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शीघ्रदर्शन से करोड़पति हुए कालभैरव, भक्तों ने भरा खजाना

42 दिन मेें 3.09 करोड़ रुपए की आय, अब तीन कतार करने की तैयारी

 

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अक्षरविश्व न्यूज:उज्जैन। भगवान महाकालेश्वर के सेनापति बाबा कालभैरव के खजाने में भक्तों की श्रद्धा जमकर बरस रही है। मंदिर समिति द्वारा शुरू की गई शीघ्र दर्शन टिकट (सशुल्क दर्शन) व्यवस्था से मंदिर को रिकॉर्ड तोड़ कमाई हुई है। मात्र 42 दिनों के भीतर मंदिर समिति के खजाने में 3 करोड़ 9 लाख 42 हजार रुपये आए हैं। सशुल्क दर्शन के प्रति श्रद्धालुओं के इस भारी रुझान को देखते हुए मंदिर समिति ने सावन में इस व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए अलग कतार बनाने की तैयारी की है।

मंदिर प्रशासक संध्या मार्कण्डेय ने बताया कि उज्जैन आने वाले दर्शनार्थियों में महाकाल मंदिर के बाद सबसे अधिक संख्या कालभैरव मंदिर में होती है। यहां प्रतिदिन औसत ४० हजार और अवकाश के दिनों में 80 हजार से 1 लाख तक दर्शनार्थी पहुंचते हैं। डेढ़ महीने २० मई से सशुल्क दर्शन व्यवस्था की शुरुआत की गई थी। 500 रुपए प्रति व्यक्ति का दर्शन शुल्क तय किया गया है, जिसके माध्यम से प्रोटोकॉल के तहत आने वाले श्रद्धालुओं के साथ-साथ आम भक्तों को भी गर्भगृह में प्रवेश देकर बाबा कालभैरव के सीधे दर्शन करवाए जा रहे हैं। इस व्यवस्था से मंदिर समिति को २ जुलाई तक ३ करोड़ ९ लाख ४२ हजार रुपए की आय हुई है।

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सावन में थ्री-लाइन से दर्शन प्लान

प्रशासक के मुताबिक प्रतिदिन सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालु 500 रुपए का शीघ्र दर्शन टिकट खरीदकर गर्भगृह से भगवान कालभैरव के दर्शन का लाभ उठा रहे हैं। मंदिर प्रशासक ने बताया कि सावन में यहां रोज ही करीब एक से डेढ़ लाख दर्शनार्थियों के पहुंचने की संभावना है। बेहतर दर्शन व्यवस्था बनाने के लिए तीन कतार में दर्शन कराने की प्लानिंग है। जिसमेें सामान्य दर्शन, सशुल्क दर्शन (शीघ्र दर्शन) और प्रोटोकॉल के तहत आने वाले दर्शनार्थी अलग-अलग कतार से बिना किसी बाधा के आएंगे। सभी दर्शनार्थियों को बेहतर सुविधा मिल सकेगी।

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मंगलनाथ में भी मंगल-ही-मंगल, हर महीने सिर्फ दर्शन से ही १लाख से अधिक की आय

शीघ्रदर्शन व्यवस्था से काल भैरव ही नहीं बल्कि मंगलनाथ मंदिर समिति के खजाने में भी खासी कमाई हो रही है। यहां हर महीने १५ से २० लाख रुपए सिर्फ शीघ्र दर्शन के रूप में प्राप्त हो रहे हैें। हालांकि यहां शीघ्र दर्शन शुल्क सबसे कम १०० रुपए प्रति दर्शनार्थी है। इसके अलावा भात पूजन व अन्य पूजन की कमाई अलग है। प्रशासक केके पाठक बताते हैं शीघ्र दर्शन दर्शनार्थियों को अलग कतार से मंदिर तक पहुंचाते हैं। गर्भगृह की अनुमति नहीं रहती। बुजुर्ग, नि:शक्त, दिव्यांग आदि को नि:शुल्क दर्शन कराते हैं। मंदिर में औसतन ४० से ८० रुपए प्रतिदिन शीघ्र दर्शन की आय होती है। एक दिन मेें लगभग ३० हजार से अधिक दर्शनार्थी पहुंचते हैं। मंगलवार को यह संख्या दोगुनी से भी ज्यादा पहुंच जाती है।

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