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गणेशजी का वाहन मूषक ही क्यों बना? जानें पौराणिक कथा

गणेश चतुर्थी के अवसर पर घरों और पंडालों में भगवान गणेश की स्थापना हो चुकी है। गणेश उत्सव के दौरान भक्त भगवान गणेश की पूजा-अर्चना के साथ उनके वाहन मूषक की भी पूजा करते हैं। गणेशजी को प्रथम पूजनीय देवता माना जाता है, वहीं मूषक उनका वाहन है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि आखिर मूषक ही गणेशजी का वाहन क्यों बना? इससे जुड़ी कई पौराणिक कथाएं प्रचलित हैं। आइए जानते हैं गणेशजी और उनके वाहन मूषक से जुड़ी रोचक कथा।

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क्रौंच कैसे बना गणेशजी का वाहन?

एक पौराणिक कथा के अनुसार, क्रौंच नामक एक गंधर्व से अनजाने में ऋषि वामदेव का अपमान हो गया। इससे क्रोधित होकर ऋषि ने क्रौंच को मूषक बनने का श्राप दे दिया। श्राप मिलने के बाद क्रौंच एक विशाल मूषक बन गया। वह जहां भी जाता, वहां उत्पात मचाता और लोगों को परेशान करता। उसके आतंक से ऋषि-मुनि भी चिंतित रहने लगे। एक दिन वह मूषक महर्षि पराशर के आश्रम में पहुंच गया। उस समय भगवान गणेश भी वहां मौजूद थे। मूषक ने आश्रम में काफी नुकसान पहुंचाया। तब भगवान गणेश ने अपने पाश से उसे पकड़ लिया। मूषक ने गणेशजी से क्षमा मांगी और अपनी गलती स्वीकार की। इसके बाद गणेशजी ने उसे दंड देने के बजाय अपना वाहन बनने का अवसर दिया। जब गणेशजी उस मूषक पर सवार हुए, तो वह उनका भार नहीं उठा सका। मूषक ने भगवान गणेश से अपना भार हल्का करने का अनुरोध किया। गणेशजी ने उसकी बात मान ली और तभी से मूषक उनका वाहन बन गया।

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मूषिकासुर की कथा भी है प्रचलित

गणेशजी के वाहन से जुड़ी एक अन्य कथा में मूषिकासुर नामक राक्षस का उल्लेख मिलता है। मान्यता है कि मूषिकासुर अपनी शक्तियों के कारण बहुत घमंडी हो गया था और देवताओं व ऋषियों को परेशान करता था। भगवान गणेश ने उसका अहंकार समाप्त किया और उसे परास्त कर दिया। इसके बाद मूषिकासुर ने गणेशजी से क्षमा मांगी। भगवान गणेश ने उसे अपना वाहन बना लिया। इसी कारण गणेशजी के साथ मूषक की पूजा भी की जाती है।

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मूषक का क्या है धार्मिक महत्व?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मूषक चंचल मन, इच्छाओं और अहंकार का प्रतीक माना जाता है। मूषक हमेशा इधर-उधर भागता रहता है, ठीक उसी तरह मन भी लगातार भटकता रहता है।

भगवान गणेश का मूषक पर सवार होना यह संदेश देता है कि बुद्धि, विवेक और ज्ञान के माध्यम से मन की चंचलता और अहंकार पर नियंत्रण पाया जा सकता है। गणेशजी की पूजा बुद्धि, ज्ञान, विवेक और शुभता की कामना के लिए की जाती है। उनके साथ मूषक की उपस्थिति हमें यह भी सिखाती है कि कोई भी प्राणी छोटा या बड़ा नहीं होता। हर जीव का अपना महत्व है।

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