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गधों के मेले का समापन भी विवादों और लापरवाही की भेंट चढ़ा

नगर निगम का जनसंपर्क विभाग जानकारी जुटाने में नाकाम रहा

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अक्षरविश्व न्यूज उज्जैन। कार्तिक मेले में का श्रीगणेश गधों के मेले से होता है। इन्हें गुलाब जामुन खिला कर शुभारंभ तो गया, लेकिन समापन लापरवाही की भेंट चढ़ गया।

इस मेले का समापन शुक्रवार सुबह 11 बजे होना था। महापौर मुकेश टटवाल अपनी टीम के साथ पहुंच गए थे। जनसंपर्क विभाग की ओर से कोई व्यवस्था नहीं की गई। ऐसा लग ही नहीं रहा था कि समापन होने वाला है। गधों के मालिक इंतजार कर रहे थे कि उन्हें पुरस्कार मिलेगा। वे इधर-उधर भटकते रहे। महापौर क्रोधित हुए तब जाकर कर्मचारियों ने व्यवस्था जुटाई और समापन की तैयारी होने लगी। जो कार्यक्रम 11बजे होना था वह दोपहर में हुआ।

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जनसंपर्क विभाग द्वारा जारी विज्ञप्ति के अनुसार उज्जैन नगर पालिक निगम द्वारा कार्तिक मेला अंतर्गत पांच दिवसीय पशुधन मेले का आयोजन किया गया शुक्रवार को कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर पशुधन मेल अंतर्गत घोड़े,गधे, खच्चरों के पशुपालकों का उज्जैन नगर पालिक निगम द्वारा सम्मान किया गया जिसमें अधिक मूल्य पर अपने पशु बेचने वाले और खरीदने वाले खरीदारों का महापौर श्री मुकेश टटवाल द्वारा सम्मान किया गया। इस दौरान पशुधन मेला समिति संयोजक कैलाश प्रजापत, क्षेत्रीय पार्षद छोटेलाल मंडलोई उपस्थित रहे।

किसे क्या सम्मान जानकारी नहींं
जनसंपर्क विभाग की लापरवाही देखिए, प्रतिवर्ष गधों के मालिकों और खरीददारों का सम्मान करने के साथ ही यह बताया कि जाता है कि कौन सा गधा कितने में बिका। इससे शहर के लोगों को जानकारी मिलती है कि इस बार सबसे महंगा गधा कौनसा था। जनसंपर्क विभाग के कर्मचारियों ने यह बताने की कोशिश ही नहीं की। अधूरी जानकारी देकर अपने कर्तव्य की इतिश्री कर ली।

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