Adani Case: अमेरिकी जज ने केस तुरंत खारिज करने से किया इनकार

भारतीय उद्योगपति गौतम अडाणी से जुड़े अमेरिकी आपराधिक मामले में नया मोड़ आ गया है। अमेरिकी जिला जज निकोलस गराउफिस ने मामले को तुरंत खारिज करने से इनकार करते हुए कहा कि सिर्फ एक संक्षिप्त सरकारी बयान के आधार पर केस खत्म नहीं किया जा सकता। उन्होंने अमेरिकी न्याय विभाग (DOJ) से 13 जुलाई तक विस्तृत स्पष्टीकरण मांगा है।

क्या है पूरा मामला?
2024 में अमेरिकी अधिकारियों ने गौतम अडाणी और अन्य पर आरोप लगाया था कि उन्होंने भारत में एक सोलर एनर्जी प्रोजेक्ट से जुड़ी मंजूरी पाने के लिए कथित तौर पर रिश्वत योजना बनाई और अमेरिकी निवेशकों को कंपनी की एंटी-करप्शन नीतियों को लेकर गुमराह किया।
इन आरोपों में सिक्योरिटीज फ्रॉड और वायर फ्रॉड जैसे मामले शामिल थे। हालांकि, अडाणी ग्रुप ने सभी आरोपों को लगातार खारिज किया है।
जज ने क्या कहा?
अमेरिकी न्याय विभाग ने मई 2026 में कहा था कि वह इस मामले में आगे मुकदमा नहीं चलाना चाहता।
इसके बाद अडाणी के वकीलों ने कोर्ट से केस औपचारिक रूप से खत्म करने की मांग की थी, लेकिन जज ने कहा—
- सरकार ने केस वापस लेने की पर्याप्त वजह नहीं बताई।
- सिर्फ निष्कर्ष लिख देना पर्याप्त नहीं है।
- अदालत को फैसला लेने के लिए विस्तृत कानूनी आधार चाहिए।
यानी फिलहाल आरोप आधिकारिक रूप से अभी भी लंबित रहेंगे, जब तक कोर्ट अंतिम आदेश नहीं देता।
दो सरकारों के बीच बदला फैसला
- मामला जो बाइडेन के राष्ट्रपति कार्यकाल के अंतिम दौर में दर्ज किया गया था।
- केस वापस लेने का फैसला डोनाल्ड ट्रम्प के दूसरे कार्यकाल के दौरान अमेरिकी न्याय विभाग ने लिया।
इसी वजह से इस फैसले को लेकर अमेरिका में भी राजनीतिक और कानूनी बहस जारी है।
अडाणी के वकीलों का पक्ष
अडाणी के वकीलों का कहना है कि—
- यह मामला अमेरिकी कानून के अधिकार क्षेत्र से बाहर है।
- कथित रिश्वतखोरी भारत में हुई, इसलिए अमेरिका में इस पर मुकदमा नहीं चलाया जा सकता।
- उन्होंने न्याय विभाग को करीब 500 पन्नों के दस्तावेज सौंपकर केस की कानूनी और तथ्यात्मक कमजोरियां बताई थीं।
SEC के साथ समझौता
इस मामले से जुड़े एक अन्य सिविल केस में अमेरिकी SEC के साथ समझौता हुआ है।
- गौतम अडाणी 6 मिलियन डॉलर
- सागर अडाणी 12 मिलियन डॉलर
का भुगतान करने पर सहमत हुए हैं।
इसके अलावा, Adani Enterprises ने ईरान पर अमेरिकी प्रतिबंधों के कथित उल्लंघन से जुड़े मामले को सुलझाने के लिए 275 मिलियन डॉलर देने पर भी सहमति जताई है।
आगे क्या होगा?
अमेरिकी जज ने न्याय विभाग को 13 जुलाई तक विस्तृत स्पष्टीकरण देने का आदेश दिया है। इसके बाद ही कोर्ट तय करेगा कि मामला औपचारिक रूप से खारिज किया जाए या नहीं।
क्या आपको लगता है कि इतने बड़े मामलों में अदालत को सरकार के फैसलों की विस्तृत समीक्षा करनी चाहिए? अपनी राय कमेंट में बताइए।









