वीकली हेल्थ टिप्स : नवजात के स्वस्थ रहने की नींव है मां का दूध

नवप्रसूताओं का बच्चों को फीड कराना जरूरी

डॉ. श्रेया श्रीवास्तव एसोसिएट प्रोफेसर, आरडी गार्डी मेडिकल कॉलेज मां का दूध नवजात के लिए न सिर्फ सर्वोत्तम, संपूर्ण और प्राकृतिक आहार है, बल्कि यह शिशु का पहला टीका भी है। यह बच्चे को केवल पोषण ही नहीं देता, बल्कि उसकी अनेक संक्रमणों से सुरक्षा भी करता है। यह बच्चे का दिमाग विकसित करता है, उसे मजबूत बनाता है और शरीर के इम्यून सिस्टम को ताकत देता है
मां के दूध से लाभ
मां का दूध देने से संक्रमण कम होता है। शारीरिक वृद्धि ठीक होती है । प्रतिरक्षा प्रणाली बेहतर सक्रिय रहती है। अस्पताल में भर्ती होने की संभावना कम रहती है।
मां के दूध की खासियत
सम्पूर्ण पोषण- मां के दूध में आवश्यक पोषक तत्व जैसे प्रोटीन, वसा कार्बोहाइड्रेट, विटामिन, खनिज लवण और पानी होते हैं। खास बात यह है कि इनकी मात्रा संतुलित होती है। अगर बच्चा केवल 6 महीने भी यह दूध पी ले तो उसका स्वास्थ्य बेहतर रह सकता है। संक्रमण से सुरक्षाः मां के दूध प्रतिरक्षात्मक तत्व जैसे आईजीए एंटीबॉडी, लैक्टोफेरिन,लाइसोजाइम डब्ल्यूबीसी होते हैं। यह बच्चे को दस्त, निमोनिया संक्रमण, सेप्सिस ,एलर्जी से बचाते हैं।
मस्तिष्क विकासः मां के दूध में डीएचए और आवश्यक फैटी एसिड होते हैं जो मस्तिष्क दृष्टि विकास और सीखने की क्षमता को बेहतर बनाते हैं।
कोलोस्ट्रम पहली प्राकृतिक वैक्सीन
मां के दूध में कोलोस्ट्रम होता है । यह शिशु के जन्म के 2 से 4 दिनों तक निकलने वाला गाढ़ा पीला द्रव होता है । इसमें भरपूर प्रोटीन – एंटीबॉडी होती है। यह विटामिन ए से समृद्ध पहली प्राकृतिक वैक्सीन होती है।
फीडिंग कब शुरू करें: जन्म के पहले घंटे के भीतर स्तनपान शुरू करना चाहिए। मां- शिशु के संपर्क से नवजात को पोषण मिलता है, दूध जल्दी उतरता है और भावनात्मक संबंध मजबूत होते हैं। 6 माह तक शिशु को मां का दूध ही देना चाहिए।
यह देने से बचें: नवजात को पानी, शहद, घुट्टी, गाय/भैंस का दूध और फॉर्मूला दूध (जब तक चिकित्सकीय आवश्यकता न हो) देने से बचें।
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