लैंड पुलिंग के साथ मुआवजा देगी सरकार

सिंहस्थ-2028: मुख्य सचिव की अध्यक्षता में हुई बैठक मे लिया निर्णय
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe
स्थाई सुविधाएं जुट गई तो 2052 के सिंहस्थ तक उपयोगी रहेंगी
अक्षरविश्व न्यूज उज्जैन। सिंहस्थ मेला क्षेत्र में जिन किसानों की जमीन आ रही है प्रदेश सरकार ने उन्हें अतिरिक्त मुआवजा देने का निर्णय लिया है। भोपाल में मुख्य सचिव अनुराग जैन की अध्यक्षता में बैठक हुई। इसमें सिंहस्थ मेला क्षेत्र की जमीनों को लेकर विचार-विमर्श हुआ। निर्णय लिया गया कि लैंड पुलिंग से जमीन लेने और 50 प्रतिशत वापस करने के अलावा किसानों को अतिरिक्त मुआवजा भी दिया जाएगा।
इन योजना में अधिकांश हिस्सा कृषि भूमि का है। सरकार ने इन जमीनों पर कृषि उपयोग के अलावा स्कूल, कॉलेज, अस्पताल, धर्मशाला, आश्रम, अखाड़े बनाने की विशेष छूट की घोषणा की जा चुकी है।
पचास प्रतिशत जमीन किसानों को वापस कर दी जाएगी
सिंहस्थ की योजना में लैंड पुलिंग से जो जमीन सरकार को मिलेगी उसमें 50 प्रतिशत किसानों को वापस कर दी जाएगी। 20 से 25 प्रतिशत जमीन का उपयोग सडक़, बिजली, पानी, सीवर और बिजली की अंडर ग्राउंड लाइन के निर्माण में होगा। इसके अलावा 15 प्रतिशत भूमि सिंहस्थ उपयोग के लिए आरक्षित रहेगी। 5 प्रतिशत भूमि हरियाली, बगीचों व अन्य मनोरंजन गतिविधियों के लिए तथा 5 प्रतिशत पार्किंग, जनसुविधा केंद्र के लिए आरक्षित होगी।
गंदा पानी शिप्रा में नहीं मिलेगा- अब तक जो सिंहस्थ हुए हैं उसमें मिट्टी की सडक़ होने से मुश्किलों का सामना करना पड़ा है। जलजमाव, कीचड़ से लोगों और साधु-संतों को परेशानी हुई थी। अब कांक्रीट सडक़ बनाई जा रही है। इससे यातायात एवं भीड़ प्रबंधन आसान होगा। अस्थाई पंडालों एवं शौचालयों की जगह अंडर ग्राउंड स्थाई सीवर लाइन व ट्रीटमेंट प्लांट बनाए जाएंगेे। इसका लाभ यह होगा कि गंदा पानी शिप्रा में नहीं मिलेगा। पीने के पानी की सबसे ज्यादा परेशानी महसूस की गई थी। अब पानी की स्थाई लाइन, ओवर हेड टैंक का निर्माण किया जाएगा। सिंहस्थ में अब तक अस्थाई बिजली व्यवस्था होती थी। इससे हादसों का डर रहता था। स्वामी सत्यमित्रानंद जी के आश्रम में आग ने तांडव मचाया था। अब लाइन अंडरग्राउंड होगी। सिंहस्थ के समय मेला क्षेत्र की निजी जमीनों का अधिग्रहण एक साल के लिए किया जाता रहा है। मेले के बाद अवैध निर्माणों पर अंकुश लगाने की अधिकृत व्यवस्था नहीं थी। अब अतिक्रमण रुकेंगे।









