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नई श्रम संहिताएं : मासिक वेतन अभी कम नहीं होगा

नईदिल्ली, एजेंसी। सरकार ने चार नई श्रम संहिताओं को लागू कर दिया है। इसके बाद कंपनियों को वेतन ढांचा बदलना होगा, जिसका असर ग्रेच्युटी-पीएफ की गणना पर पड़ेगा। विशेषज्ञों का कहना है कि नई गणना में ग्रेच्युटी बढ़ सकती है लेकिन मासिक वेतन (टेक-होम सैलरी) पर तुरंत कोई बड़ा असर नहीं पड़ेगा। इसमें कटौती नहीं होगी। इसका कारण ईपीएफ पर लागू 15 हजार रुपये की मूल वेतन सीमा है। नई श्रम संहिता में भविष्य निधि में फिलहाल बदलाव नहीं किया गया है।

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नई परिभाषा तय- सरकार ने ‘वेतन’ की परिभाषा बदल दी है। अब तक कंपनियां मूल वेतन (बेसिक पे) को कम रखती थीं और बाकी रकम को अन्य भत्तों के रूप में देती थीं। लेकिन नए नियमों में मूल वेतन कुल सीटीसी का कम से कम 50 प्रतिशत रखना होगा। वेतन में बेसिक पे, महंगाई भत्ता और अन्य प्रतिदेय भत्तों को शामिल होंगे, एचआरए और यात्रा भत्ता शामिल नहीं होंगे।

घटने की संभावना कम- पीएफ योगदान 15,000 पर सीमित है, जिसका मतलब है कि मौजूदा कर्मचारियों के हाथ आए वेतन पर तुरंत कोई प्रभाव पडऩे की संभावना कम है। कंपनियां नए कर्मचारियों के वेतन ढांचे में बदलाव कर सकती हैं ताकि नई वेतन परिभाषा के अनुरूप भुगतान संरचना तैयार हो सके।

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नई गणना में अधिक फायदा अब तक ग्रेच्युटी की गणना केवल मूल वेतन और डीए के आधार पर होती थी, इसलिए कंपनियां मूल वेतन का हिस्सा कम रखती थीं और बाकी रकम भत्तों के रूप में देकर ग्रेच्युटी को कम रखती थीं। लेकिन अब ग्रेच्युटी की गणना कुल सीटीसी के कम से कम 50% हिस्से के अनुसार होगी। यानी 21 नवंबर के बाद नौकरी छोडऩे वाले को ज्यादा ग्रेच्युटी मिलेगी।

हफ्ते में अधिकतम 48 घंटे तय नए नियमों के अनुसार सामान्य कार्यदिवस 8 से 12 घंटे तक हो सकता है, लेकिन साप्ताहिक सीमा 48 घंटे ही रहेगी। इससे ज्यादा काम सिर्फ कर्मचारी की लिखित सहमति से ही कराया जा सकता है। इसके अलावा हर कंपनी को अब सभी कर्मचारियों को नियुक्ति पत्र देना अनिवार्य होगा।

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