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कतर के गैस प्लांट में भीषण धमाका, 12 भारतीयों समेत 13 की मौत

अंतरराष्ट्रीय डेस्क। खाड़ी देश कतर से एक बेहद दर्दनाक और बड़ी खबर सामने आई है। कतर के सबसे बड़े और प्रमुख गैस हब ‘रास लाफान इंडस्ट्रियल सिटी’ के एलएनजी (LNG) कॉम्प्लेक्स में रविवार शाम को एक भयानक विस्फोट हुआ। इस दर्दनाक हादसे में 13 कर्मचारियों की मौके पर ही मौत हो गई, जिनमें से 12 मृतक भारतीय नागरिक हैं। इसके अलावा इस औद्योगिक दुर्घटना में कम से कम 66 लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं, जिन्हें नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया है।

 

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कतर के ऊर्जा मंत्री साद अल-काबी ने सोमवार को इस हादसे की आधिकारिक पुष्टि की। उन्होंने बताया कि यह धमाका रास लाफान स्थित ‘बरजान लोकल गैस सप्लाई फैसिलिटी’ में उस वक्त हुआ, जब प्लांट को दोबारा पूरी तरह चालू (ऑपरेशनल) करने की प्रक्रिया चल रही थी।

70 किमी दूर तक गूंजी आवाज; साजिश के संकेत नहीं

हादसे की तीव्रता और कतर सरकार के आधिकारिक बयान से जुड़ी मुख्य बातें इस प्रकार हैं:

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  • भयानक तीव्रता: प्रत्यक्षदर्शियों और समाचार एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक, धमाका इतना जोरदार था कि इसकी गूंज करीब 70 किलोमीटर दूर स्थित राजधानी दोहा तक सुनाई दी, जिससे आसपास के इलाकों में दहशत फैल गई।

  • तकनीकी खराबी या हादसा: ऊर्जा मंत्री साद अल-काबी ने स्पष्ट किया कि शुरुआती जांच के अनुसार यह पूरी तरह से एक औद्योगिक हादसा है। इसमें किसी भी तरह की बाहरी साजिश या तोड़फोड़ के सबूत नहीं मिले हैं।

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  • बंद पड़ा था उत्पादन: जरूरी मेंटेनेंस और मरम्मत कार्य के चलते यह प्लांट दिसंबर 2025 से पूरी तरह बंद था और हादसे से महज दो दिन पहले ही इसे दोबारा चरणबद्ध तरीके से शुरू किया गया था। कतर प्रशासन ने घटना के सटीक कारणों का पता लगाने के लिए एक उच्च स्तरीय जांच कमेटी गठित कर दी है।

  • सप्लाई पर असर नहीं: कतर सरकार ने भरोसा दिया है कि इस हादसे से वैश्विक पर्यावरण को कोई खतरा नहीं है और दुनिया के अन्य देशों को की जाने वाली कतर की गैस सप्लाई पूरी तरह निर्बाध रूप से जारी रहेगी।

पीड़ितों में कई देशों के नागरिक शामिल; भारतीय दूतावास ने संभाला मोर्चा

इस भीषण औद्योगिक दुर्घटना में हताहत हुए लोग दुनिया के विभिन्न देशों से रोजगार के लिए कतर आए थे। घायलों में भारत के अलावा कतर, पाकिस्तान, नेपाल, बांग्लादेश, तंजानिया, गिनी, केन्या और नाइजीरिया के श्रमिक व इंजीनियर शामिल हैं।

दोहा स्थित भारतीय दूतावास ने इस घटना पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए कहा है कि वे कतर के अधिकारियों और आपदा प्रबंधन टीमों के साथ निरंतर संपर्क बनाए हुए हैं। मृतकों के शवों को भारत भेजने और घायलों के बेहतर इलाज के लिए हरसंभव कूटनीतिक मदद दी जा रही है।

आपातकालीन हेल्पलाइन नंबर और संपर्क सूत्र: भारतीय दूतावास ने प्रभावित परिवारों की सहायता के लिए आपातकालीन हेल्पलाइन नंबर जारी किए हैं:

  • फोन नंबर: +974-55647502 और +975-55384683

  • आधिकारिक ईमेल: cons.doha@mea.gov.in

कतर की तरक्की और वर्कफोर्स में भारतीयों का बड़ा योगदान

कतर की कुल जनसांख्यिकी और उसकी अर्थव्यवस्था में भारतीय समुदाय रीढ़ की हड्डी माना जाता है:

  • सबसे बड़ा प्रवासी समूह: विदेश मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, कतर में वर्तमान में लगभग 7.46 लाख भारतीय निवास करते हैं। यह संख्या कतर की कुल आबादी का करीब 22% है, जिसका अर्थ है कि कतर में रहने वाला हर पांचवां व्यक्ति भारतीय है।

  • हर सेक्टर में मौजूदगी: कतर के तेल-गैस उद्योग, सिविल कंस्ट्रक्शन, एविएशन, बैंकिंग, आईटी, कॉर्पोरेट, अस्पतालों और स्कूलों में भारतीय प्रोफेशनल्स प्रमुख पदों पर हैं।

  • राज्यों की भागीदारी: कतर में रोजगार करने वाले भारतीयों में पहले केरल के लोगों का दबदबा था, लेकिन हाल के वर्षों में उत्तर प्रदेश, बिहार, तमिलनाडु, महाराष्ट्र और गुजरात जैसे राज्यों से भी भारी संख्या में कुशल और अकुशल श्रमिक वहां पहुंचे हैं।

युद्ध की मार और कतर की गैस इकोनॉमी का संकट

रास लाफान इंडस्ट्रियल सिटी को कतर की आर्थिक तरक्की का ‘दिल’ कहा जाता है। 100 वर्ग मील से अधिक क्षेत्र में फैले इस रेगिस्तानी औद्योगिक शहर ने ही कतर को दुनिया के सबसे अमीर देशों और सबसे बड़े लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) निर्यातकों की कतार में खड़ा किया था। लेकिन हालिया वैश्विक और क्षेत्रीय परिस्थितियों ने इसे बड़ा नुकसान पहुंचाया है:

  • ईरान युद्ध का असर: इसी साल मार्च महीने में ईरान द्वारा किए गए मिसाइल हमलों की चपेट में आने से रास लाफान की दो बड़ी गैस प्रोसेसिंग यूनिट्स क्षतिग्रस्त हो गई थीं। इस हमले के कारण कतर की वैश्विक गैस निर्यात क्षमता में 17% की बड़ी गिरावट आई थी।

  • लंबा वक्त लगेगा: कतरएनर्जी (QatarEnergy) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) के अनुसार, मार्च हमले से प्रभावित हुई यूनिट्स को पूरी तरह ठीक करने में 3 से 5 साल का समय लग सकता है। उस दौरान युद्ध के खतरे को देखते हुए करीब 10,000 कर्मचारियों को सुरक्षा कारणों से यहां से हटाना पड़ा था।

  • विस्तार योजना पर ब्रेक: कतर ने साल 2019 में एक महत्वाकांक्षी योजना के तहत 2027 तक अपनी एलएनजी उत्पादन क्षमता को 7.7 करोड़ टन से बढ़ाकर 12.6 करोड़ टन सालाना करने का लक्ष्य रखा था। हालांकि, क्षेत्रीय युद्ध और हालिया हादसों ने इस मेगा प्रोजेक्ट की रफ्तार पर ब्रेक लगा दिया है।

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