छह महीने मिलेगी 550 मेगावाट बिजली

कम बारिश और कोयले की किल्लत से लडख़ड़ाई बिजली आपूर्ति को मिलेगी पंजाब से मदद
अक्षरविश्व न्यूज भोपाल। मप्र में बिजली की मांग और उपलब्धता के बीच संतुलन बनाने के लिए सरकार ने पंजाब के साथ पावर बैंकिंग व्यवस्था का सहारा लिया है। इसके तहत 15 अक्टूबर से मार्च 2027 तक प्रदेश को रोजाना 550 मेगावाट बिजली मिलेगी। हालांकि, यह बिजली मुफ्त आपूर्ति नहीं है, बल्कि दोनों राज्यों के बीच बिजली के बदले बिजली देने का समझौता है। मध्य प्रदेश खरीफ सीजन में पंजाब को जितनी बिजली दे रहा था, अब रबी सीजन में उतनी ही बिजली वापस लेगा।
प्रदेश में इस बार कम बारिश के कारण जल विद्युत परियोजनाओं के उत्पादन पर असर पड़ा है। वहीं, कोयले की आपूर्ति प्रभावित होने से ताप विद्युत संयंत्रों पर भी दबाव बढ़ा है। इसका असर बिजली आपूर्ति पर दिखाई दिया और ग्रामीण क्षेत्रों में कटौती की शिकायतें सामने आईं। खेतों में सिंचाई प्रभावित होने से किसानों की चिंता भी बढ़ी है। ऐसे में पंजाब से मिलने वाली बिजली रबी सीजन की बढ़ती मांग को संभालने में मददगार हो सकती है।
बिजली की उपलब्धता मजबूत करने के लिए प्रदेश में दीर्घकालीन परियोजनाओं पर भी काम किया जा रहा है। खबर के अनुसार, नीमच-मंदसौर क्षेत्र में गांधीसागर के पास लगभग 1,920 मेगावाट क्षमता की पंप स्टोरेज परियोजना दिसंबर से शुरू करने की योजना है। पंप स्टोरेज परियोजनाओं में अतिरिक्त बिजली का उपयोग पानी को ऊंचाई पर स्थित जलाशय तक पहुंचाने में किया जाता है। जरूरत के समय इसी पानी से बिजली बनाई जा सकती है। ऐसी परियोजनाएं मांग बढऩे पर बिजली उपलब्ध कराने और नवीकरणीय ऊर्जा के बेहतर उपयोग में सहायक होती हैं। फिलहाल, रबी सीजन में पंजाब से मिलने वाली 550 मेगावाट बिजली प्रदेश की आपूर्ति व्यवस्था को अतिरिक्त सहारा देगी। अब निगाहें इस बात पर रहेंगी कि बिजली की बढ़ती मांग के बीच सरकार ग्रामीण क्षेत्रों और
किसानों को कितनी निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित कर पाती है।
रबी सीजन में बढ़ जाती है बिजली की मांग
मध्यप्रदेश में अक्टूबर से मार्च के बीच गेहूं और अन्य रबी फसलों की सिंचाई के कारण बिजली की मांग तेजी से बढ़ती है। इस अवधि में मांग 17 हजार से 18 हजार मेगावाट तक पहुंचने का अनुमान है। दूसरी ओर, पंजाब में धान की खेती और गर्मी के कारण जून से सितंबर के बीच बिजली की खपत अधिक रहती है, जबकि सर्दियों में वहां अतिरिक्त बिजली उपलब्ध हो सकती है। इसी मौसमी अंतर का लाभ उठाने के लिए दोनों राज्यों के बीच पावर बैंकिंग समझौता किया गया है। इसके तहत मध्यप्रदेश खरीफ सीजन में पंजाब को बिजली देता है और रबी सीजन में पंजाब से उतनी ही बिजली प्राप्त करता है। इस व्यवस्था में तत्काल नकद भुगतान के बजाय बिजली का आदान-प्रदान किया जाता है।
कटौती से राहत की उम्मीद, लेकिन आपूर्ति की चुनौतियां बरकरार
पंजाब से रोजाना 550 मेगावाट बिजली मिलने से प्रदेश की उपलब्ध बिजली में बढ़ोतरी होगी। इससे मांग और आपूर्ति के बीच अंतर कम करने में मदद मिल सकती है। खासकर सिंचाई के समय ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली की उपलब्धता बेहतर बनाए रखने में यह व्यवस्था उपयोगी साबित हो सकती है। हालांकि, बिजली कटौती से पूरी तरह मुक्ति मिलना कई परिस्थितियों पर निर्भर करेगा। वास्तविक राहत के लिए ताप विद्युत संयंत्रों को पर्याप्त कोयला मिलना, जल विद्युत उत्पादन की स्थिति और बिजली की मांग का प्रबंधन भी महत्वपूर्ण होगा। इसलिए पंजाब से मिलने वाली बिजली को संकट से निपटने का एक महत्वपूर्ण उपाय माना जा सकता है, लेकिन इसे सभी समस्याओं का स्थायी समाधान नहीं माना जा सकता।









