100 सांसद हुए खिलाफ, ब्रिटिश PM स्टार्मर ने दिया इस्तीफा

ब्रिटेन की राजनीति में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। प्रधानमंत्री और लेबर पार्टी के नेता कीर स्टार्मर ने सोमवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया। 10 डाउनिंग स्ट्रीट के बाहर राष्ट्र को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि पार्टी को अब नहीं लगता कि वह अगले आम चुनाव में नेतृत्व करने के लिए सबसे उपयुक्त व्यक्ति हैं। उनके इस्तीफे के साथ ही ब्रिटेन में नेतृत्व परिवर्तन की प्रक्रिया शुरू हो गई है और नया प्रधानमंत्री चुनने की तैयारियां तेज हो गई हैं।

पार्टी के भीतर बढ़ता असंतोष बना इस्तीफे की वजह
कीर स्टार्मर का इस्तीफा ऐसे समय आया है जब लेबर पार्टी के भीतर उनके नेतृत्व को लेकर लंबे समय से नाराजगी बढ़ रही थी। पार्टी के सैकड़ों सांसदों में से बड़ी संख्या ने खुले तौर पर उनके खिलाफ मोर्चा खोल दिया था। कई सांसदों ने मांग की थी कि या तो स्टार्मर तत्काल पद छोड़ें या फिर अपने इस्तीफे की निश्चित तारीख घोषित करें।
स्थिति तब और गंभीर हो गई जब सरकार के कई वरिष्ठ नेताओं ने भी उनका साथ छोड़ना शुरू कर दिया। स्वास्थ्य, रक्षा और अन्य महत्वपूर्ण विभागों से जुड़े प्रमुख नेताओं ने नेतृत्व परिवर्तन की मांग करते हुए अपने पदों से इस्तीफा दे दिया था। इससे स्टार्मर पर दबाव लगातार बढ़ता गया।
भावुक संबोधन में दी विदाई
अपने अंतिम संबोधन में स्टार्मर ने कहा कि उन्होंने यह फैसला पार्टी और देश के हित को ध्यान में रखते हुए लिया है। उन्होंने बताया कि सुबह ही अपने निर्णय की जानकारी किंग चार्ल्स तृतीय को दे दी गई थी। संबोधन के अंत में उन्होंने अपनी पत्नी विक्टोरिया को गले लगाया और दोनों साथ में प्रधानमंत्री आवास के भीतर लौट गए।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि नए नेता और प्रधानमंत्री के चयन तक वह कार्यवाहक प्रधानमंत्री के रूप में जिम्मेदारियां निभाते रहेंगे और अपने उत्तराधिकारी को पूरा सहयोग देंगे।
जुलाई तक मिल सकता है नया प्रधानमंत्री
लेबर पार्टी अब नए नेता के चयन की प्रक्रिया शुरू करेगी। पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारी समिति चुनाव कार्यक्रम तय करेगी। नामांकन प्रक्रिया जुलाई की शुरुआत में शुरू होने की संभावना है, जबकि संसद के ग्रीष्मकालीन अवकाश से पहले नए नेता के चयन का लक्ष्य रखा गया है।
ब्रिटेन की संसदीय व्यवस्था में जनता सीधे प्रधानमंत्री का चुनाव नहीं करती। आम चुनाव में चुने गए सांसदों के आधार पर जिस दल के पास बहुमत होता है, उसी दल का नेता प्रधानमंत्री बनता है। इसलिए लेबर पार्टी का अगला नेता ही देश का अगला प्रधानमंत्री बनने का सबसे मजबूत दावेदार होगा।
एंडी बर्नहैम सबसे मजबूत दावेदार
स्टार्मर के उत्तराधिकारी के रूप में सबसे अधिक चर्चा एंडी बर्नहैम की हो रही है। हाल ही में उपचुनाव में जीत दर्ज करने के बाद उनकी स्थिति और मजबूत हुई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उन्हें पार्टी के विभिन्न गुटों का समर्थन मिल सकता है।
बर्नहैम को आम लोगों से जुड़े नेता के रूप में देखा जाता है। कोविड महामारी के दौरान उन्होंने क्षेत्रीय हितों को लेकर केंद्र सरकार के खिलाफ खुलकर आवाज उठाई थी, जिससे उनकी लोकप्रियता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई थी।
तीन और बड़े नाम भी चर्चा में
हालांकि नेतृत्व की दौड़ सिर्फ एंडी बर्नहैम तक सीमित नहीं है। पार्टी की उपनेता एंजेला रेनर भी संभावित उम्मीदवारों में शामिल मानी जा रही हैं। जमीनी कार्यकर्ताओं के बीच उनकी अच्छी पकड़ बताई जाती है।
इसके अलावा अनुभवी नेता यवेट कूपर और नई पीढ़ी के लोकप्रिय चेहरों में शामिल वेस स्ट्रीटिंग के नाम भी चर्चा में हैं। हालांकि अभी तक किसी नेता ने औपचारिक रूप से अपनी दावेदारी की घोषणा नहीं की है।
2024 की बड़ी जीत के बाद क्यों कमजोर हुए स्टार्मर?
कीर स्टार्मर ने 2024 के आम चुनाव में लेबर पार्टी को ऐतिहासिक जीत दिलाई थी और लंबे समय बाद पार्टी को सत्ता में वापसी कराई थी। शुरुआती महीनों में उनकी सरकार को जनता का अच्छा समर्थन मिला, लेकिन बाद में हालात बदलते गए।
आर्थिक चुनौतियां, जीवन स्तर में सुधार से जुड़े अधूरे वादे, सार्वजनिक सेवाओं की स्थिति और कई नीतिगत फैसलों में बदलाव ने उनकी लोकप्रियता को प्रभावित किया। पार्टी के भीतर भी यह धारणा बनने लगी कि मौजूदा नेतृत्व अगले चुनाव में पार्टी को नुकसान पहुंचा सकता है।
सात साल में छठा प्रधानमंत्री मिलने की तैयारी
स्टार्मर के इस्तीफे के साथ ब्रिटेन में प्रधानमंत्रियों के तेजी से बदलने का सिलसिला जारी रहेगा। पिछले कुछ वर्षों में कई प्रधानमंत्री अपना कार्यकाल पूरा करने से पहले ही पद छोड़ चुके हैं।
ब्रेक्जिट विवाद के बाद डेविड कैमरन ने इस्तीफा दिया था। उनके बाद थेरेसा मे, फिर बोरिस जॉनसन, लिज ट्रस और ऋषि सुनक भी विभिन्न राजनीतिक और आर्थिक कारणों से समय से पहले पद छोड़ने पर मजबूर हुए। अब कीर स्टार्मर भी उसी सूची में शामिल हो गए हैं।
ब्रिटेन में बार-बार क्यों बदलते हैं प्रधानमंत्री?
विशेषज्ञों के अनुसार इसकी सबसे बड़ी वजह ब्रिटेन की संसदीय व्यवस्था है। वहां प्रधानमंत्री का पद सीधे जनता के भरोसे पर नहीं, बल्कि अपनी पार्टी के सांसदों के समर्थन पर टिका होता है।
यदि सांसदों को लगता है कि किसी नेता की लोकप्रियता घट रही है या वह अगले चुनाव में पार्टी को नुकसान पहुंचा सकता है, तो वे नेतृत्व परिवर्तन की प्रक्रिया शुरू कर सकते हैं। इसी कारण ब्रिटेन में कई बार आम चुनाव के बिना ही प्रधानमंत्री बदल जाते हैं।
अब सबकी नजर लेबर पार्टी के अगले नेतृत्व चुनाव पर है, क्योंकि उसी के साथ यह तय होगा कि ब्रिटेन का अगला प्रधानमंत्री कौन बनेगा और देश की राजनीति किस दिशा में आगे बढ़ेगी।









