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रामघाट आरती विवाद : श्री पंडा समिति ने खोला मोर्चा, 9 सितंबर को धर्मसभा

देशभर के तीर्थ पुरोहित उज्जैन में जुटेंगे, प्रेस कॉन्फ्रेंस में दी आंदोलन की जानकारी

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अक्षरविश्व न्यूज उज्जैन। रामघाट पर महाकाल मंदिर प्रबंध समिति द्वारा की जाने वाली सांध्य आरती को लेकर श्री क्षेत्र पंडा तीर्थ समिति ने मोर्चा खोल दिया है। उसने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर आंदोलन की जानकारी दी। इसके मुताबिक 9 सितंबर को देशभर के तीर्थ पुरोहित उज्जैन में एकत्र होंगे और धर्मसभा के माध्यम से प्रशासन को सांध्य शिप्रा आरती के दखल पर चुनौती देंगे।

दरअसल, करीब एक महीने से यह मसला सुर्खियों में है। श्री महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति यहां बटुकों के माध्यम से शिप्रा आरती कर रही है। श्री क्षेत्र पंडा तीर्थ पुरोहित समिति इसे परंपरा का उल्लंघन मानती है। अब तक समिति के माध्यम से ही आरती की जाती रही है। पहले यह छोटे स्तर पर होती थी लेकिन 2015 से इसे भव्य स्तर पर शुरू किया गया। इसका नतीजा यह रहा कि आरती में बड़ी संख्या में लोग जुटने लगे। लोगों की भीड़ बढ़ी तो कारोबार भी चलने लगा और आरती के लिए दीपक, तेल, बत्ती, फूल प्रसादी बेची जाने लगी। दुकानें भी लगने लगीं तो फिर विवाद भी होने लगे।

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जब मामला तूल पकडऩे लगा तो श्री महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति ने यहां सांध्य आरती करने का फैसला किया। करीब 15 दिन से यह आरती चल रही है। श्री क्षेत्र तीर्थ पंडा-पुरोहित इसे लेकर हाईकोर्ट गई थी और यहां से एक महीने में कलेक्टर को समस्या का हल करने के निर्देश दिए गए हैं। इस संबंध में गुरुवार को श्री क्षेत्र तीर्थ पंडा-पुरोहित समिति के अध्यक्ष राजेश त्रिवेदी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की और अपने आंदोलन की जानकारी दी।

पहले राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक, दोपहर शिप्रा पूजन, शाम को धर्मसभा

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श्री क्षेत्र तीर्थ पंडा-पुरोहित की राष्ट्रीय इकाई की बैठक 9 सितंबर को रामघाट स्थित शगुन गार्डन में होगी। दिनभर चलने वाली बैठक में दोपहर 12 बजे शिप्रा पूजन किया जाएगा। त्रिवेदी ने बताया कि राष्ट्रीय अध्यक्ष रामकृष्ण त्रिपाठी (प्रयागराज), नवीन नागर (मथुरा), श्रीकांत वशिष्ठ (मथुरा), कन्हैया त्रिपाठी (बनारस) खासतौर पर कार्यकारिणी में शामिल होंगे। दिनभर बैठक के बाद शाम को रामघाट पर धर्मसभा होगी। इसके माध्यम से प्रशासन को चेतावनी दी जाएगी।

त्रिवेदी ने कहा कि प्रशासन धर्म को धंधे में बदल रहा है। जबकि धर्म आस्था का विषय है। अगर आरतियों की बुकिंग होने लगेगी तो आस्था कहां बचेगी? गरीब व्यक्ति तो आरती कभी भी नहीं कर सकेगा। क्या प्रशासन धर्म को अमीरों की कैद में रखना चाहता है? इसका ही विरोध किया जाएगा। उज्जैन से राष्ट्रव्यापी आंदोलन का शंखनाद होगा, क्योंकि यह मसला अकेला उज्जैन का नहीं है। बनारस, प्रयागराज, मथुरा, नाशिक में आरती आज भी तीर्थ पुरोहित महासभा ही कर रही है। आखिर उज्जैन में प्रशासन क्यों आरती कराने पर अड़ा है?

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