सीएम ने काजीरंगा से लाए आठ जंगली भैंसों को 17 हेक्टेयर के बाड़े में छोड़ा

कान्हा टाइगर रिजर्व के सूपखार में सौ साल बाद जंगली भैंसों की वापसी
अक्षरविश्व न्यूज बालाघाट। मप्र में करीब 100 साल पहले विलुप्त हो चुके जंगली भैंसों को उनके प्राकृतिक आवास में फिर से बसाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने रविवार को कान्हा टाइगर रिजर्व के सूपखार परिक्षेत्र में क्वारंटाइन अवधि पूरी कर चुके आठ जंगली भैंसों को एक हेक्टेयर के छोटे बाड़े से 17 हेक्टेयर क्षेत्र में निर्मित बड़े बाड़े में छोड़ा। इस पहल का उद्देश्य जंगली भैंसों को स्थानीय वातावरण और जलवायु के अनुकूल बनाकर उनके प्राकृतिक आवास में पुर्नस्थापित करना है।
सीएम ने कहा कि लगभग 100 वर्षों बाद कान्हा टाइगर रिजर्व के सूपखार परिक्षेत्र में जंगली भैंसों की पुनस्र्थापना का दूसरा चरण शुरू हुआ है। असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के सहयोग से काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान से करीब 2200 किमी की दूरी तय कर आठ जंगली भैंसों को मप्र लाया गया है। जंगली भैंसा पुर्नस्थापना परियोजना के तहत 28 अप्रैल 2026 को काजीरंगा से तीन मादा और एक नर जंगली भैंसे को सूपखार में बनाए गए एक हेक्टेयर के बाड़े में लाया गया था।
इसके बाद 9 मई 2026 को तीन मादा और एक नर भैंसे को भी यहां रखा गया। कुल छह मादा और दो नर भैंसों को क्वारंटाइन में रख स्थानीय वातावरण के अनुकूल होने का अवसर दिया गया। अवधि पूरी होने के बाद इन्हें 17 हेक्टेयर के बड़े बाड़े में स्थानांतरित किया गया।









