बडऩगर में बोरवेल में फंसा दो साल का मासूम : 17 घंटे बीते, मां को बेटे का इंतजार

रिंग फंसाकर रेस्क्यू की कोशिश नाकाम सुरंग खोदकर निकालने की तैयारी
मां की आंखों के सामने खेलते खेलते ओझल हुआ भागीरथ
17 घंटे बीते, बोरवेल में आवाज थमी खुदाई जारी, मां को बेटे का इंतजार
बोरवेल में 75 फीट नीचे फंसा है तीन साल का मासूम, अब तक 25 फीट से ज्यादा खुदाई, रेस्क्यू अभियान जारी
उज्जैन/बडऩगर। उज्जैन से करीब 45 किमी दूर बडऩगर के पास झालरिया गांव में दो साल का भागीरथ देवासी को खुले बोरवेल में से निकालने की रेस्क्यू टीम की पहली कोशिश विफल हो गई है। टीम ने हाथों में रिंग डालकर भागीरथ को निकालने का प्रयास किया था। 75 फीट पर फंसे भागीरथ को निकालने के लिए अब सुरंग खोदी जा रही है।
राजस्थान के पाली का रहने वाला भागीरथ मां और मामा के साथ भेड़ चराने के लिए मध्यप्रदेश में आया था। इनका डेरा बडऩगर के झालरिया गांव में लगा था। बीती शाम खेलते-खेलते भागीरथ बोरवेल के पास चला गया और ढक्कन उठाकर अंदर उतर गया। वह २०० फीट गहरे बोरिंग में ७५ फीट पर जाकर फंस गया। मां ने उसे गिरता देखा तो चीख पुकार मचाई।
गांव वालों ने पहले अपने स्तर पर बच्चे को निकालने का प्रयास किया। बाद में प्रशासन को सूचना दी। बच्चे को निकालने के लिए एसडीईआरएफ की टीम रात ८ बजे पहुंच गई थी। देर रात एनडीआरएफ की टीम भी मौके पर पहुंची। एसपी-कलेक्टर भी रात से ही मौके पर डटे हुए हैं। मासूम की मां सट्टू बाई का रो-रोकर बुरा हाल है। वो बार-बार भगवान का नाम ले रही है। कह रही है कि जाने वो कैसा होगा? एसपी प्रदीप शर्मा ने बताया कि रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है।
राजस्थान से पिता पहुंचे
भागीरथ के पिता पूसाराम घटना के समय राजस्थान में थे। सूचना मिलते ही वह झालरिया के लिए निकल पड़े। मौके पर पहुंचे तो उनकी आंखों से आंसू लगातार बह रहे हैं। सिसकियां भरते हुए पूसाराम ने कहा- दो दिन पहले ही यहां से गया था, तब वो ठीक था। परसों ही उससे बात की थी। क्या पता था हादसा हो जाएगा। भागीरथ का रेस्क्यू जितना लंबा खिंच रहा है, उज्जैन के झालरिया गांव में भीड़ बढ़ती जा रही है। कई लोग भागीरथ के सुरक्षित रेस्क्यू के लिए प्रार्थना कर रहे हैं। पुलिस ने बोरवेल के आसपास घेराबंदी कर रखी है। रेस्क्यू टीम पोकलेन मशीन की मदद से गड्ढा खोद रही है।
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भागीरथ को बोरवेल में 1७ घंटे बीते, जुट रही भीड़
दो साल के भागीरथ देवासी को बोरवेल में गिरे करीब 1७ घंटे बीत चुके हैं। भोपाल से पहुंची एनडीआरएफ और हरदा, इंदौर और उज्जैन की एसडीआरएफ की जॉइंट रेस्क्यू टीम उसे सकुशल निकालने की हरसंभव कोशिश कर रही है। उज्जैन के झालरिया गांव में प्रशासनिक अधिकारियों के साथ आसपास के इलाके से भी लोग पहुंच रहे हैं।
राजस्थान के पाली जिले के गुड़ानला गांव से भेड़-बकरियां चराने आए चरवाहा परिवार के लिए गुरुवार की शाम किसी काल से कम नहीं थी। भागीरथ की मां जट्टूबाई ने रोते हुए बताया कि वे डेरे की ओर लौट रही थीं, बच्चा उनसे महज 4-5 कदम पीछे था। अचानक उसके चिल्लाने की आवाज आई। पीछे मुडक़र देखा तो वह बोरवेल में गिर चुका था। परिजनों के मुताबिक, बच्चे ने पत्थर से ढंका ढक्कन हटाया और बाल्टी समझकर उसमें पैर डाल दिया। खेत मालिक अय्यूब खान ने दो दिन पहले ही मोटर खराब होने पर उसे बाहर निकाला था तभी से बोरवेल खुला पड़ा था।
बडऩगर तहसील के ग्राम झालरिया में तीन साल के मासूम भागीरथ पिता पंसाराम की जिंदगी व मौत के बीच जंग जारी है। गुरुवार शाम 7.३० से ८ बजे के बीच 200 फीट गहरे खुले बोरवेल में गिरे बच्चे को निकालने के लिए प्रशासन और तीन जिलों की एसडीआरएफ टीमें पिछले 1७ घंटों से पसीना बहा रही हैं। दोपहर १ बजे तक टीम बच्चे तक नहीं पहुंच सकी थी।
भेड़ चराने आया था राजस्थान का परिवार
भागीरथ पिता पंसाराम राजस्थान के पाली जिले के ग्राम गुड़ानला रहने वाला है। परिवार पिछले तीन दिन से इलाके में भेड़ चराने के लिए रुका हुआ था। परिजन के मुताबिक बच्चा दीवार के पास खेल रहा था। उसने पत्थर से बोरवेल का ढक्कन हटाया और बाल्टी समझकर पैर डाल दिया, जिससे वह सीधे अंदर गिर गया। मां ने उसे गिरते देखा और बचाने की कोशिश की लेकिन तब तक वह नीचे गहराई में जा चुका था।
पूरे गांव में प्रार्थनाओं का दौर पिता राजस्थान से रवाना
मासूम के पिता पंसाराम, जो काम के सिलसिले में राजस्थान के पाली गए थे, बेटे के हादसे की खबर सुनकर उज्जैन के लिए निकल चुके हैं। झालरिया गांव में भारी भीड़ जमा है और हर कोई भागीरथ के सुरक्षित बाहर आने की प्रार्थना कर रहा है। मामा भीमा राव और रिश्तेदार शालूराम ने कहा कि वे पीढिय़ों से यहां पशु चराने आते हैं, लेकिन कभी नहीं सोचा था कि ऐसा हादसा होगा।
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