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20 हजार से अधिक मोबाइल ट्रेकिंग के बाद भी नहीं लगा आरडी गार्डी से चोरी हुए शिशु का सुराग

6 माह से अधिक बीत गये, पुलिस की दबिशें भी हुईं नाकाम

उज्जैन।देवास जिले में रहने वाली दुष्कर्म पीडि़ता का आरडी गार्डी अस्पताल से नवजात शिशु चोरी हो गया। पुलिस ने केस दर्ज किया, कई जगह दबिश दीं लेकिन 6 माह बीतने के बाद भी आज तक शिशु का कोई सुराग हाथ नहीं लग पाया है।
यह था मामला

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देवास जिले में रहने वाली नाबालिग किशोरी का गांव के ही युवक ने अपहरण कर दुष्कर्म किया। पुलिस ने अपहरण का केस दर्ज करने के बाद किशोरी को युवक के साथ पकड़ा। युवक के खिलाफ धारा 376 के तहत केस दर्ज किया और जेल भेजा जबकि किशोरी अपने परिजनों के साथ रहना नहीं चाहती थी इस कारण उसे उज्जैन के बाल सुधार गृह में रखा गया।

इस दौरान किशोरी को पेट दर्द हुआ तो जांच में पता चला कि वह प्रेगनेंट है। 7 माह बाद उसने आरडी गार्डी अस्पताल में शिशु को जन्म दिया। जहां से अज्ञात व्यक्ति ने नवजात शिशु चोरी कर लिया जिसकी रिपोर्ट चिमनगंज थाने में दर्ज कराई गई।

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सायबर सेल की टीम ने टीआई को दी थी जानकारी

शिशु के चोरी होने के अनुमानित समय को आधार बनाकर सायबर सेल की टीम ने उस समय अस्पताल में एक्टिवेट मोबाइलों की टॉवर से लोकेशन निकाली।

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इस दौरान टीम को 20 हजार से अधिक मोबाइलों की जांच करना पड़ी थी। अंतिम परिणाम से सायबर की टीम ने थाना प्रभारी को अवगत कराया था, उसी आधार पर पुलिस टीम ने देवास जिले के गांव में दबिश भी दी लेकिन शिशु पुलिस को नहीं मिल पाया था।

बंद थे अस्पताल के कैमरे

पुलिस ने केस दर्ज करने के बाद सबसे पहले अस्पताल में लगे सीसीटीवी कैमरे चैक किये तो पता चला कि परिसर के सभी कैमरे बंद हैं। इस पर स्टाफ के लोगों से पूछताछ की गई लेकिन किसी से कोई सुराग हाथ नहीं लगा। पुलिस को बस इतना पता चला कि किशोरी से मिलने उसके परिजन आये थे।

गांव में दबिश के बाद भी सफलता नहीं

चिमनगंज पुलिस की टीम ने देवास जिले के गांवों में दबिश दी। मुखबिरों को सक्रिय किया लेकिन कहीं से सफलता हाथ नहीं लगी। एक समय ऐसा भी आया जब सीएसपी नेगी ने कहा कि पुलिस को शीघ्र सफलता मिलने वाली है।

इनका कहना….सायबर सेल टीम द्वारा शिशु चोरी के दौरान अस्पताल में एक्टिव मोबाइलों की टॉवर लोकेशन के आधार पर जांच की थी जिनकी संख्या हजारों में थी। जानकारी से थाना प्रभारी को अवगत करा दिया था। शिशु तक पुलिस नहीं पहुंच पाई और उसकी तलाश आज भी जारी है।-प्रतीक यादव, प्रभारी सायबर सेल

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