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अगस्त में लंबी खेंच के बाद सितंबर में भारी बारिश के योग

बुध राजा और सूर्य मंत्री इस कारण हवाओं का रहेगा प्रभाव, ज्योतिषीय गणनाओं से मिल रहे मौसम विभाग से अलग संकेत

 

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अक्षरविश्व न्यूज उज्जैन। मालवा क्षेत्र में इस वर्ष के मानसून को लेकर पारंपरिक पंचांगों और ज्योतिषीय गणनाओं ने मौसम विभाग से हटकर एक अलग तस्वीर पेश की है। उज्जैनी, आनंद, नारायण विजय, महावीर और काशी पंचांगों के सामूहिक विश्लेषण के अनुसार, जिले में मानसून की शुरुआत धमाकेदार रहने के बाद अगस्त में 15 से 20 दिन की लंबी खेंच (ब्रेक) आ सकती है। वहीं, सितंबर के मध्य में अचानक इतनी तीव्र बारिश होगी कि जलभराव जैसी स्थितियां बन सकती हैं। हालांकि, मौसम विभाग का पूर्वानुमान इससे अलग है, जिसने पूरे प्रदेश में इस बार सामान्य मानसून की संभावना जताई है।

पंचांगीय गणना के अनुसार, इस वर्ष ग्रहीय व्यवस्था में बुध को राजा और सूर्य को मंत्री का स्थान प्राप्त है। इसी ग्रहीय स्थिति के आधार पर उज्जैन सहित मालवा क्षेत्र में मौसम में बार-बार बड़े बदलाव देखने को मिलेंगे। इस वजह से कहीं तेज तो कहीं बहुत कम बारिश (खंड-वृष्टि) के संकेत हैं। जून के अंतिम सप्ताह से जुलाई के पहले पखवाड़े तक अच्छी बारिश होने की संभावना है, जो खरीफ फसलों की शुरुआती बोनी के लिए बेहद अनुकूल रहेगी।

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अगस्त में शुष्क दौर, सितंबर में मूसलाधार की संभावना

ज्योतिषी पं. रामचंद्र नायक ने बताया कि गणनाओं के अनुसार, अगस्त में शनि की वक्र (उल्टी) गति के प्रभाव से मानसून की रफ्तार काफी धीमी पड़ सकती है। इसके चलते करीब 15 से 20 दिन तक बारिश पूरी तरह थमने से उमस और तापमान में बढ़ोतरी होगी। इस शुष्क दौर के बाद, सितंबर के मध्य (विशेषकर १५-18 सितंबर के आसपास) अचानक तीव्र मूसलधार बारिश की स्थितियां बनेंगी, जिससे शहर के निचले इलाकों में जलभराव की स्थिति निर्मित हो सकती है।

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इस बार ग्रहीय गोचर और मेघ विच्छेद का अनोखा योग

ज्योतिष पं. नायक के अनुसार, ज्योतिष शास्त्र में वर्षा-निर्णय का प्रामाणिक आधार बृहत्संहिता और निर्णय सिंधु ग्रंथों में मिलता है। इस वर्ष रोहिणी का वास समुद्र तट पर होने से 15 जुलाई तक मालवा में कृषि अनुकूल अच्छी वर्षा होगी। इसके विपरीत, अगस्त में शनि की वक्र गति और मंगल के विशिष्ट राशि-गोचर से मेघ-विच्छेद (बादलों का फटना या बिखरना) की स्थिति बनेगी। इससे हवाओं का वेग बढऩे से वायुमंडल की नमी (आर्द्रता) प्रभावित होगी और 15 से 20 दिन का शुष्क अंतराल आएगा।

इसके बाद, 18 सितंबर के आसपास कन्या संक्रांति और जलप्रधान नक्षत्रों के प्रभाव से आकाशीय बिजली चमकने और स्थानीय जलभराव के साथ तीव्र वर्षा होगी, जो अगस्त की कमी को पूरा कर देगी। हालांकि वेधशाला अधीक्षक डॉ. राजेंद्र गुप्ता का कहना है कि मौसम विज्ञान का आंकलन वैज्ञानिक आधार पर होता है, जिसमेें वायुमंडलीय गतिविधियों के कारण परिवर्तन की संभावना होती है। वैज्ञानिक आधार इस बार सामान्य बारिश का संकेत दे रहे हैं।

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