Advertisement

शिप्रा आरती पर संघर्ष : महाकाल मंदिर प्रबंध समिति और पंडे आमने-सामने

विरोध के बाद प्रबंध समिति ने स्थान बदला, पंडा समिति जा सकती है कोर्ट

Advertisement

अक्षरविश्व न्यूज उज्जैन। रामघाट पर होने वाली सांध्यकालीन शिप्रा आरती को लेकर महाकाल मंदिर प्रबंध समिति और श्री क्षेत्र पंडा समिति आमने-सामने हो गए हैं। गुरुवार शाम शिप्रा आरती करने पहुंची मंदिर प्रबंध समिति को पंडों ने लौटा दिया। हंगामे और विरोध के बाद प्रबंध समिति को दत्तअखाड़ा-रामघाट रपट के पास आरती करनी पड़ी। पंडा समिति ने आरती को लेकर कोर्ट जाने की चेतावनी भी दी है।

दरअसल, रामघाट पर श्री क्षेत्र पंडा समिति के सदस्य शाम के समय शिप्रा आरती करते हैं। पहले यह आरती छोटे स्वरूप में होती थी, फिर इसका स्वरूप बढ़ता चला गया। पिछले सिंहस्थ से पहले 2015 में तत्कालीन कलेक्टर कवींद्र कियावत ने इसे और भव्य रूप देने का आह्वान किया तो श्रीक्षेत्र पंडा समिति ने बड़े पैमाने पर आरती शुरू की। आरती का स्वरूप धीरे-धीरे व्यापक होता गया और रोजाना हजारों की संख्या में लोग यहां पहुंचने लगे। बस यहीं से रामघाट पर अव्यवस्था का दौर शुरू हुआ। आरतीस्थल के आसपास तख्त लगने लगे और यहां से पूजन सामग्री बेची जाने लगी। इस वजह से घाट पर आवागमन में दिक्कत होने लगी।

Advertisement

सिंहस्थ में यह स्थिति भगदड़ का कारण नहीं बन जाए, ऐसे में प्रशासन ने एक महीने पहले ‘ऑपरेशन क्लीन रामघाट’ चलाया और तख्त, लाउड स्पीकर जब्त कर लिए। भविष्य में अव्यवस्था ना हो इसके चलते सरकारी स्तर पर आरती कराने का फैसला किया। इसी कड़ी में गुरुवार से आरती की शुरुआत की गई।

श्री महाकालेश्वर वैदिक प्रशिक्षण एवं शोध संस्थान के बटुक पहुंचे आरती करने
श्री महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति ने श्री महाकालेश्वर वैदिक प्रशिक्षण एवं शोध संस्थान के निदेशक पीयूष त्रिपाठी को बटुकों के साथ आरती करने की जिम्मेदारी दी। गुरुवार शाम बटुकों, डीजे और अन्य संसाधनों के साथ महाकाल मंदिर प्रबंध समिति के लोग आरती करने पहुंचे। तो पंडे विरोध में खड़े हो गए। उन्होंने तय स्थल पर आरती नहीं करने दी। उन्होंने विरोध में नारे लगाए और वापस जाने का आह्वान किया। एसडीएम एलएन गर्ग ने समझाने की कोशिश की तो पंडों ने मना कर दिया। ऐसे में बटुकों को रपट के पास ले जाया गया और यहां आरती की गई।

Advertisement

घाट सदियों से पंडों के, आरती का अधिकार भी उनका ही
तीर्थ क्षेत्र के घाट सदियों से पंडों के हैं। हमारे पूर्वज घाटों की देखरेख करते थे, यजमानों के पितृकर्म कराते थे। मां शिप्रा की आरती करते थे। नदी का शुद्धिकरण करते थे। यहां आरती करने का अधिकार भी पंडों का है। प्रशासन बेवजह का विवाद खड़ा कर रहा है। हम विवाद नहीं चाहते हैं, अगर प्रशासन ने ज्यादती की तो कोर्ट जाएंगे।
राजेश त्रिवेदी, अध्यक्ष, श्री क्षेत्र पंडा समिति उज्जैन

मंदिर समिति को आरती नहीं करने देंगे
हमारे पूर्वजों सदियों से शिप्रा आरती करते रहे हैं। यह हमारा अधिकार है। हम मंदिर प्रबंध समिति को आरती नहीं करने देंगे।
तुषार जोशी, इंजनवाला पंडा

बटुकों को भेजा था
श्री महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति ने 21 बटुकों को रामघाट पर शिप्रा आरती के लिए भेजने का कहा था। उसी मुताबिक आरती करने बटुक गए थे। हमारे सामने तो विरोध नहीं हुआ।
पीयूष त्रिपाठी
निदेशक, श्री महाकालेश्वर वैदिक प्रशिक्षण एवं शोध संस्थान

हम व्यवस्था के लिए गए थे: रामघाट पर शिप्रा आरती करना प्रशासन ने तय किया है। इसी के तहत शिप्रा आरती के लिए गए थे। पंडों को समझाया है।
एलएन गर्ग, एसडीएम उज्जैन

मंदिर प्रबंध समिति से कोई बोलने को तैयार नहीं: शिप्रा आरती के संबंध में श्री महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति का पक्ष जानने की कई कोशिश की गई लेकिन कई प्रयास के बाद भी नहीं मिल सका।

Related Articles

📢 पूरी खबर पढ़ने के लिए

बेहतर अनुभव के लिए ऐप का उपयोग करें

ऐप में पढ़ें
ऐप खोलें
ब्राउज़र में जारी रखें