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वट सावित्री 6 जून को, महिलाएं पूजा कर मांगेंगी परिवार की सुख-समृद्धि

अक्षरविश्व न्यूज. उज्जैन ज्येष्ठ मास की अमावस्या (6 जून) को मनाई जायेगी। इस दिन वट सावित्री व्रत का महत्व होता है। सुहगिन महिलाएं व्रत सावित्री का व्रत धारण पति की दीर्घायु व परिवार की सुख-समृद्धि की कामना के साथ वट वृक्ष की विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना करती हैं।

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वट सावित्री के दिन सुहागिन महिलाएं अपने पति की दीर्घायु और सुख-समृद्धि के लिए व्रत रखती हैं। इस त्योहार को लेकर यह मान्यता है कि इस व्रत को रखने से परिवार के लोगों को सौभाग्य का आशीर्वाद मिलता है और वैवाहिक जीवन में खुशियां आती है। बहुत से लोग यह भी मानते हैं कि इस व्रत का महत्व करवा चौथ के व्रत जितना होता है। इस दिन व्रत रखकर सुहागिनें वट वृक्ष की पूजा लंबी आयु, सुख-समृद्धि और अखंड सौभाग्य देने के साथ ही हर तरह के कलह और संतापों का नाश करने वाली मानी जाती है।

वट सावित्री का व्रत ज्येष्ठ मास की अमावस्या तिथि को रखा जाता है। अमावस्या तिथि वाला वट सावित्री व्रत 6 जून को है, जबकि पूर्णिमा वाला वट सावित्री का व्रत 21 जून को रखा जाएगा। वट सावित्री व्रत मुख्य रूप से सावित्री और वट वृक्ष से जुड़ा हुआ है। हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार, सावित्री ने यमराज को अपने पति सत्यवान के प्राण को लौटाने पर विवश किया था। इसलिए

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विवाहित स्त्रियां, पति की दीर्घायु और सकुशलता की कामना के लिए वट सावित्री व्रत करती हैं।वट सावित्री व्रत के लिए शुभ मुहूर्त
ज्येष्ठ महीने की अमावस्या तिथि पांच जून, को शाम छह बजकर 24 मिनट पर शुरू हो रही है। साथ ही इस तिथि का समापन छह जून को दोपहर चार बजकर 37 मिनट पर होगा। ऐसे में हिंदू पंचांग के अनुसार, वट सावित्री व्रत छह जून गुरुवार के दिन किया जाएगा।वहीं इस दिन पूजा के लिए शुभ मुहूर्त सुबह11 बजकर 52 मिनट से दोपहर 12 बजकर 48 मिनट पर होगा।

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