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Telegram की Play Store पर वापसी, फिर भी 30 जून तक रहेगी रोक

टेक डेस्क। करीब एक हफ्ते तक चली लंबी पाबंदी के बाद लोकप्रिय मैसेजिंग प्लेटफॉर्म टेलीग्राम (Telegram) की गूगल प्ले स्टोर (Google Play Store) पर वापसी हो गई है। केंद्र सरकार ने NEET-UG 2026 की दोबारा आयोजित होने वाली परीक्षा की संवेदनशीलता को देखते हुए 16 जून से 22 जून तक टेलीग्राम ऐप पर अस्थायी प्रतिबंध (Temporary Ban) लगाया था। हालांकि, एंड्रॉइड यूजर्स के लिए राहत की इस खबर के बीच एप्पल (Apple) यूजर्स को अभी थोड़ा और इंतजार करना होगा, क्योंकि यह ऐप अभी तक आईफोन के ‘एप स्टोर’ पर डाउनलोड के लिए उपलब्ध नहीं हो पाया है।

 

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क्यों लिया गया था टेलीग्राम को ब्लॉक करने का कड़ा फैसला?

टेलीग्राम पर इस त्वरित कार्रवाई के पीछे पेपर लीक और नकल विरोधी मुहिम से जुड़े बड़े कारण थे:

  • NTA की शिकायत: नीट परीक्षा आयोजित करने वाली संस्था नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने केंद्र सरकार से टेलीग्राम के खिलाफ सख्त कदम उठाने की सिफारिश की थी।

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  • छात्रों से धोखाधड़ी: एजेंसी के पास पुख्ता इनपुट्स थे कि कुछ संगठित नकल गिरोह और जालसाज इस प्लेटफॉर्म का गलत इस्तेमाल कर रहे थे। ये गिरोह NEET-UG 2026 री-एग्जाम में बैठने वाले छात्रों को गुमराह करने, फर्जी दावे करने और उनसे मोटी रकम ठगने की कोशिशों में जुटे थे। इसी धोखाधड़ी को रोकने के लिए सरकार ने एहतियातन टेलीग्राम को ब्लॉक कर दिया था।

मैसेज-एडिटिंग फीचर पर 30 जून तक लगी रहेगी रोक

भले ही ऐप की प्ले स्टोर पर वापसी हो गई है, लेकिन टेलीग्राम अभी पूरी तरह से पाबंदियों से मुक्त नहीं हुआ है। सरकार ने इसके सबसे प्रमुख मैसेज-एडिटिंग फीचर (Message-Editing Feature) पर फिलहाल रोक बढ़ा दी है।

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  • बदलाव की अनुमति नहीं: कोई भी यूजर भेजे गए मैसेज को आगामी 30 जून तक एडिट नहीं कर पाएगा

  • फर्जी खबरों पर लगाम: एक्सपर्ट्स का मानना है कि इस फीचर को इनएक्टिव (निष्क्रिय) रखने से परीक्षा के दौरान फर्जी संदेशों, अफवाहों और भ्रामक जानकारियों को फैलाकर पल-पल में डिलीट या चेंज करने वाले गिरोहों पर नकेल कसी जा सकेगी।

दिल्ली हाई कोर्ट ने सरकारी एक्शन पर लगाई मुहर

इस बीच कानूनी मोर्चे पर भी टेलीग्राम को बड़ा झटका लगा है। इस महीने की शुरुआत में ‘टेलीग्राम एफजेड एलएलसी’ (Telegram FZ LLC) ने इस बैन के खिलाफ अदालत का दरवाजा खटखटाया था।

  • याचिका खारिज: दिल्ली हाई कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए टेलीग्राम की याचिका को सिरे से खारिज कर दिया।

  • संवैधानिक रूप से सही: अदालत ने अपने फैसले में साफ कहा कि केंद्र सरकार ने सूचना प्रौद्योगिकी (IT) अधिनियम की धारा 69A के तहत तय की गई पूरी कानूनी प्रक्रिया का पालन किया है। कोर्ट ने माना कि परीक्षा की शुचिता बनाए रखने और आपातकालीन परिस्थितियों (Emergency Situations) में देश के युवाओं के हित में उठाया गया यह कदम पूरी तरह से उचित, तर्कसंगत और अनुपातिक है।

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