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महाकालेश्वर मंदिर में दर्शन के नाम पर ठगी, दो आरोपियों ने किया सरेंडर, मित्तल को जेल भेजा

कोर्ट ने दो दिन के रिमांड पर सौंपा दोनों आरोपियों को

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महाकाल थाने की हवालात में गुमसुम बैठे थे सरेंडर करने वाले

दो दिन का रिमांड बेकार गया पुलिस कुछ भी नया नहीं उगलवा पाई दीपक मित्तल से

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अक्षरविश्व महाकाल की मार भ्रष्टाचार का अंत

अक्षरविश्व न्यूज उज्जैन। महाकाल मंदिर में रुपए लेकर दर्शन कराने के नाम पर ठगी करने वाले फरार दो आरोपियों ने सरेंडर कर दिया है। न्यायालय ने दोनों को दो दिन के लिए पुलिस रिमांड पर सौंपा है। एक अन्य आरोपी मंदिर समिति के पूर्व सदस्य मित्तल को रिमांड अवधि समाप्त होने के कारण जेल भेज दिया गया है। मामले में अब तक कुल 13 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है, जबकि एक अभी भी फरार चल रहा है। उसके बारे में भी सूचना मिली है कि वह बहुत जल्द सरेंडर करने वाला है। गौरतलब है कि महाकाल मंदिर में श्रद्धालुओं से रुपए लेकर दर्शन और भस्मआरती कराने के मामले को सबसे पहले कलेक्टर नीरज कुमार सिंह ने उजागर किया था। उसके बाद से आरोपियों की गिरफ्तारी का सिलसिला शुरू हुआ।

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पुलिस ने कुल 14 लोगों को आरोपी बनाया। इनमें से 10 आरोपियों की गिरफ्तारी पहले ही हो चुकी थी। जो 95 दिनों के बाद जेल से बाहर आ गए। मंगलवार को मंदिर समिति के पूर्व सदस्य एवं 10 हजार के इनामी फरार आरोपी दीपक मित्तल ने भी कोर्ट में सरेंडर कर दिया था। न्यायालय ने उसे दो दिन के रिमांड पर पुलिस को सौंपा था।

रिमांड अवधि समाप्त होने पर उसे जेल भेज दिया गया। इधर, गुरुवार को मामले में फरार तत्कालीन भस्मार्ती प्रभारी आशीष शर्मा ने कोर्ट पहुंचकर सरेंडर कर दिया। वहीं एक और फरार आरोपी मीडियाकर्मी पंकज शर्मा ने भी महाकाल थाने पहुंचकर सरेंडर किया। इसके बारे में बताया जाता है कि उसने रात में सरेंडर किया। फरार आरोपियों पर 10-10 हजार रुपए का इनाम भी घोषित किया था। आरोपी आशीष शर्मा और पंकज शर्मा को दो दिन के रिमांड पर पुलिस को सौंपा है। मामले में एक और आरोपी मीडियाकर्मी विजेंद्र यादव अब तक फरार है।

पुलिस ने उसकी गिरफ्तारी के प्रयास किए लेकिन वह अभी तक पुलिस के हाथ नहीं लगा है। जानकारों का कहना है कि अन्य आरोपियों की तरह वह भी थाने में सरेंडर करने वाला है। अब देखना यह है कि जानाकारों की यह खबर कहां तक सच निकलती है। महाकाल थाने में दोनों आरोपी सलाखों के पीछे गुमसुम बैठे हुए थे। थाने में आने-जाने वालों को वह देख रहे थे। आने-जाने वाले भी कह रहे थे कि यह वही दोनों आरोपी है जिन्होंने महाकाल मंदिर में दर्शन कराने के नाम पर श्रद्धालुओं को ठगा था।

पुलिस नहीं पकड़ सकी बाहरी ठगों को

बैंगलुरु के श्रद्धालुओं के साथ भस्मार्ती परमिशन दिलाने के नाम पर धोखाधड़ी करने वाले आरोपियों को महाकाल पुलिस अभी तक पकड़ नहीं सकी है। बताया जाता है कि यह आरोपी खुलेआम शहर में घूम रहे हैं। गौरतलब है कि बैंगलुरु निवासी गोपाल प्यारे सिंह चौहान परिजनों के साथ 23 मार्च को उज्जैन आए थे। महाकाल मंदिर में मयूर वैष्णव नामक व्यक्ति उनसे मिला और उसने भस्मार्ती की परमिशन के नाम पर 6 हजार रु. ऑनलाइन ट्रांसफर करवा लिए। जब गोपाल को पता चला कि उसे ठगा गया है, तब महाकाल मंदिर समिति को शिकायत की गई।

पुलिस ने उसके खिलाफ केस तो दर्ज कर लिया लेकिन गिरफ्तारी के कोई प्रयास नहीं किए। इसी तरह बैंगलुरु से आए प्रसाद दंपती से भी टैक्सी ड्राइवर गौरव आर्य ने 1 हजार रुपए ऑनलाइन ट्रांसफर करवाए थे। गौरव का कहना था कि भारत माता मंदिर के सामने हिमांशु अग्रवाल नामक व्यक्ति मिला था, जिसने भस्मआरती परमिशन दिलाने की बात कही थी। दंपती जब भस्मार्ती के लिए पहुंचे तो हिमांशु ने कॉल रिसीव नहीं किए। गौरव का कहना है दंपती से लिए 1 हजार रुपए भी रिफंड कर दिए थे। पुलिस ने आरोपी गौरव के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया है। आरोपी मयूर और गौरव पुलिस गिरफ्त से बाहर हंै।

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