वीकेंड : मानसूनी सीजन में आपको बुला रही हैं मांडू की वादियां

उज्जैन। आसमान से गिरती हल्की फुहारें , जमीन पर रेंगते बादल, पानी के बीच लंगर डाले बैठा जहाज महल, सागौन- साल, के पेड़ों से भरी वादियां, खुरसानी इमली के भारी-भरकम दरख्त नीलकंठ महादेव का झरना और ऊंचाई से झांकता रानी रूपमति महल।
मानसूनी सीजन के दस वीकेंड पर बाजबहादुर और रानी रूपमति की अमर प्रेम कहानी जानने-सुनने के लिए मांडू (मांडव) आपको बुला रहा है। अगस्त के दूसरे सप्ताह में पूरा क्षेत्र हरियाली से ढंका हुआ है और फुहारें व बरसाती मौसम को और खुशनुमा बना रही हैं।
कैसे जा सकते हैं
धार जिले के मांडू कस्बे तक आप उज्जैन से दो तरफ से पहुंच सकते हैं। पहला उज्जैन से इंदौर, धार, नालछा और दूसरा उज्जैन से बदनावर, नागदा (धार), धार, नालछा होते हुए। इंदौर तरफ से यह दूरी 155 किलोमीटर रहेगी तो बदनावर तरफ से 140 । मध्यप्रदेश की निजी बसें और गुजरात स्टेट ट्रांसपोर्ट की बसें सीधे धार तक जाती हैं। यहां से लोकल बस से मांडू पहुंचा जा सकता है। निजी वाहन अगर आपके पास है तो सीधे भी जा सकते हैं। सुबह जाकर शाम तक लौटा जा सकता है।
क्या देखें
जहाज महल, रानी रूपमति महल, इको पाइंट, नीलकंठ महादेव, हिंडोला महल, जामी मस्जिद, होशंगशाह का मकबरा, असरफी महल, रेवा कुंड, चंपाबावड़ी, हमाम
क्या खाएं
मांडू के आसपास आदिवासी रहते हैं। इस जनजाति में दाल-पानिया, मक्का की रोटी जैसी देसी डिश प्रसिद्ध हैं। आपका इनका मजा ले सकते हैं। बालम ककड़ी, देसी भुट्टे, खुरसानी इमली भी आपका जायका बढ़ा सकते हैं।









