइप लाइन के माध्यम से राघोपिपल्या से कालियादेह के आगे ले जाने की योजना पूरी की गई थी। वर्तमान में इंदौर से निकलने वाला दूषित पानी कान्ह के माध्यम से कान्ह डायवर्शन तक पहुंच रहा है, जबकि पाइप लाइन की क्षमता इतनी नहीं है। इसी कारण कान्ह नदी का दूषित पानी पाइप लाइन से ओवरफ्लो होकर त्रिवेणी तक पहुंचता है। शासन द्वारा अब डायवर्शन योजना में बदलाव की बात कही जा रही है।

फिर से मिट्टी का बांध बनाने की चर्चा

मुख्यमंत्री के निर्देश और मकर संक्रांति महापर्व के मद्देनजर जल संसाधन विभाग द्वारा फिलहाल त्रिवेणी पर फिर से मिट्टी का बांध बनाकर कान्ह नदी का दूषित पानी शिप्रा में मिलने से रोकने की योजना बना रहा है ताकि पर्व स्नान के पहले शिप्रा में मौजूद दूषित पानी को बहाकर नर्मदा का पानी स्टोर किया जा सके, जबकि स्थायी समाधान के लिये दूसरी योजना भी बनाई जा रही है।

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