अडानी ग्रुप शुरू कर सकता है एयरलाइन, सरकार कर रही समीक्षा

अडानी ग्रुप के एविएशन सेक्टर में कदम बढ़ाने की संभावनाएं तेज हो गई हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ग्रुप एक नई एयरलाइन शुरू करने की योजना पर विचार कर रहा है। इसके लिए सरकार स्तर पर प्रस्ताव के संभावित फायदे और नुकसान का आकलन किया जा रहा है।
हालांकि अभी तक कोई फैसला नहीं लिया गया है। दिल्ली और मुंबई एयरपोर्ट 2006 में पीपीपी मॉडल के तहत आए थे। लेकिन नियमों के मुताबिक उनके ऑपरेटर किसी एयरलाइन में 10% से ज्यादा हिस्सेदारी नहीं रख सकते। हाल ही में अडानी ग्रुप ने इसमें बदलाव की मांग की थी।
एक रिपोर्ट के मुताबिक नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू ने मंगलवार को कहा, “सरकार का मानना है कि भारत में और एयरलाइनों की जरूरत है, क्योंकि यहां कई नए एयरपोर्ट बनने वाले हैं और मांग भी बढ़ रही है। हमारा लक्ष्य है कि देश में कम से कम पांच एयरलाइन हों और हर एक के पास कम से कम 100 विमान हों। इसलिए, अगर कोई एयरलाइन शुरू करना चाहता है, तो सरकार इसका समर्थन करती है। मुद्दा यह है कि कोई एयरपोर्ट (मुंबई और दिल्ली) ऐसा करे। हम इसके फायदे और नुकसान की जांच कर रहे हैं।”
एयरलाइन इंडस्ट्री में दोफाड़
नायडू ने कहा कि अडानी की मांग पर अभी तक कोई फैसला नहीं लिया गया है। उन्होंने कहा, “हमें एक ऐसा सिस्टम बनाना होगा जिसमें नुकसान का ध्यान रखा जाए। फायदे तो हमें पता ही हैं। सरकार में ऐसा कोई नियम या क्लॉज नहीं है जो एयरपोर्ट ऑपरेटरों को एयरलाइन चलाने से रोके, सिवाय दिल्ली और मुंबई के एग्रीमेंट के। अगर बेंगलुरु एयरपोर्ट की ऑपरेटर BIAL एयरलाइन चलाना चाहती है, तो उसे रोकने वाला कोई नियम नहीं है। इसीलिए हमें संतुलित नजरिया अपनाना होगा।”
अडानी की मांग ने एयरलाइन इंडस्ट्री को दो हिस्सों में बांट दिया है। इंडिगो के प्रमोटर राहुल भाटिया इसका विरोध कर रहे हैं, जबकि आकासा के फाउंडर विनय दुबे इसके पक्ष में हैं। अभी इस मार्केट पर इंडिगो और एयर इंडिया का दबदबा है जिसे सरकार तोड़ना चाहती है। इंडिगो की भारतीय बाजार में हिस्सेदारी 66.3% से ऊपर पहुंच चुकी है।
एविएशन मार्केट का हाल
अडानी ग्रुप अभी मुंबई एयरपोर्ट और सात अन्य एयरपोर्ट चलाता है। इसी तरह GMR एयरपोर्ट्स दिल्ली एयरपोर्ट और देश के चार अन्य एयरपोर्ट को मैनेज करती है। पिछले दशक में भारत में एयरलाइंस की संख्या में काफी कमी आई है। जेट एयरवेज और गो एयरलाइंस बंद हो चुकी हैं। आकासा एयर और स्पाइसजेट भी अपना वजूद बचाने के लिए संघर्ष कर रही हैं। भारत दुनिया का चौथा सबसे बड़ा एविएशन मार्केट है।









