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सीएम डॉ. मोहन यादव के हस्तक्षेप से युद्ध के बीच फंसी पहलवान प्रियांशी की वतन वापसी

तुर्की-कजाकिस्तान होकर लौटीं, दुबई में मिसाइल गिरने के बाद बंद हो गए थे रास्ते

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उज्जैन। अर्मेनिया में आयोजित वल्र्ड रेसलिंग चैंपियनशिप में पदक जीतकर देश का नाम रोशन करने वाली शहर की खिलाड़ी प्रियांशी प्रजापत के लिए पिछले चार दिन किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं थे। मध्य-पूर्व में जारी युद्ध और दुबई में मिसाइल गिरने के बाद उत्पन्न हुए संकट के कारण प्रियांशी वहां फंस गई थीं। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के व्यक्तिगत हस्तक्षेप और रणनीतिक प्रयासों के चलते गुरुवार सुबह प्रियांशी की सकुशल भारत वापसी हो गई।

प्रियांशी को पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार 1 मार्च को दुबई के रास्ते भारत आना था। लेकिन युद्ध के बिगड़ते हालात और दुबई में मिसाइल गिरने की खबरों के बाद वहां की उड़ानें रद्द कर दी गईं। प्रियांशी प्रदेश की एकमात्र खिलाड़ी थीं जो इस प्रतियोगिता का हिस्सा थीं। बेटी के फंसने की खबर मिलते ही उनके पिता मुकेश प्रजापति ने कुश्ती संघ के अध्यक्ष नारायण यादव के माध्यम से मुख्यमंत्री से मदद की गुहार लगाई।

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सीएम ने की लाइव बात, कजाकिस्तान के रास्ते निकाला
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने न केवल प्रियांशी से ऑनलाइन बात कर उनका हौसला बढ़ाया, बल्कि उच्च स्तर पर चर्चा कर उनकी वापसी का वैकल्पिक रास्ता तैयार करवाया। युद्ध क्षेत्र से बचाने के लिए प्रियांशी को अर्मेनिया से तुर्की और फिर कजाकिस्तान के रास्ते भारत लाने की व्यवस्था की गई। गुरुवार सुबह जैसे ही प्रियांशी ने भारतीय सरजमीं पर कदम रखा, परिवार और खेल जगत में खुशी की लहर दौड़ गई।

शानदार प्रदर्शन के साथ जीता रजत पदक
संकट में फंसने से पहले प्रियांशी ने खेल के मैदान पर अपना लोहा मनवाया। उन्होंने कजाकिस्तान, अमेरिका और अर्मेनिया की पहलवानों को धूल चटाते हुए रजत पदक अपने नाम किया। इससे पहले वे एशियन सीरीज में स्वर्ण पदक भी जीत चुकी हैं।

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खिलाड़ी बेटी को हमेशा मिला डॉ. यादव का साथ
मुख्यमंत्री डॉ. यादव का प्रियांशी के करियर में शुरू से ही महत्वपूर्ण योगदान रहा है। जब वे मध्यप्रदेश कुश्ती क्षेत्र के अध्यक्ष थे, तब भी उन्होंने प्रियांशी को आर्थिक सहायता प्रदान की थी। उन्होंने हमेशा प्रियांशी को अपनी बेटी के समान स्नेह और समर्थन दिया है, जिससे एक साधारण परिवार की इस खिलाड़ी ने वैश्विक मंच पर अपनी पहचान बनाई।

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