भंवर को मिली राहत, जनपद चुनाव शून्य घोषित

30 माह तक अध्यक्ष रही विंध्या हटेंगी
अब दोबारा होगा प्रतिष्ठापूर्ण चुनाव, समीकरण बदले
भाजपा के पास 3 और कांग्रेस के पास दो जनपद
अक्षरविश्व न्यूज उज्जैन। मप्र इंदौर हाईकोर्ट की खंड पीठ की डबल बैंच ने जनपद अध्यक्ष का चुनाव शून्य घोषित कर दिया है। अब चुनाव दोबारा होगा। इस फैसले से कांग्रेस को बड़ा झटका लगा है। 27 जुलाई 2022 को हुए चुनाव में 25 में से 12 सदस्यों ने मतदान किया था। हंगामा हुआ और कांग्रेस की विंध्या पंवार को अध्यक्ष घोषित कर दिया गया था। भाजपा समर्थित उम्मीदवार भंवरबाई ने चुनाव प्रक्रिया को अवैध बताते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। 30 महीने बाद उनके पक्ष में फैसला आया है।
गौरतलब है कि जनपद का चुनाव भाजपा और कांग्रेस के लिए प्रतिष्ठा का प्रश्न बना हुआ था। एक तरफ तत्कालीन उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. मोहन यादव थे और दूसरी तरफ तराना के विधायक महेश परमार थे। चुनाव को लेकर खूब हंगामा हुआ। प्रॉक्सी वोट को लेकर भाजपा-कांग्रेस आमने-सामने थे। जनपद पंचायत में 25 में से 13 भाजपा और 12 कांग्रेस के सदस्य हैं। कोरोना का हवाला देते हुए भाजपा समर्थित तीन सदस्यों ने प्रॉक्सी वोट देने का आवेदन दिया था। निर्वाचन अधिकारी ने इसे स्वीकार नहीं किया।
२५ सदस्यों को मतदान में हिस्सा लेना था
याचिकाकर्ता की ओर से वकीलों ने कहा कि 25 निर्वाचित सदस्यों को मतदान में हिस्सा लेना था। चुनाव निष्पक्ष नहीं हुए। भंवरबाई के समर्थन में 13 सदस्यों ने लिखित में आवेदन दिया था। कोर्ट ने इस तथ्य को माना कि चुनाव में निष्पक्षता नहीं बरती गई। इसी आधार पर चुनाव शून्य घोषित कर दिया गया। इधर ग्रामीण राजनीति में चुनाव शून्य होने से समीकरण बदल गए हैं। जनपद की बात करें तो भाजपा और कांग्रेस दोनों बराबर थे।
अब भाजपा के पास तीन और कांग्रेस के पास दो ही जनपद हैं। घट्टिया, बडऩगर और महिदपुर जनपद पर भाजपा का कब्जा है। खाचरोद और तराना जनपद के अध्यक्ष कांग्रेस समर्थित हैं। अब देखना है कि आने वाले समय में जब होंगे तक शून्य हुई जनपद का अध्यक्ष किस पार्टी का होता है। उज्जैन जनपद की सीट को अति प्रतिष्ठापूर्ण माना जाता है। यही कारण है कि विगत चुनाव में दोनों ही दलों ने पूरी ताकत लगा दी थी।









