छात्रसंघ चुनाव की हलचल : विवि कैंपस में चुनावी हवा गर्म, जनसंपर्क और सदस्यता अभियान पर जोर

छात्र संगठनों ने विद्यार्थियों को अपनी तरफ मोडऩे के लिए शुरू किया अभियान
अक्षरविश्व न्यूज उज्जैन। छात्रसंघ चुनाव की औपचारिक घोषणा भले ही अभी नहीं हुई हो, लेकिन हाईकोर्ट से चुनाव कराने के निर्देश मिलने बाद शहर में भी विद्यार्थी संगठनों ने अपनी तैयारी तेज कर दी है। यह संगठन कॉलेज, विवि में सदस्यता अभियान चला रहे हैं और विद्यार्थियों से सीधा संवाद कर जनसंपर्क मजबूत करने में जुटे हैं। संभावित चुनावती मुद्दों और रणनीति पर भी बात की जा रही है। विद्यार्थियों से सीधे संवाद किया जा रहा है और उन्हें छात्र अधिकारों, मतदान तथा छात्रसंघ की भूमिका की जानकारी दी जा रही है।
छात्र संगठन प्रत्यक्ष प्रणाली से चुनाव की मांग प्रमुख मुद्दे के रूप में उठा रहे हंै। संगठनों का कहना है कि प्रत्यक्ष चुनाव में विद्यार्थी सीधे अपने प्रतिनिधि का चुनाव कर सकेंगे, जिससे प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता बनी रहेगी। इसके अलावा फीस वृद्धि, परीक्षा परिणामों में कथित गड़बड़ी, मूल्यांकन व्यवस्था और कॉलेजों में बुनियादी सुविधाओं की कमी जैसे मुद्दों को भी उठाया जा रहा है। छात्रसंघ के नाम पर लिए जाने वाले शुल्क और उसके उपयोग को लेकर भी सवाल खड़े किए जा रहे हैं।
आजादी महोत्सव विद्यार्थियों से जुडऩे का प्रमुख मुद्दा
फिलहाल विद्यार्थी संगठनों का फोकस आजादी महोत्सव पर है। 15 अगस्त को वह अलग-अलग परिसरों में कार्यक्रम करने की रूपरेखा तैयार कर रहे हैं। इसके तहत विद्यार्थियों को एक साथ खड़ा कर राष्ट्रगान कराने और तिरंगा यात्रा निकालने की तैयारी की जा रही है।
तैयारी पर बोले छात्र संगठन प्रमुख
एबीवीपी महानगर मंत्री सिद्धार्थ यादव ने बताया कि छात्रसंघ चुनाव की संगठन स्तर पर लगातार तैयारियां चल रही हैं। कॉलेज और विवि परिसरों में सदस्यता अभियान चल रहा है। इसके माध्यम से विद्यार्थियों को संगठन से जोड़ा जा रहा है। चुनावी घोषणा के बाद पदों के लिए उम्मीदवार तय किए जाएंगे। 15 अगस्त को सभी परिसरों में विशेष आयोजन किए जाएंगे। इसमें सामूहिक राष्ट्रगान और तिरंगा यात्रा प्रस्तावित है। हमारे कार्यकर्ता कक्षाओं में जाकर विद्यार्थियों से सीधा संवाद कर रहे हैं। संगठन से जोडऩे के लिए जनसंपर्क अभियान चलाया जा रहा है।
सिद्धार्थ यादव , महानगर मंत्री एबीवीपी
छात्रसंघ चुनाव प्रत्यक्ष प्रणाली से होना चाहिए, ताकि विद्यार्थी अपना प्रतिनिधि चुन सकें और पारदर्शिता बनी रहे। अप्रत्यक्ष प्रणाली में प्रशासन के माध्यम से प्रतिनिधि चुनने की व्यवस्था में गड़बड़ी की आशंका रहती है। छात्रसंघ के नाम पर विद्यार्थियों से लिए जाने वाले शुल्क का उपयोग भी छात्रों की सुविधाओं और शैक्षणिक हित में होना चाहिए। हमारी लड़ाई किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं, बल्कि ऐसी व्यवस्था के खिलाफ है जिसमें छात्रों की आवाज और उनके अधिकारों को नजरअंदाज किया जाता है।
हिमांशु शुक्ल,
जिलाध्यक्ष, एनएसयूआई









