AI से इंसानों के खतरे पर बोले जुकरबर्ग, कहा- सावधानी जरूरी

Will AI Kill Humans: आज AI को लेकर सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या AI इंसानों का खत्म कर देगा? यही सवाल मेटा के सीईओ मार्क जुकरबर्ग से भी पूछा गया। इस पर उनके जवाब से ज्यादा दिलचस्प वो मुस्कुराहट थी, जो उनके जवाब से पहले आई। दरअसल AI पर इस सवाल को लेकर उन्होंने कहा कि अगर कंपनियों ने ध्यान रखा तो शायद नहीं। उन्होंने साफ किया कि वे AI के भविष्य को लेकर बहुत सकारात्मक हैं और उन्हें नहीं लगता इससे इंसानों को खतरा होगा।
इंसानों के खात्मे पर क्या बोले जुकरबर्ग
इस सवाल पर एक मुस्कुराहट के बाद मार्क ने उस थ्योरी को ही नाकर दिया, जिसमें AI से इंसानों को खत्म किए जाने की बात उठाई जाती है। उनका कहना था कि इसे लेकर बेवजह लोगों को डराने की जरूरत नहीं है।
उन्होंने कहा कि अगर कंपनियां तकनीक को विकसित करते हुए जिम्मेदारी से काम करें तो AI से ज्यादा फायदेमंद समाज के लिए कुछ नहीं होगा। हालांकि, उन्होंने यह भी साफ किया कि कंपनियों को किसी तरह के नियम से बांधने की जरूरत नहीं है और हर लैब को अपनी खामियों को खुद दूर करना चाहिए।
म्यूज मॉडल को रोकने की बताई वजह
अपनी बात को ज्यादा साफ करने के लिए उन्होंने अपने म्यूज AI का उदाहरण दिया। उन्होंने बताया कि इसका शानदार वर्जन कई महीने पहले ही तैयार कर लिया गया था। इसके बावजूद कंपनी ने इसे तुरंत लॉन्च करने की जगह रोक दिया, क्योंकि वे पहले प्राइवेसी और सुरक्षा से जुड़ी चिंताओं को पूरी तरह ठीक करना चाहते थे।
जुकरबर्ग का साफ सीधा तर्क दिया कि जब तक यूजर्स का भरोसा नहीं होगा, तब तक कोई भी इस नई तकनीक को दिल से स्वीकार नहीं करेगा।
जुकरबर्ग की बातों से क्या समझ आया?
मार्क जुकरबर्ग के इंटरव्यू से यह बात निकलकर आई कि इस समय AI को लेकर दुनिया दो मतों में बटी हुई है। एक तरफ OpenAI और एंथ्रोपिक जैसी कंपनियां सरकारों से सख्त निगरानी और वैश्विक समन्वय की मांग कर रही हैं। वहीं एनवीडिया के सीईओ जेन्सन हुआंग और मार्क जुकरबर्ग रफ्तार को धीमा करने के खिलाफ हैं।
गौरतलब है कि 29 सितंबर को होने वाली एक अहम बैठक में पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और अन्य शीर्ष नेता इस मुद्दे पर चर्चा करेंगे। हालांकि ट्रंप भी पहले अपना मत दे चुके हैं कि सख्त पाबंदियों से AI की रेस में अमेरिका पिछड़ जाएगा।









