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इस माह मकर संक्रांति, बसंत पंचमी सहित कई तीज-त्योहार

मकर संक्रांति को खरमास समाप्ति के बाद शुरू होंगे मांगलिक कार्य

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पवित्र नदी में स्नान दान-पुण्य का विशेष महत्च

 

उज्जैन। नया साल शुरू हो गया है। इस वर्ष के पहले महीने जनवरी में एक दर्जन से अधिक व्रत व त्योहार पड़ रहे हैं। मकर संक्रांति, लोहड़ी, पोंगल, षट्तिला एकादशी, शनि अमावस्या व बसंत पंचमी सहित अन्य व्रत-त्योहार इस माह मनाए जाएंगे।

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व्रत त्योहार के अवसर पर पवित्र नदी में स्नान करने व दान-पुण्य का विशेष महत्व बताया गया है। 14 जनवरी को सूर्य के मकर राशि में प्रवेश करते ही खरमास का समापन हो जाएगा। सूर्यदेव उत्तरायण जाएंगे। इसके बाद विवाह, गृह प्रवेश आदि जैसे शुभ और मांगलिक कार्य शुरू हो जाएंगे। इस महीने में प्रदोष, पौषी पूर्णिमा, तिल चतुर्थी, तिल प्रदोष, शिव चतुर्दशी व्रत, मौनी अमावस्या, तिल कुंद चतुर्थी, शीतला पष्ठी, मां नर्मदा प्राकट्योत्सव जैसे व्रत आएंगे। ऐसे में इस महीने धार्मिक, सामाजिक कार्यक्रम होंगे।

संकष्टी/ माघी चतुर्थी व्रत…..

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माघ मास के कृष्ण पक्ष में आने वाली संकष्टि चतुर्थी इस बार आयुष्मान एवं प्रीति योग बन रहे है। इन विशेष योग में इस दिन गणेशजी की पूजा करने पर विशेष फल की प्राप्ति होती है। इस दिन माताएं अपने पुत्र की दीर्घायु के लिए व्रत करती पूजन करती है। इस बार यह शुभ तिथि 10 जनवरी मंगलवार को आ रही है। इस बार संकष्टि चतुर्थी मंगलवार को होने से अंगारकी चतुर्थी कहलाएगी। वर्ष भर में आने वाली चतुर्थी में यह चतुर्थी सबसे बड़ी है। मंगलवार को नक्षत्र की अनुकूलता के कारण चतुर्थी सर्वार्थ सिद्धि योग में आ रही है। इस योग में की गई साधना उपासना मनोवांछित फल प्रदान करती है।

मौनी अमावस्या

माघ माह के कृष्ण पक्ष की मौनी अमावस्या पर पवित्र जलाशयों में स्नान का विशेष महत्व है। चूंकि इस बार यह अमावस्या 21 जनवरी शनिवार को है, अत: शनिश्चरी अमावस्या का भी योग बन रहा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन मौन रहकर व्रत करने वाले व्यक्ति को मुनि पद की प्राप्ति होती है। इस दिन पावन नदियों में स्नान के साथ दान-पुण्य का विशेष महत्व है।

बसंत पंचमी 26 जनवरी को

माघ माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी अर्थात बसंत पंचमी से ऋतु परिवर्तन होना आरंभ हो जाता है। 26 जनवरी के दिन विद्या की देवी मां सरस्वती जयंती रहती है। अत: मां सरस्वती की पूजा की जाती है। इसी दिन भगवान शिव की लगन लिखी जाती है। बसंत पंचमी की पूजा सूर्योदय के बाद और दिन के मध्य भाग से पहले की जाती है। इस दिन विवाह का अबूझ मुहूर्त भी रहता है। कई विवाह समारोह भी होंगे।

मकर संक्रांति को सूर्य होंगे उत्तरायण

सूर्य का मकर राशि में प्रवेश 14 जनवरी की रात के चतुर्थ पहर में 3.10 पर होगा। दूसरे दिन 15 तारीख रविवार को ही इसका पुण्यकाल माना जाएगा। संक्रांति वाले दिन सकर्म योग भी बन रहा है, जो विशेष शुभ फलदायी है। इसी दिन संक्रांति की पूजा व स्नान- दान होंगे। इस बार संक्रांति वराह के वाहन पर सवार होकर आ रही है। ज्योतिर्विदों की मानें तो यह व्यापारी वर्ग के लिए शुभ फलदायी होगी। इसी दिन सूर्यदेव उत्तरायण हो जाएंगे।

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