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उज्जैन धर्मप्रांत को आर्च का दर्जा, वडक्केल पहले आर्चबिशप

कैथोलिक ईसाई समुदाय में उज्जैन की बड़ी छलांग

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अक्षरविश्व न्यूज उज्जैन। कैथोलिक ईसाई समुदाय की व्यवस्था में उज्जैन ने बड़ी छलांग लगाई है। उज्जैन धर्मप्रांत को अब आर्च (महा धर्मप्रांत) का दर्जा मिल गया है। सेबास्टियन वडक्केल पहले आर्चबिशप बनाए गए हैं। उज्जैन के आर्च बनने के बाद अब सागर, सतना और जगदलपुर धर्मप्रांत अब उज्जैन के अधीन होंगे। उज्जैन धर्मप्रांत में उज्जैन, शाजापुर, राजगढ़, आगर-मालवा, इंदौर, देवास, धार, हरदा, सीहोर, झाबुआ, आलीराजपुर, रतलाम, नीमच, मंदसौर, खंडवा, खरगोन, बुरहानपुर और बड़वानी जिले आते हैं। अब उज्जैन के आर्च बनने के बाद सागर, सतना और जगदलपुर प्रांत में आने वाले जिले भी शामिल हो जाएंगे।

आर्चबिशप सबसे बड़ा ओहदा
बिशप धर्मप्रमुख होते हैं और आर्चबिशप का पद उनसे ऊपर होता है। उनका काम अपने आर्च में धार्मिक और सेवा गतिविधियों को संचालित करना रहता है। उज्जैन धर्मप्रांत की स्थापना 26 फरवरी 1977 को हुई थी। तब इसमें उज्जैन, शााजापुर और राजगढ़ जिले शामिल थे। फादर जॉन पेरूमट्टम पहले बिशप नियुक्त किए गए थे। वह 1998 तक इस पद पर रहे। उनके बाद फादर सेबास्टियन वडक्केल को दूसरा बिशप नियुक्त किया गया था। केरल में जन्मे वडक्केल 1979 में पादरी बने थे। उन्होंने रोम से कैनन लॉ में डॉक्टरेट की उपाधि हासिल की है। उज्जैन आर्च में धार्मिक के साथ स्वास्थ्य और शिक्षा की गतिविधियां संचालित की जा रही हैं।

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क्या होता है धर्मप्रांत: कैथोलिक समुदाय में चर्च व्यवस्था प्रभावशाली है। इसमें पहले जिला, फिर धर्मप्रांत और उसके बाद महा धर्मप्रांत होता है। महा धर्म प्रांत को आर्च कहा जाता है और इसके प्रमुख आर्चबिशप कहलाते हैं।

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