सिर्फ तला-भुना नहीं, इस वजह से भी बढ़ता है कोलेस्ट्रॉल

हेल्थ डेस्क। चिलचिलाती धूप और भीषण गर्मी का मौसम हर किसी के लिए चुनौतीपूर्ण होता है, लेकिन दिल की बीमारियों (हृदय रोग) से जूझ रहे मरीजों के लिए यह समय अत्यधिक सावधानी और सतर्कता बरतने का है। जैसे-जैसे पारा चढ़ता है, वैसे-वैसे हमारे शरीर का कार्डियोवैस्कुलर सिस्टम (दिल और रक्त वाहिकाएं) शरीर के तापमान को संतुलित रखने के लिए अतिरिक्त दबाव में आ जाता है। ऐसे में जरा सी लापरवाही भी हार्ट फेलियर या हीट स्ट्रोक जैसी आपातकालीन स्थितियों का कारण बन सकती है।

गर्मियों के इस मौसम में दिल के मरीजों को किन गंभीर गलतियों से बचना चाहिए और अपनी जीवनशैली में क्या सुधार करने चाहिए, इस विषय पर ‘जय प्रभा मेदांता सुपरस्पेशलिटी हॉस्पिटल’ के कैथ लैब्स डायरेक्टर डॉ. शाहीन अहमद ने विशेष और महत्वपूर्ण जानकारियां साझा की हैं।
तापमान का उतार-चढ़ाव क्यों नहीं झेल पाता कमजोर दिल?
डॉ. शाहीन अहमद के अनुसार, गर्मियों का मौसम आते ही अस्पतालों में दिल के मरीजों की संख्या में बढ़ोतरी देखी जाती है। इसके पीछे मुख्य वैज्ञानिक कारण निम्नलिखित हैं:
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थर्मोरेगुलेशन की कमजोरी: अधिकांश हृदय रोगी नियमित रूप से हैवी दवाइयों पर होते हैं और कई मरीजों का हार्ट पंपिंग रेट (दिल की कार्यक्षमता) पहले से ही कमजोर होता है। इस वजह से उनका शरीर अत्यधिक बाहरी गर्मी को सामान्य इंसानों की तरह सहन या नियंत्रित नहीं कर पाता।
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हीट स्ट्रोक का खतरा: ऐसे मरीजों में लू (Heat Wave) और हीट स्ट्रोक को बर्दाश्त करने की क्षमता बेहद कम होती है। तेज धूप में थोड़ी देर भी रहने से उनका ब्लड प्रेशर असंतुलित हो सकता है, जिससे स्थिति गंभीर होने पर उन्हें तुरंत अस्पताल में भर्ती कराना पड़ सकता है।
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पानी का सेवन: आम लोगों से अलग है हार्ट मरीजों का गणित
गर्मियों में अक्सर डॉक्टर हर व्यक्ति को ज्यादा से ज्यादा पानी और लिक्विड डाइट लेने की सलाह देते हैं, लेकिन दिल के मरीजों के मामले में यह नियम पूरी तरह बदल जाता है:
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प्रतिबंध और संतुलन: कई गंभीर हार्ट पेशेंट्स को डॉक्टर रोजाना एक निश्चित मात्रा (जैसे 1 से 1.5 लीटर) से अधिक पानी न पीने की सख्त हिदायत देते हैं, ताकि उनके दिल और फेफड़ों पर अतिरिक्त पानी का दबाव न बने।
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डिहाइड्रेशन का दोहरा संकट: सीमित पानी पीने की मजबूरी के कारण भीषण गर्मी में इन मरीजों के शरीर में पानी की कमी (Dehydration) होने का खतरा बहुत ज्यादा बढ़ जाता है।
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विशेषज्ञ की सलाह: डॉ. अहमद का कहना है कि गर्मियों के महीनों में मरीजों को खुद से पानी की मात्रा बढ़ाने के बजाय अपने कार्डियोलॉजिस्ट (दिल के डॉक्टर) से संपर्क करना चाहिए। डॉक्टर मौसम की तीव्रता को देखते हुए उनकी रोजाना की पानी की लिमिट में सुरक्षित और आवश्यक बदलाव तय कर सकते हैं।
कोलेस्ट्रॉल का नया सच: सिर्फ फ्राइड फूड ही नहीं, ‘ओवरईटिंग’ भी है जिम्मेदार
आमतौर पर माना जाता है कि केवल समोसे, कचौड़ी, पूड़ी या जंक फूड खाने से ही शरीर में बैड कोलेस्ट्रॉल (नसों में ब्लॉकेज) बढ़ता है, लेकिन डॉ. शाहीन अहमद ने इस धारणा को पूरी तरह खारिज किया है:
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जरूरत से ज्यादा खाना: उन्होंने बताया कि भोजन चाहे कितना भी सात्विक, घर का बना या पौष्टिक क्यों न हो, यदि आप आवश्यकता से अधिक मात्रा में यानी ‘ओवरईटिंग’ कर रहे हैं, तो वह अतिरिक्त कैलोरी भी शरीर में फैट और कोलेस्ट्रॉल के रूप में ही जमा होगी।
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डाइट का अनुशासन: गर्मियों में पाचन क्रिया थोड़ी सुस्त हो जाती है, इसलिए दिल के मरीजों को भूख से थोड़ा कम और हल्का भोजन ही करना चाहिए।
गर्मियों में कैसा हो हार्ट पेशेंट्स का डाइट चार्ट?
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क्या खाएं: अपने दैनिक आहार में मौसमी हरी सब्जियां, सलाद, फाइबर युक्त अनाज और ठंडी तासीर वाले पौष्टिक खाद्य पदार्थों की मात्रा बढ़ाएं।
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किन चीजों से दूरी बनाएं: रिफाइंड ऑयल में बनी चीजें, पैकेटबंद स्नैक्स, अत्यधिक नमक, मसालेदार भोजन और चीनी वाले कोल्ड ड्रिंक्स का सेवन पूरी तरह बंद या न के बराबर कर दें।









