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21 जून को सबसे लंबा दिन रहेगा, 13 घंटे से ज्यादा होगी अवधि

आठ नक्षत्र मिलकर तय करेंगे 120 दिनों के मानसून का मिजाज, बुधादित्य और भद्र राजयोग से खुलेंगे तरक्की के द्वार

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उज्जैन। 21 जून को आकाश में एक साथ कई महत्वपूर्ण खगोलीय, ज्योतिषीय और धार्मिक संयोग बनने जा रहे हैं। ग्रीष्म अयनांत (समर सोल्सटिस), सूर्य का दक्षिणायन होना, वर्षा नक्षत्रों की सक्रियता और वैवस्वत मन्वंतर से जुड़ी मान्यताओं के कारण यह दिन विशेष महत्व रखता है। ज्योतिषाचार्यों और पंडितों के अनुसार, इन दुर्लभ संयोगों का सीधा और सकारात्मक प्रभाव मौसम, कृषि और व्यापारिक जगत पर दिखाई देगा।

साल की सबसे छोटी रात: वेधशाला अधीक्षक डॉ. राजेंद्र गुप्त ने बताया कि पृथ्वी अपने अक्ष पर $23.5 डिग्री झुकी हुई है। यही कारण है कि 21 जून को सूर्य कर्क रेखा पर लंबवत होगा। इस वजह से उत्तरी गोलार्ध में यहां वर्ष का सबसे लंबा दिन और सबसे छोटी रात रहेगी। इस दिन उज्जैन में दिन की अवधि 13 घंटे २८ मिनट रहेगी। जिसके बाद से धीरे-धीरे दिन छोटे और रातें लंबी होने का क्रम शुरू हो जाएगा।

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सूर्य का आद्र्रा नक्षत्र में प्रवेश और मानसून का शंखनाद

ज्योतिषी पं. रामचंद्र नायक के अनुसार, 21 जून को सूर्यदेव उत्तरायण से दक्षिणायन की यात्रा शुरू करेंगे। इसके ठीक अगले दिन 22 जून को रात 8 बजकर 32 मिनट पर सूर्य आर्द्रा नक्षत्र में प्रवेश कर जाएंगे। पौराणिक मान्यताओं में इसी कालखंड को वैवस्वत मन्वंतर का विधाता माना गया है। वैवस्वत मन्वंतर हिंदू काल-गणना (ब्रह्मांड विज्ञान) के अनुसार वर्तमान युग का नाम है।

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यह दो शब्दों से मिलकर बना है-वैवस्वत और मन्वंतर (मनु का युग)। वर्तमान समय में हम इसी मन्वंतर के सातवें चक्र में जी रहे हैं। आर्द्रा नक्षत्र के अधिदेवता भगवान रुद्र हैं, जिन्हें आंधी, तूफान और वर्षा का स्वामी कहा जाता है। ऐसे में सूर्य का आर्द्रा में जाना देश में वर्षा ऋतु के विधिवत आगमन का सबसे बड़ा संकेत है।

मघा तक युवा रहेगा मानसून, हस्त नक्षत्र में होगी विदाई:

ज्योतिषीय गणना के अनुसार, आर्द्रा से लेकर हस्त नक्षत्र तक कुल आठ नक्षत्रों को वर्षाकाल का आधार माना जाता है, जो पूरे 120 दिनों के मानसून चक्र का प्रतिनिधित्व करते हैं। पंडितों का कहना है कि मानसून मघा नक्षत्र तक अपनी पूरी युवा अवस्था में रहता है, जिससे देश में झमाझम बारिश होती है। इस साल मघा, पुष्य और अश्लेषा नक्षत्रों में मूसलाधार बारिश के मजबूत योग हैं। इसके बाद पूर्वा फाल्गुनी और उत्तरा फाल्गुनी आते-आते मानसून अपनी वृद्धावस्था की ओर बढ़ जाता है और अंत में हस्त नक्षत्र के साथ वर्षाकाल का समापन हो जाता है।

बुधादित्य और भद्र राजयोग से चमकेगा देश का कारोबार

पं. नायक के मुताबिक ग्रहों के राजकुमार बुध भी इस दौरान अपनी चाल से बड़ा उलटफेर करने वाले हैं। बुध 27 जून को कर्क राशि में प्रवेश करेंगे और फिर 28 तारीख को वक्री होकर दोबारा मिथुन राशि में लौट आएंगे। मिथुन राशि में पहले से मौजूद सूर्य के साथ बुध की यह युति बुधादित्य राजयोग का निर्माण करेगी। इसके साथ ही बुध के अपनी स्वराशि में बेहद प्रभावी होने से भद्र राजयोग (पंचमहापुरुष राजयोगों में से एक) भी बनेगा। यह जल कारक योग देश के व्यापारिक और कृषि क्षेत्रों के लिए समृद्धि के नए द्वार खोलेगा।

मत्स्य पुराण का विशेष मत: पं. नायक ने बताया कि मत्स्य पुराण में सूर्य के इस दक्षिणायन काल को देवी-देवताओं की आराधना के लिए सर्वोत्तम और विशेष फलदायी माना गया है। इस काल में किया गया जप-तप अक्षय पुण्य प्रदान करता है।

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