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सल्फास मिलाया, इंस्टाग्राम पर लाइव आया, कहा- मर रहा हूं मैं

चरक में सुधर रही थी सेहत, एजेंट के कहने पर परिजन- निजी अस्पताल ले गए, डॉक्टर ने लगाया इंजेक्शन और 15 मिनट बाद थम गईं सांसें

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अक्षरविश्व न्यूज:उज्जैन। चिंतामण क्षेत्र के रहने वाले ३२ वर्षीय युवक ने जंगल में जाकर माजा मेें सल्फास मिलाकर पी लिया। इससे पहले वह इंस्टाग्राम पर लाइव आया और कहा कि मर रहा हूं मैं। परिजन तुरंत मौके पर पहुंचे लेकिन वह बेसुध पड़ा था। उसे चरक अस्पताल लाया गया जहां उसकी सेहत में सुधार भी था लेकिन एक निजी अस्पताल के एजेंट की बातों पर आकर परिवार की महिलाएं उसे निजी अस्पताल ले गई जहां डॉक्टर के इंजेक्शन लगाते के 15 मिनट बाद युवक की मौत हो गई। इसके बाद परिजनों ने अस्पताल में जमकर हंगामा किया। इधर, रविवार सुबह पीएम के बाद शव परिजनों के हवाले कर दिया।

मृतक का नाम लखन पिता हीरालाल नरवरिया निवासी देवराखेड़ी बुजुर्ग है। मामा विक्रम सिंह ने बताया कि शनिवार सुबह 11बजे लखन जंगल में गया और वहां माजा (कोल्ड ड्रिंक) में सल्फास मिलाकर पी गया। इस दौरान वह इंस्टाग्राम पर लाइव भी आया और बोला कि मैं जा रहा हूं। उसके साथ इंस्टाग्राम पर जुड़े छोटा नागदा के रहने वाले परिवार के दामाद राकेश ने यह देख लिया और लखन के परिजनों को सूचना दी। इसके बाद सबसे पहले मामा विक्रम सिंह मौैके पर पहुंचे लेकिन तब तक लखन सल्फास मिली माजा पी चुका था। उसे सुबह 11 बजे चरक अस्पताल में भर्ती करवाया जहां उसकी सेहत में सुधार हो रहा था।

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एजेंट की बातों में आ गईं घर की महिलाएं

मामा विक्रम सिंह एवं अन्य परिजनों ने बताया कि शाम करीब 6 बजे हमारे घर की महिलाओं को चरक हॉस्पिटल में एक निजी हॉस्पिटल का एजेंट अर्जुन मिला। उसने कहा पेशेंट को माधवनगर थाने के सामने स्थित एमपी हॉस्पिटल ले चलो, वहां जल्दी ठीक हो जाएगा। महिलाएं उसकी बातों में आ गईं और परिवार से बात कर लखन को एमपी हॉस्पिटल में भर्ती करवा दिया।

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चरक में सक्रिय रहते हैं एजेंट

चरक अस्पताल जिले का सबसे बड़ा अस्पताल हैं। यहां कई निजी अस्पताल में एम्बुलेंस चालक और एजेंट परिसर में ही घूमते रहते हैं और यहां आने वाले मरीजों एवं उनको परिजनों को लालच देकर निजी अस्पताल में ले जाते हैं। इसके बदले उन्हें कमीशन मिलता है। बावजूद इसके अस्पताल प्रबंधन इस पर लगाम नहीं लगा पा रहा। इस संबंध में सिविल सर्जन डॉ. अजय दिवाकर ने कहा कि इस संबंध में सूचना मिलती है तो ऐसे एजेंट्स के खिलाफ उसी वक्त एफआईआर दर्ज करवाई जाएगी।

इंजेक्शन लगाने के बाद गई जान

परिजनों का आरोप है कि एमपी हॉस्पिटल में पहले 20 हजार रुपए जमा करवाए गए। इसके बाद डॉ. अंकुल गुप्ता ने लखन को इंजेक्शन लगाया जिसके बाद उसकी तबीयत बिगडऩे लगी। 15 मिनट के बाद लखन की मौत हो गई। इसके बाद परिजनों ने अस्पताल में हंगामा कर दिया। सूचना पर माधवनगर पुलिस मौके पर पहुंची और हंगामा कर रहे परिजनों को समझाइश देकर अपने क्षेत्र के थाने में शिकायत करने को कहा। मामले में परिजनों ने सीएम हेल्पलाइन में भी शिकायत की है।

मिस्त्री का काम करता था

परिजनों का कहना है कि लखन ने ऐसा कदम क्यों उठाया, इसकी जानकारी हमें भी नहीं है। एक दिन पहले तक वह बिल्कुल ठीक था। उसके व्यवहार से भी ऐसा कुछ नहीं लगा कि वह जानलेवा कदम उठा लेगा। वह मिस्त्री का काम करता था। घर में उसकी पत्नी और ८ साल का बेटा भी है।

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