Dengue में प्लेटलेट्स कम हों तो क्या करें? जानें सही देखभाल और जरूरी उपाय

डेंगू होने पर मरीज और उसके परिवार को सबसे ज्यादा चिंता प्लेटलेट्स कम होने की होती है। कई बार प्लेटलेट्स की संख्या तेजी से गिरने लगती है, जिससे लोग घबरा जाते हैं। लेकिन जरूरी नहीं कि हर मरीज को प्लेटलेट्स चढ़ाने की जरूरत पड़े। सही समय पर डॉक्टर की निगरानी, पर्याप्त तरल पदार्थ और उचित देखभाल से ज्यादातर मरीज ठीक हो सकते हैं। डेंगू संक्रमित एडीज मच्छर के काटने से फैलता है। इसके सामान्य लक्षणों में तेज बुखार, सिरदर्द, आंखों के पीछे दर्द और मांसपेशियों व जोड़ों में दर्द शामिल हैं। कुछ मरीजों में गंभीर लक्षण भी दिखाई दे सकते हैं, इसलिए बीमारी को हल्के में नहीं लेना चाहिए।
डेंगू में प्लेटलेट्स कम हों तो घबराएं नहीं
डेंगू के दौरान प्लेटलेट्स का कम होना आम बात है। कई मरीजों में बीमारी से उबरने के साथ इनकी संख्या अपने आप बढ़ने लगती है। इसलिए केवल प्लेटलेट्स की संख्या देखकर इलाज का फैसला नहीं किया जाता। मरीज की हालत, ब्लड प्रेशर, रक्तस्राव और अन्य लक्षणों को भी ध्यान में रखा जाता है। डॉक्टर की सलाह के अनुसार ब्लड टेस्ट करवाते रहें और बिना चिकित्सकीय सलाह के प्लेटलेट्स चढ़ाने का फैसला न लें।
1. शरीर में पानी की कमी न होने दें
डेंगू में शरीर को हाइड्रेट रखना बेहद जरूरी है। बुखार और उल्टी के कारण शरीर में पानी की कमी हो सकती है। ऐसे में डॉक्टर की सलाह के अनुसार पानी, ओआरएस और अन्य तरल पदार्थ लेते रहें। नारियल पानी और सूप भी तरल पदार्थों की जरूरत पूरी करने में मदद कर सकते हैं। अगर मरीज लगातार उल्टी कर रहा है या पानी नहीं पी पा रहा है, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
2. खाने-पीने का रखें ध्यान
डेंगू के दौरान हल्का और पौष्टिक भोजन लेना बेहतर रहता है। खिचड़ी, दाल, सूप और आसानी से पचने वाले खाद्य पदार्थ दिए जा सकते हैं। यदि मरीज की भूख कम है, तो थोड़ी-थोड़ी मात्रा में भोजन दें। पपीता, अनार और दूसरे फल संतुलित आहार का हिस्सा हो सकते हैं, लेकिन किसी खास फल या जूस से प्लेटलेट्स तेजी से बढ़ने की गारंटी नहीं है।
3. पपीते के पत्तों का रस कितना फायदेमंद?
डेंगू में पपीते के पत्तों का रस पीने की सलाह अक्सर दी जाती है। हालांकि, प्लेटलेट्स बढ़ाने में इसकी प्रभावशीलता को लेकर पर्याप्त मजबूत वैज्ञानिक प्रमाण नहीं हैं। इसलिए इसे डेंगू का इलाज न समझें और डॉक्टर की सलाह के बिना इसका सेवन न करें। खासकर बच्चों और गर्भवती महिलाओं को ऐसे घरेलू नुस्खों से बचना चाहिए।
4. दवाएं डॉक्टर की सलाह से लें
डेंगू का कोई विशेष एंटीवायरल इलाज नहीं है। उपचार में बुखार और दूसरे लक्षणों को नियंत्रित करने के साथ शरीर में तरल पदार्थों का संतुलन बनाए रखना महत्वपूर्ण है। बुखार के लिए पैरासिटामोल डॉक्टर की सलाह से ली जा सकती है। एस्पिरिन, आइबुप्रोफेन और अन्य NSAID दर्द निवारक दवाओं से बचें, क्योंकि इनसे रक्तस्राव का खतरा बढ़ सकता है।
इन लक्षणों को नजरअंदाज न करें
पेट में तेज दर्द, लगातार उल्टी, नाक या मसूड़ों से खून आना, खून की उल्टी, असामान्य सुस्ती, बेचैनी या सांस लेने में परेशानी होने पर तुरंत अस्पताल जाएं। बुखार उतरने के बाद भी डेंगू गंभीर हो सकता है।
याद रखें: डेंगू में केवल प्लेटलेट्स बढ़ाने पर ध्यान देने के बजाय मरीज की पूरी स्थिति पर नजर रखना जरूरी है। समय पर चिकित्सकीय देखभाल ही सबसे सुरक्षित रास्ता है।









