हर घंटे शहरवासियों को अपना शिकार बना रहे स्ट्रीट डॉग

मासूम बच्चों पर झपट रहे कुत्ते, घर के बाहर खेलना हो सकता है खतरनाक, नसबंदी का असर नहीं
181 घायल एक सप्ताह में रैबीज इंजेक्शन लगवाने आ चुके हैं
अक्षरविश्व न्यूज: उज्जैन। सावधान हो जाइए। गली मोहल्लों के कुत्ते फिर खूखांर हो चले हैं। हर एक घंटे में एक कुत्ता एक व्यक्ति को अपना निशाना बना रहा है। आलम यह है कि चरक अस्पताल में औसतन 25 से 30 लोग सिर्फ कुत्ते के काटे का इलाज कराने आ रहे हैं। कुछ मामले तो ऐसे हैं कि घायलों को देखकर दिल दहल जाए। पिछले कुछ दिनों से इन कुत्तों ने मासूम बच्चों को निशाना बनाना शुरू कर दिया है। नगर निगम प्रशासन आपस में ही उलझा हुआ है। उसे शहर के लोगों की तनिक परवाह नहीं है।
सच्चाई जानना है तो कुछ देर के लिए चरक अस्पताल चले जाइए। पता चल जाएगा कि यहां कितने लोग इलाज कराने आ रहे हैं। कुत्ते के शिकार लोग अस्पताल में किस तरह तड़प रहे हैं। यह अलग बात है कि प्रदेश सरकार ने सरकारी अस्पतालों को रैबीज के इंजेक्शन दे रखे हैं वर्ना गरीब लोग इंजेक्शन की व्यवस्था कहां से जुटाते। अक्षर विश्व की टीम पिछले एक सप्ताह से चरक अस्पताल के संपर्क में है। डॉक्टर्स, ड्रेसर्स और हेल्परों से बात की जा रही है। नतीजा यह निकला कि पिछले एक सप्ताह में 179 रैबीज का इंजेक्शन लगवाने आ चुके हैं। खासतौर पर वे बच्चे भर्ती किए गए हैं जिन्हें कुत्तों ने बुरी तरह नोंच लिया है। अस्पताल से मिली जानकारी के अनुसार कुत्ते के काटने पर रैबीज के कुल तीन इंजेक्शन कुछ समय के अंतराल में लगाए जाते हैं।
इसी साल दो बच्चों सहित चार लोग गंवा चुके जान
स्ट्रीट डॉग की समस्या के निराकरण की जिम्मेदारी नगर निगम अफसरों की है। आयुक्त और स्वास्थ्य अधिकारी इससे पल्ला झाड़ते हैं। उनका एक ही जवाब होता है कि स्ट्रीट डॉग को पकड़कर रखने पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा प्रतिबंध लगाया गया है। इस कारण नगर निगम स्ट्रीट डॉग की सिर्फ नसबंदी करवाती है, जबकि सच्चाई यह है कि इस वर्ष स्ट्रीट डॉग के हमले में 4 लोग अपनी जान गंवा चुके हैं जिनमें दो बच्चे शामिल हैं।
बच्चों की हालत देख परिजन भयभीत
कमला नेहरू नगर में रहने वाले बालक पर घर के बाहर खेलते समय स्ट्रीट डॉग ने हमला किया था। उसके चेहरे को काटने व नोंचने पर गंभीर चोंटे आई थीं। दूसरे दिन कोयलखेड़ी की बालिका पर स्ट्रीट डॉग ने घर के बाहर खेलते समय हमला किया। उसके सिर में 8 टांके लगाना पड़े थे। बच्चों के गंभीर घायल होने से उनके परिजन ही नहीं आसपास के रहवासी भी भयभीत हैं। लोगों ने बताया कि अब बच्चों को घर के बाहर अकेले खेलने जाने देना भी खतरे से खाली नहीं है।










