महिला आरक्षण संशोधन बिल गिरा

नई दिल्ली|लोकसभा में महिला आरक्षण से जुड़े 131वें संविधान संशोधन विधेयक को पारित नहीं किया जा सका। करीब 21 घंटे की लंबी चर्चा के बाद हुई वोटिंग में बिल आवश्यक दो-तिहाई बहुमत हासिल नहीं कर पाया, जिससे यह प्रस्ताव सदन में ही गिर गया।

सदन में कुल 528 सांसदों ने मतदान किया। बिल पास कराने के लिए 352 वोटों की जरूरत थी, लेकिन इसके पक्ष में केवल 298 वोट पड़े, जबकि 230 सांसदों ने इसका विरोध किया। इस तरह आवश्यक बहुमत न मिलने के कारण विधेयक पारित नहीं हो सका।
प्रधानमंत्री Narendra Modi के नेतृत्व में 2014 के बाद यह पहला मौका है जब एनडीए सरकार का कोई प्रमुख विधेयक लोकसभा में पास नहीं हो पाया। साथ ही, 2011 के बाद यह पहला संवैधानिक संशोधन विधेयक है जो सदन में असफल रहा।
131वें संशोधन बिल का मुख्य उद्देश्य लोकसभा की सीटों की संख्या 543 से बढ़ाकर 850 करना था। साथ ही, 2023 में पारित महिला आरक्षण कानून (नारी शक्ति वंदन अधिनियम) को अगली जनगणना से अलग कर जल्द लागू करने का प्रस्ताव भी इसमें शामिल था।
सरकार 2011 की जनगणना के आधार पर परिसीमन कर 2029 तक महिला आरक्षण लागू करना चाहती थी। हालांकि, इस मुद्दे पर विपक्ष ने कड़ा विरोध जताया और सदन में हंगामा भी हुआ। विपक्ष को आशंका थी कि इससे कुछ राज्यों के प्रतिनिधित्व पर असर पड़ सकता है।
गृह मंत्री Amit Shah ने वोटिंग से पहले विपक्ष को आश्वासन दिया था कि सभी राज्यों में समान रूप से 50% सीटें बढ़ाने का प्रावधान शामिल किया जा सकता है। इसके बावजूद विपक्ष ने इस प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया।
इस विधेयक के गिरने के बाद सरकार ने इससे जुड़े दो अन्य प्रस्ताव—परिसीमन विधेयक 2026 और केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक 2026—को भी वापस ले लिया। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि ये तीनों विधेयक आपस में जुड़े हुए थे, इसलिए आगे बढ़ाना उचित नहीं है।









