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कल से धु्रव योग में गुप्त नवरात्रि की शुरुआत भक्ति की खुशबू से महकेंगे माता के मंदिर

तंत्र साधना और 10 महाविद्याओं की पूजा के लिए विशेष मानी जाती है गुप्त नवरात्रि

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अक्षरविश्व न्यूज उज्जैन। जिस तरह सनातन धर्म में शारदीय और चैत्र नवरात्रि का महत्व है, उसी तरह गुप्त नवरात्रि भी महत्वपूर्ण होती है। इस बार आषाढ़ माह की गुप्त नवरात्रि पर्व की शुरुआत गुरुवार से धु्रव योग में हो रही है। इस दौरान मां दुर्गा के 10 महाविद्याओं की पूजा-अर्चना गुप्त तरीके से की जाती है। ज्योतिर्विद् पं. अजय कृष्ण शंकर व्यास ने बताया कि देवी भागवत पुराण के आख्यान के अनुसार इस बार माता पालकी पर सवार होकर आ रही हैं। ऐसे में अनुमान है कि देश-विदेश मे इस बार युद्ध के साथ डर का माहौल और महामारी आ सकती है जो कि आम आदमी के लिए भी अच्छे संकेत देने वाला नहीं हैं।

वैसे तो साल में चार बार नवरात्रि पर्व मनाया जाता है जिसमें एक शारदीय नवरात्रि, दूसरा चैत्र नवरात्रि और एक माघ माह की गुप्त नवरात्रि तथा दूसरा आषाढ़ माह की गुप्त नवरात्रि होती है। गुप्त नवरात्रि में गोपनीय तरह से तंत्र विद्या के साधक मां को प्रसन्न करते हैं। आषाढ़ माह की गुप्त नवरात्रि 26 जून से शुरू हो रही है जिसका समापन 4 जुलाई को होगा। नवरात्रि के दौरान 52 शक्तिपीठों में से एक हरसिद्धि माता मंदिर, चामुंडा माता मंदिर सहित अन्य देवी मंदिरों में रोज मां विशेष शृंगार करने के साथ अनुष्ठान होंगे।

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कलश स्थापना मुहूर्त
गुरुवार सुबह 4.33 बजे से 6.05 बजे तक और सुबह ५.१२ बजे से ७.४३ बजे तक हो सकता है।

अभिजीत मुहूर्त

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सुबह 10.58 बजे से 11.53 बजे तक

दोपहर 12.02 से 12.56 बजे मध्याह्न तक

इन महाविद्याओं की होती है पूजा

मां काली- शक्ति और परिवर्तन की देवी

तारा देवी- ज्ञान और मोक्ष की देवी

त्रिपुरा सुंदरी- सौंदर्य और आकर्षण की देवी

मां भुवनेश्वरी- संसार की देवी

मां छिन्नमस्तका- त्याग और बलिदान की देवी

मां त्रिपुरा भैरवी- शक्ति और भक्ति की देवी

मां धूमावती- विध्वंस और परिवर्तन की देवी

मां बगलामुखी- शक्ति और विजय की देवी

मां मातंगी- ज्ञान और कला की देवी

मां कमला देवी- समृद्धि और सौभाग्य की देवी

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