Textile Waste: टेक्सटाइल रिकवरी प्रोजेक्ट बना रोजगार का जरिया

Textile Waste: पुराने कपड़ों से रोजगार और पर्यावरण संरक्षण की नई मिसाल
नवी मुंबई ने पुराने कपड़ों को कचरा मानने के बजाय उन्हें संसाधन में बदलने की अनोखी पहल शुरू की है। भारत की पहली म्युनिसिपल टेक्सटाइल रिकवरी फैसिलिटी (TRF) के जरिए टेक्सटाइल वेस्ट को रीसायकल और अपसाइकिल कर महिलाओं को रोजगार देने के साथ-साथ लैंडफिल में जाने वाले कचरे को भी कम किया जा रहा है।

भारत में टेक्सटाइल वेस्ट की चुनौती
भारत में हर साल करीब 7.8 मिलियन मीट्रिक टन पुराने कपड़े फेंके जाते हैं। इनमें से अधिकांश कपड़े लैंडफिल में चले जाते हैं, जबकि इन्हें दोबारा इस्तेमाल या रीसायकल किया जा सकता है।
कैसे काम करता है यह प्रोजेक्ट?
- हाउसिंग सोसायटियों में टेक्सटाइल कलेक्शन बिन लगाए गए।
- कपड़ों की वैज्ञानिक तरीके से छंटाई की जाती है।
- दोबारा इस्तेमाल, रीसाइक्लिंग और अपसाइक्लिंग के अनुसार वर्गीकरण होता है।
- पुराने कपड़ों से बैग, पाउच, होम डेकोर और अन्य उत्पाद तैयार किए जाते हैं।
महिलाओं को मिला रोजगार
इस पहल के तहत 300 से अधिक महिलाओं को प्रशिक्षण दिया गया। फिलहाल 150 से ज्यादा महिलाएं कपड़ों की छंटाई, सिलाई और अपसाइक्लिंग के जरिए ₹9,000 से ₹15,000 प्रति माह तक की आय अर्जित कर रही हैं।
पर्यावरण को भी बड़ा फायदा
- 30 मीट्रिक टन टेक्सटाइल वेस्ट एकत्र किया गया।
- 25.5 मीट्रिक टन कपड़ों की वैज्ञानिक प्रोसेसिंग हुई।
- 41,000 से अधिक उत्पाद प्रोसेस किए गए।
- 400 से ज्यादा अपसाइक्लिंग प्रोडक्ट तैयार किए गए।
क्यों है यह मॉडल खास?
यह पहल सर्कुलर इकोनॉमी को बढ़ावा देने के साथ महिलाओं को आत्मनिर्भर बना रही है और शहरी कचरा प्रबंधन का एक सफल मॉडल बनकर उभरी है, जिसे देश के अन्य शहर भी अपना सकते हैं।









