मोदी ने मेलोनी को दी मेलोडी टॉफी, कोलोजियम में साथ ली सेल्फी

पांच देशों के दौरे के आखिरी पड़ाव पर मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इटली पहुंचे जहां इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। इस मुलाकात में एक बेहद दिलचस्प पल देखने को मिला जब पीएम मोदी ने मेलोनी को मेलोडी टॉफी तोहफे में दी। मेलोनी इस अनोखे गिफ्ट से इतनी खुश हुईं कि उन्होंने इसका वीडियो अपने एक्स अकाउंट पर शेयर करते हुए लिखा कि पीएम मोदी मेरे लिए सबसे बढ़िया तोहफा लेकर आए जो है मेलोडी टॉफी और इसके लिए उन्होंने धन्यवाद दिया।
दोनों नेताओं की मुलाकात काफी यादगार रही। रोम की सड़कों पर दोनों एक ही गाड़ी में साथ घूमे और करीब दो हजार साल पुराने ऐतिहासिक कोलोजियम को भी एक साथ देखने गए। इससे पहले दोनों ने मिलकर डिनर किया जिसमें कई जरूरी मुद्दों पर खुलकर अनौपचारिक बातचीत हुई। मेलोनी ने पीएम मोदी के साथ एक सेल्फी पोस्ट की और साथ में लिखा वेलकम माय फ्रेंड। दोनों की तस्वीरें सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रही हैं।
पीएम मोदी ने भी एक्स पर मुलाकात की फोटो साझा करते हुए कहा कि आज की औपचारिक बैठक में भारत और इटली के रिश्तों को और गहरा करने पर बात होगी। दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश, आधुनिक तकनीक और दुनिया से जुड़े अहम मुद्दों पर चर्चा होने की उम्मीद है।

मोदी और मेलोनी की मुलाकात की 8 तस्वीरें…








मोदी के इटली पहुंचने की 7 तस्वीरें…







दोनों देशों में स्पेशल स्ट्रैटजिक पार्टनरशिप पर चर्चा संभव
पीएम मोदी की इटली यात्रा सिर्फ मुलाकात तक सीमित नहीं है, इस दौरे में दोनों देशों के रिश्तों को एक नई ऊंचाई देने की तैयारी भी है। खबरें हैं कि भारत और इटली अपने संबंधों को स्पेशल स्ट्रैटजिक पार्टनरशिप का दर्जा देने पर गंभीरता से विचार कर रहे हैं। आगे चलकर दोनों देश हर साल नियमित रूप से उच्चस्तरीय बैठकें भी आयोजित कर सकते हैं।
पिछले कुछ सालों में दोनों देशों के बीच राजनीतिक और कारोबारी रिश्ते काफी मजबूत हुए हैं। रक्षा, ऊर्जा, विज्ञान, नई तकनीक और व्यापार जैसे तमाम क्षेत्रों में दोनों देश मिलकर काम करते आ रहे हैं। इस दौरे में इस साझेदारी को और पक्का करने की बातचीत होने की पूरी उम्मीद है।
आर्थिक मोर्चे पर देखें तो अभी दोनों देशों के बीच 14 अरब यूरो यानी 1.60 लाख करोड़ रुपये से भी ज्यादा का कारोबार होता है। विनिर्माण, ऑटोमोबाइल, मशीनरी, फार्मा, रक्षा और हरित ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में निवेश और बढ़ाने की योजना पर दोनों तरफ से काम चल रहा है।
इटली दौरे के दौरान पीएम मोदी वहां के बड़े कारोबारियों और उद्योग जगत के दिग्गजों से भी आमने-सामने बैठेंगे। इस बातचीत में भारत में निवेश बढ़ाने, मैन्युफैक्चरिंग और नई औद्योगिक साझेदारी के मौके तलाशने पर जोर रहेगा।
गौरतलब है कि मोदी इससे पहले जून 2024 में इटली गए थे जब उन्होंने अपुलिया में आयोजित जी-7 शिखर सम्मेलन में भाग लिया था। इस बार 15 मई को शुरू हुए विदेश दौरे में वे UAE, नीदरलैंड, स्वीडन और नॉर्वे होते हुए इटली पहुंचे हैं जो इस पूरी यात्रा का आखिरी पड़ाव है।
इस दौरे में सबसे अहम मुद्दा इंडिया-मिडिल ईस्ट-यूरोप इकोनॉमिक कॉरिडोर यानी IMEC रहने वाला है। भारत को अरब खाड़ी के रास्ते यूरोप से जोड़ने के इस बड़े प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाने और दोनों देशों के बीच व्यापार व कनेक्टिविटी मजबूत करने पर गहन चर्चा होगी।
यह परियोजना 2023 में शुरू हुई थी जब भारत, यूरोपीय संघ, अमेरिका, सऊदी अरब, UAE, फ्रांस, जर्मनी और इटली सहित कई देशों ने मिलकर एक समझौते पर दस्तखत किए थे। इसके तहत रेलवे, बंदरगाह, शिपिंग नेटवर्क, ऊर्जा और डिजिटल बुनियादी ढांचे को एक सूत्र में पिरोया जाएगा। चीन के बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव के मुकाबले एक मजबूत विकल्प के रूप में देखे जा रहे इस कॉरिडोर से भारत और यूरोप के बीच माल ढुलाई तेज होगी, लॉजिस्टिक्स का खर्च घटेगा और सप्लाई चेन के साथ-साथ ऊर्जा व व्यापार सुरक्षा भी मजबूत होगी।
भारत-इटली के लिए IMEC क्यों अहम?
IMEC को लेकर भारत और इटली दोनों की नजरें लंबे समय के फायदे पर टिकी हैं। भारत को इससे यूरोप तक पहुंचने का एक तेज और किफायती रास्ता मिल सकता है तो वहीं इटली की कोशिश है कि वह पूरे यूरोप में एक बड़े लॉजिस्टिक्स और उत्पादन केंद्र के रूप में अपनी पहचान बनाए।
- आज की तारीख में भारत से यूरोप को माल भेजने के लिए ज्यादातर समुद्री रास्ते और स्वेज नहर पर निर्भर रहना पड़ता है। IMEC के पूरा होने के बाद भारत, मध्य पूर्व और यूरोप के बीच एक मल्टी-मोडल नेटवर्क खड़ा हो जाएगा जिससे समय और पैसे दोनों की बचत होगी।
- भूमध्य सागर क्षेत्र में इटली की स्थिति इसे यूरोप का एक अहम प्रवेश द्वार बनाती है। IMEC के जरिए इटली एशिया से यूरोप आने वाली सप्लाई चेन का केंद्र बन सकता है जिसका सीधा फायदा वहां के बंदरगाहों, लॉजिस्टिक्स उद्योग और कारखानों को मिलेगा।
- भारत इस परियोजना को महज एक व्यापारिक मार्ग नहीं बल्कि एक बड़े रणनीतिक कदम के रूप में देख रहा है। यह चीन के बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव का एक सशक्त जवाब है और इसका मकसद दुनिया की सप्लाई चेन में चीन पर बढ़ती निर्भरता को कम करना है।
- ऊर्जा के मोर्चे पर भी यह प्रोजेक्ट बेहद अहम है। IMEC के तहत बिजली, हरित हाइड्रोजन और डिजिटल कनेक्टिविटी का एक मजबूत जाल बिछाने की योजना है जिससे भारत को यूरोप और खाड़ी देशों के साथ ऊर्जा के क्षेत्र में और गहरा सहयोग करने में मदद मिलेगी।
- पिछले कुछ वर्षों में रक्षा, कारें, मशीनरी, दवाइयां और नई तकनीक जैसे कई क्षेत्रों में भारत और इटली मिलकर काम कर रहे हैं। IMEC को इसी आर्थिक रिश्ते को अगले पायदान पर ले जाने वाले एक बड़े अवसर के रूप में देखा जा रहा है।









