दिल्ली में हर घर के लिए फायर सेफ्टी नियम लागू करने की तैयारी, सरकार ले सकती है बड़ा फैसला

देश की राजधानी दिल्ली में हाल ही में आग लगने की कई बड़ी घटनाओं में 60 से अधिक लोगों की जान चली गई। इन हादसों के बाद दिल्ली सरकार फायर सेफ्टी नियमों को और सख्त बनाने की तैयारी कर रही है। सरकार अब ऐसे प्रस्ताव पर विचार कर रही है, जिसके तहत हर घर में स्मोक डिटेक्टर और फायर एक्सटिंगिशर लगाना अनिवार्य किया जा सकता है।

दिल्ली की 90% इमारतों के पास नहीं है फायर NOC
दिल्ली सरकार के गृह मंत्री आशीष सूद ने बताया कि राजधानी की लगभग 90 प्रतिशत इमारतों के पास फायर NOC (नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट) नहीं है और न ही वहां आग से बचाव के पर्याप्त सुरक्षा उपकरण मौजूद हैं। वर्तमान नियमों के अनुसार स्मोक डिटेक्टर और फायर एक्सटिंगिशर केवल व्यावसायिक भवनों और 15 मीटर से अधिक ऊंचाई वाली इमारतों में अनिवार्य हैं।
नए नियमों के दायरे में आएंगी लो-राइज बिल्डिंग्स
सरकार जिन बदलावों पर विचार कर रही है, उनमें कमर्शियल और हाई-राइज बिल्डिंग्स के साथ-साथ लो-राइज बिल्डिंग्स, इंडिपेंडेंट मकान और गेटेड सोसायटी भी शामिल हैं। प्रस्ताव के अनुसार 15 मीटर से कम ऊंचाई वाली इमारतों में भी स्मोक डिटेक्टर लगाना कानूनी रूप से अनिवार्य किया जा सकता है।
बढ़ती आग की घटनाएं बनीं चिंता का कारण
गृह मंत्री आशीष सूद ने कहा कि कई रिपोर्टों में सामने आया है कि बिजली के अधिक लोड और सुरक्षा नियमों की अनदेखी के कारण आग लगने की घटनाएं बढ़ रही हैं। उन्होंने कहा कि केवल सरकारी कार्रवाई ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि लोगों को भी जागरूक करना जरूरी है कि घरों में कौन-सी वस्तुएं रखना सुरक्षित है और कौन-सी नहीं।
दिल्ली फायर सर्विस ने दिया प्रस्ताव
दिल्ली फायर सर्विस (DFS) ने सरकार को सुझाव दिया है कि रिहायशी घरों में भी स्मोक डिटेक्टर लगाना अनिवार्य किया जाए। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक दिल्ली फायर सर्विस को हर साल करीब 20 हजार आग संबंधी कॉल प्राप्त होती हैं और 250 से 300 लोगों की मौत आग की घटनाओं में हो जाती है।
तुगलकाबाद में भी आग से गई तीन लोगों की जान
12 जून की सुबह दिल्ली के तुगलकाबाद इलाके में भीषण आग लगने से तीन लोगों की मौत हो गई। यह घटना भी राजधानी में बढ़ती अग्नि दुर्घटनाओं की गंभीरता को दर्शाती है।
विवेक विहार हादसे के बाद तेज हुई कार्रवाई
मई महीने में विवेक विहार स्थित एक इमारत में आग लगने से 9 लोगों की मौत हो गई थी। इसके बाद दिल्ली सरकार ने फायर विभाग से विस्तृत रिपोर्ट मांगी थी। अधिकारियों का मानना है कि कम लागत वाले बैटरी संचालित स्मोक डिटेक्टर ऐसे हादसों को रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
घरों में ज्वलनशील सामान रखने पर भी होगी निगरानी
दिल्ली के पालम इलाके में हुए एक अग्निकांड की जांच में सामने आया था कि घर के भीतर केमिकल और पेंट जैसे ज्वलनशील पदार्थ रखे गए थे, जिससे आग तेजी से फैल गई। सरकार अब लोगों को यह भी जागरूक करना चाहती है कि घरों में कौन-से सामान सुरक्षित हैं और किन वस्तुओं से आग का खतरा बढ़ सकता है।
घनी आबादी वाले क्षेत्रों में फायर किट होगी मददगार
सरकार का मानना है कि घनी आबादी वाले इलाकों में दमकल वाहनों की पहुंच कई बार मुश्किल होती है। ऐसे में घरों में उपलब्ध फायर एक्सटिंगिशर और अन्य आपातकालीन सुरक्षा उपकरण शुरुआती स्तर पर आग को नियंत्रित करने में मदद कर सकते हैं।
जल्द कैबिनेट में हो सकती है चर्चा
गृह मंत्री आशीष सूद ने बताया कि प्रस्ताव पर विचार-विमर्श जारी है और जल्द ही इसे कैबिनेट के सामने रखा जा सकता है। सरकार का उद्देश्य आग से होने वाले हादसों और जनहानि को कम करना है, ताकि राजधानी में नागरिकों की सुरक्षा को और मजबूत बनाया जा सके।









