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एनआईसी के पोर्टल में अटकी वाहन मेले की टैक्स छूट

आरटीओ का दावा- छूट भी मिलेगी और वैरिफिकेशन भी होगा

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डीलरों और खरीददारों में असमंजस

उज्जैन।  शासकीय इंजीनियरिंग कॉलेज में लगे विक्रमोत्सव व्यापार मेले से वाहन खरीदी करने वालों की टैक्स छूट नेशनल इंफोर्मेटिक्स सेंटर (एनआईसी) के पोर्टल में अटक गई है। पांच दिन पहले शुरू हुए मेले में गुरुवार रात तक 2965  वाहन बिक चुके हैं। इनमें फोर व्हीलर की संख्या सबसे ज्यादा है। वाहन खरीदारों की बढ़ती संख्या के बीच टैक्स छूट की प्रक्रिया अटकने से डीलर और ग्राहकों के बीच असमंजस की स्थिति बन रही है।

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हालांकि आरटीओ का दावा है कि टैक्स छूट नहीं अटकेगी, वैरिफिकेशन भी जारी रहेगा। डीलर खूब वाहन बेचें, ग्राहक भी जमकर खरीदी करें, किसी को कोई दिक्कत नहीं आएगी। दरअसल टैक्स छूट अटकने की स्थिति नेशनल इंफोर्मेटिक्स सेंटर (एनआईसी) के पोर्टल अपडेट न होने की वजह से बन रही है। केंद्र प्रवर्तित इस पोर्टल से ही रोड टैक्स भरा जाता है लेकिन पोर्टल के सॉफ्टवेयर को इस तरह डिजाइन किया गया है कि यह किसी भी राज्य में एक बार में ही एक ही शहर को छूट दे सकता है। मध्यप्रदेश में इस वक्त दो वाहन मेले चल रहे हैं। पहला मेला ग्वालियर में चल रहा है।

यह 25 दिसंबर से शुरू हुआ था और 25 फरवरी तक चलेगा। दूसरा मेला उज्जैन में भी १५ फरवरी से शुरू हो गया है। पोर्टल पर एक ही मेले की छूट का प्रोविजन होने से उज्जैन में बिके वाहनों का टैक्स जमा नहीं हो पा रहा है क्योंकि पोर्टल पर अभी ग्वालियर मेले के लिए ही छूट दिख रही है। ऐसे में उज्जैन में बिके २ हजार से ज्यादा वाहन बिना टैक्स चुकाए ही सड़क पर उतर गए हैं। डीलरों ने इनमें से कई वाहनों के इंश्योरेंस तो करा दिए है लेकिन टैक्स प्रोसेस पूरी नहीं होने से उन्हें पेनाल्टी का डर सता रहा है।

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ऑफ द रिकॉर्ड, बीमा नहीं करने की चर्चा: इधर यह भी चर्चा है कि डीलरों को मेले में बिके वाहनों का बीमा नहीं करने का हवाला दिया जा रहा है। ताकि टैक्स की अड़चन नहीं आए।

क्या है प्रोसेस: मेले या शोरूम से वाहन खरीदते समय ही बीमा और टैक्स चुकाना होता है। बीमा भरने के अधिकतम सात दिन में टैक्स भरना जरूरी होता है। ऐसा नहीं करने पर टैक्स की 10 फीसदी पेनाल्टी लगती है। उज्जैन में 15 फरवरी से मेला शुरू हुआ है, ऐसे में बीमावाले वाहनों का टैक्स 22 फरवरी तक भरा जाना जरूरी है।

डीलर डर क्यों रहे हैं: डीलरों ने वाहन बेच दिए हैं, इनका बीमा भी करा दिया है। अधिकतर वाहनों की डिलीवरी भी दे दी है। चूंकि ग्राहकों ने टैक्स छूट के हिसाब से भुगतान भी कर दिया है। ऐसे में अगर सात दिन के भीतर टैक्स जमा नहीं होता है तो पेनाल्टी की मार डीलर के सिर पर पड़ेगी। इस आशंका से वे डरे हुए हैं। इधर, ग्राहक भी आशंकित हैं कि अगर तय अवधि में पोर्टल पर टैक्स नहीं भरा गया तो पेनाल्टी उनसे नहीं मांग ली जाए।

क्या कहते हैं आरटीओ: आरटीओ संतोष मालवीय कहते हैं कि टैक्स छूट हर वाहन खरीदार को मिलेगी। हम वाहनों का वैरिफिकेशन कर रहे हैं और यह प्रक्रिया निरंतर जारी है। दिल्ली में टीम लगातार काम कर रही है। सीएम डॉ. मोहन यादव खुद मॉनिटरिंग कर रहे हैं। ऐसे में दिक्कत किसी को नहीं आएगी। मालवीय ने दावा किया कि शुक्रवार से टैक्स भरना शुरू हो जाएगा।

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