बिना मोबाइल कैसे खिलाएं बच्चे को खाना? अपनाएं ये 4 आसान ट्रिक्स

क्या आपका बच्चा भी सिर्फ दो कौर (निवाले) खाने के बाद ही अपनी प्लेट से मुंह फेर लेता है? अगर हां, तो यह समस्या सिर्फ आपके घर की नहीं है। हर दूसरे माता-पिता इस बात से परेशान रहते हैं कि कोई बच्चा सिर्फ एक-दो चुनिंदा चीजें ही खाना चाहता है, कोई हरी सब्जी देखते ही रोने लगता है, तो कोई हर निवाले के लिए पूरे घर में मां-बाप को पीछे-पीछे भाग-दौड़ करवाता है। ऐसे में पेरेंट्स अक्सर तनाव में आ जाते हैं कि बच्चे के शरीर को पूरा पोषण कैसे मिले।

इसी आम लेकिन गंभीर सवाल का जवाब देते हुए प्रसिद्ध लाइफस्टाइल और मदरहुड कंटेंट क्रिएटर कृष्णा ने अपने इंस्टाग्राम (Instagram) पर एक बेहद उपयोगी रील शेयर की है। आइए जानते हैं उनके अनुभव से निकले वो 4 व्यावहारिक नियम, जिन्हें अपनाकर आप बच्चे की खाने की आदतों को बिना किसी जबरदस्ती के सुधार सकते हैं:
बच्चों को खाना खिलाते समय याद रखें ये 4 सुनहरे नियम:
1. शुरुआत से ही बच्चे को खुद खाने की आदत डालें
जब बच्चा थोड़ा बड़ा होने लगे और अपने नन्हे हाथों से चीजों को पकड़ना सीख जाए, तब उसे खुद अपने हाथों से खाने की कोशिश करने दें। क्रिएटर कृष्णा ने अपना अनुभव साझा करते हुए बताया:
“मैंने अपनी बेटी को लगभग 10 महीने की उम्र से ही ‘फिंगर फूड’ (जैसे उबली गाजर, आलू के टुकड़े या फल) देना शुरू कर दिया था। इससे उसे खाना सिर्फ जबरदस्ती खिलाया नहीं गया, बल्कि उसने खुद खाने को छूकर, उसकी बनावट को पकड़कर और चखकर भोजन के महत्व को समझा।”
2. बच्चे पर खाना खत्म करने का दबाव कभी न डालें
अक्सर माता-पिता की जिद होती है कि बच्चा प्लेट में परोसा गया सारा खाना खत्म करे, लेकिन हर बार बच्चे की भूख एक जैसी होना जरूरी नहीं है। कृष्णा के अनुसार, उन्होंने एक बहुत ही शांत तरीका अपनाया:
- प्लेट हटा लें: “मैं खाना परोसती हूं और बेटी को खाने के लिए थोड़ा समय देती हूं। अगर वह नहीं खाती या नखरे करती है, तो मैं गुस्सा होने के बजाय बस प्यार से इतना कहती हूं—‘लगता है अभी तुम्हें भूख नहीं है’ और शांत रहकर प्लेट हटा देती हूं।”
- दबाव का नुकसान: याद रखें, जबरदस्ती ठूस-ठूस कर खिलाने से बच्चे के मन में खाने के प्रति नफरत या डर पैदा हो सकता है, इसलिए माता-पिता को यहां धैर्य (Patience) रखना बहुत जरूरी है।
3. खाना मना करने पर तुरंत ‘दूसरा विकल्प’ न परोसें
बहुत से घरों में यह आदत होती है कि बच्चे ने जैसे ही दाल-रोटी या सब्जी खाने से मना किया, मां-बाप उसके रोने के डर से तुरंत उसकी पसंद का मैगी, पास्ता, बिस्किट या कोई दूसरा स्नैक बना देते हैं। कृष्णा ने इस आदत को बदलने की सलाह दी है:
- एक ही नियम रखें: “मैंने अपने घर में यह कड़ा नियम रखा है कि अगर बेटी सामने रखा खाना नहीं खाती, तो उसके लिए अलग से कोई दूसरी डिश या शॉर्टकट मील नहीं बनाई जाएगी। मैं उसे साफ शब्दों में समझाती हूं—‘आज घर में यही बना है।’“
- मकसद भूखा रखना नहीं: इसका मतलब बच्चे को सजा देना या भूखा रखना बिल्कुल नहीं है, बल्कि उसे यह मनोवैज्ञानिक बात समझाना है कि हर बार उसकी जिद पर मनपसंद विकल्प तुरंत हाजिर नहीं होगा। जब उसे सच में भूख लगेगी, वह वही खाना खा लेगा।
4. पूरे परिवार के साथ बैठकर खाना खाएं (Family Dining)
बच्चे सिर्फ आपकी दी गई नसीहतों या बातों से नहीं सीखते, बल्कि वे जो अपने आसपास देखते हैं, उसी का अनुकरण करते हैं। इसलिए पूरे परिवार का एक साथ डाइनिंग टेबल या जमीन पर बैठकर खाना खाना एक बहुत ही असरदार आदत साबित हो सकती है:
- जब बच्चा देखता है कि घर के बाकी बड़े सदस्य और भाई-बहन भी वही सादा और पौष्टिक खाना चाव से खा रहे हैं, तो उसके मन में भी उस खाने को चखने और खत्म करने की स्वाभाविक इच्छा (Curiosity) जागृत होती है।
निष्कर्ष
मदरहुड कंटेंट क्रिएटर कृष्णा की यह कहानी और टिप्स हमें सिखाते हैं कि बच्चों में खाने की अच्छी आदतें विकसित करना कोई एक दिन का काम नहीं है। इसके लिए गुस्से या चिड़चिड़ाहट के बजाय एक निश्चित अनुशासन और रूटीन की जरूरत होती है। परफेक्शन के पीछे भागने के बजाय अगर आप भी अपनी लाइफस्टाइल में ये छोटे बदलाव करेंगे, तो बच्चा खुद-ब-खुद खुश होकर खाना खाने लगेगा।









